त्तर प्रदेश विधानभवन राजधानी लखनऊ आने वाले लोगों के लिए हमेशा से आकर्षण का केन्द्र रहा है। यहां की विधानसभा ने देश को जहां कई दिग्गज नेता दिए हैं, वहीं यह सदन कई ऐतिहासिक फैसलों का गवाह बना है, लेकिन ताजा घटनाक्रम में जिस तरह से विधानसभा के अन्दर विस्फोटक बरामद हुआ है, उसने कई अहम सवाल खड़े कर दिए हैं। चौबीसों घण्टे सुरक्षा के घेरे में रहने वाली इस इमारत को बेहद महफूज माना जाता है। खासतौर से विधानसभा सत्र के दौरान सुरक्षा के विशेष इंतजाम होते हैं। ऐसे में इन सबके बीच सदन के अन्दर पीईटीएन जैसा विस्फोटक पहुंचना सुरक्षा की बड़ी लापवाही माना जा रहा है। हालांकि इस मामले को बेहद गम्भीरता से लेते हुए जांच राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी (एनआईए) को सौंपी जा रही है, लेकिन बड़ा सवाल अब भी यही है कि इतना घातक विस्फोटक सदन के अन्दर कैसे पहुंचा और इसके पीछे किन लोगों का हाथ है। वहीं इस बात से भी इनकार नहीं किया जा सकता है कि यह योगी आदित्यनाथ सरकार के खिलाफ किसी बड़ी साजिश का हिस्सा हो।

सुरक्षा के लिए उठाए जाएंगे कदम

सदन में बरामद विस्फोटक की फॉरेंसिक जांच में पीईटीएन की पुष्टि होने के बाद विधानसभा अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित ने इसे देश को अपमानित करने जैसा बताया है। उन्होंने कहा कि अब प्रान्तीय सशस्त्र बल और त्वरित कार्रवाई बल की टीम विधानसभा में तैनात की जाएगी इसके साथ ही विधानसभा के सभी एंट्री गेट पर बॉडी स्कैनर लगाए जाएंगे। साथ ही सुरक्षा के लिहाज से सभी पूर्व विधायकों के पास रद्द किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि विधायक के ड्राइवर के भी पास बनाए जाएंगे। पूरे विधानसभा भवन में एटीएस भी तैनात की जाएगी।

500 ग्राम पीईटीएन विधानभवन का मिटा सकता है नामोनिशान

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की बात कही है। उन्होंने कहा कि यह मामला 22 करोड़ लोगों की सुरक्षा से जुडा है। इसका खुलासा होना ही चाहिए। इसमें सभी सदस्य सहयोग करेंगे। योगी ने कहा कि सुरक्षा सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है, इसमें सबका सहयोग जरुरी है। उन्होंने कहा कि सफाईकर्मियों को मिला पाउडर पहले सामान्य लगा, लेकिन जांच के बाद मिले लैब की रिपोर्ट से पता चला कि यह शक्तिशाली विस्फोटक पीईटीएन है। इसकी मात्रा तो केवल 150 ग्राम थी लेकिन इसके विस्फोट से बड़ा नुकसान हो सकता था। पूरे विधानभवन को उड़ाने के लिये 500 ग्राम यह विस्फोटक काफी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सवाल यह उठता है कि आखिर वह कौन लोग हैं जिन्होंने इसे यहां तक पहुंचाया। जनप्रतिनिधियों के विशेषाधिकार हैं तो क्या उन्हें सुरक्षा में छूट दे देंगे। यह खतरनाक प्रवृत्ति है। खतरनाक स्थिति पैदा हो गयी है। विधानभवन के कर्मियों का पुलिस वैरीफिकेशन होना चाहिए। उन्होंने कहा कि जो भी विधानभवन के अन्दर आए उसकी गहन तलाशी होनी चाहिए। वह जब पहली बार विधान भवन आए तो उन्हें अचरज लगा क्योंकि विधानसभा के सदस्यों से ज्यादा अन्य लोग इधरउधर घूम रहे थे। किसी को सुरक्षा के साथ खिलवाड़ करने की छूट नहीं दी जा सकती। इससे पहले उत्तर प्रदेश विधानसभा में सुरक्षा के लिहाज से इतनी भारी चूक 12 जुलाई को सामने आई, जब सत्र के शुरू होने से पहले सुरक्षाकर्मियों ने सुबह लगभग नौ बजे चेकिंग के दौरान सफेद पाउडर कुर्सी के नीचे बरामद किया था।

इसके बाद इसे जांच के लिए फॉरेंसिक लैब भेजा गया। जांच रिपोर्ट में इसके विस्फोटक पीईटीएन होने की पुष्टि हुई है। संदिग्ध पाउडर के मिलते सुरक्षाकर्मियों ने इसकी सूचना अपने वरिष्ठ अधिकारियों को दी। इसके बाद इसकी सूचना मुख्यमंत्री को दी गई और पूरी सर्तकता बरती गयी। सदन खत्म होने के बाद जांच टीम और फॉरेंसिक एक्सपर्ट बुलाए गए। बाद में बेहद गोपनीय तरीके से विस्फोटक पाउडर को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया। इसके साथ ही इस मामले में थाना हजरतगंज में मुकदमा दर्ज कराने के साथ जांच शुरू कर दी गई है। वहीं विधानसभा में सुरक्षा में तैनात मार्शलों से वर्तमान, स्थायी पता, किराएदार सहित पारिवारिक सदस्यों की जानकारी मांगी गई है। सभी का वेरिफिकेशन किया जाएगा।

इसके अलावा हमारे देश में 07 सितम्बर 2011 को दिल्ली हाई कोर्ट के बाहर हुए धमाके में भी इस विस्फोटक का इस्तेमाल किया जा चुका है। तब इस आतंकी वारदात में 11 लोगों की मौत हुई थी और चार दर्जन से ज्यादा घायल हुए थे। विशेषज्ञों के मुताबिक पीईटीएन आतंकियों का पसन्दीदा विस्फोटक है। आतंकी संगठन बड़े हमलों के लिए इसका इस्तेमाल करते आएं हैं। ऐसे में विधानसभा में 150 ग्राम की मात्रा में मिले इसे विस्फोटक को लाने और पहुंचाने वाले कौन थे, इस साजिश का पदार्फाश होना बेहद जरूरी है। विशेषज्ञों के मुताबिक पीईटीएन डेटोनेटर के साथ ही काम करता है, इससे अलग से विस्फोट नहीं होता। इसलिए इसे महज सरकार के खिलाफ किसी राजनैतिक अस्त्र के तौर पर इस्तेमाल करना का मकसद तो नहीं था, या फिर मुमकिन हो यह किसी बड़ी और घिनौनी साजिश का रिहर्सल हो, जिसका वक्त रहते पता लगाना जरूरी है।

विपक्ष को मिला राजनीति का मौका

समाजवादी पार्टी के मुख्य प्रवक्ता राजेन्द्र चौधरी ने कहा कि यह बेहद खतरनाक स्थिति है, जिसमें सघन जांच की जरूरत है। जनता के बीच में तत्काल रिपोर्ट आनी चाहिए। विधान भवन का यह हाल है तो बाकी उत्तर प्रदेश की सुरक्षा का अंदाजा लगाया जा सकता है। सरकार को इस मामले में जनता को बताना चाहिए कि यह चूक हुई कैसे। इस सरकार में कानून व्यवस्था एकदम चौपट हो गई है। वहीं कांग्रेस नेता अखिलेश प्रताप सिंह ने कहा कि यह राज्य की सुरक्षा का सच सामने लाता है। बेहद सुरक्षित विधान भवन में विस्फोटक मिलना हैरानी की बात है। ये लोग जब विधानसभा को सुरक्षित नहीं कर सकते तो जनता को क्या करेंगे। बहुजन समाज पार्टी के असलम रायनी ने कहा कि 403 विधायकों की जिंदगी कोहिनूर हीरे की तरह है। सुरक्षा पर ध्यान दिया जाना बेहद जरूरी है।

भाजपा सरकार में राज्यमंत्री स्वतंत्र देव सिंह आरोपों का जवाब देते हुए कहते हैं कि कुछ ताकतें पहले से ही योगी सरकार को बदनाम करने के लिए सक्रिय हैं। मुख्यमंत्री स्वयं उनके निशाने पर हैं। जनता के लिए समर्पित नेता के रूप में पहचाने जाने वाले योगी आदित्यनाथ जिस तरह से मुख्यमंत्री बनने के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की तर्ज पर सबका साथ सबका विकास की बात कर रहे हैं, वह कई लोगों को हजम नहीं हो रहा है। सरकार ने बीते दिनों अपनी सौ दिन की उपलब्धियों को जनता के सामने रखा। इसके बाद बजट में जनता पर किसी भी तरह का अतिरिक्त बोझ नहीं डालते हुए चुनावी घोषणा पत्र को पूरा करने की प्रभावी व्यवस्था की। योगी जिस तरह सधे हुए कदमों से आगे बढ़ रहे हैं, वह 2019 के लोकसभा चुनाव के लिहाज से भी भाजपा की मजबूत नींव तैयार करता हुआ नजर रहा है। पीएम मोदी की लोकप्रियता जहां अन्तर्राष्ट्रीय मंच पर लगातार बढ़ रही है और वह वैश्विक स्तर पर सशक्त नेता के तौर पर जिस तरह उभरे हैं, वहीं बड़ी सच्चाई यह भी है कि उनके दोबारा प्रधानमंत्री बनने के लिए उत्तर प्रदेश में एक बार फिर पुराना प्रदर्शन दोहराना जरूरी है। ऐसे में इस खौफनाक साजिश के पीछे मोदी और योगी की साख पर बट्टा लगाने के मकसद से भी इनकार नहीं किया जा सकता।

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