क्षिणी कश्मीर के अनंतनाग जिले में 10 जुलाई की रात को आतंकवादियों द्वारा अमरनाथ यात्रियों पर किया गया हमला हिंदुओं की धार्मिक आस्था पर हमला है। पाक परस्त आतंकवादी संगठन लश्करतैयबा ने इस हमले को अंजाम दिया।  हमले में 6 महिलाओं सहित 7 यात्री मारे गए,  तीन पुलिसकर्मियों और 19 यात्रियों सहित 22 लोग घायल हो गए। यह बस गुजरात में हिम्मतनगर से आई थी। मृतकों की पहचान हासुवेन राटिला पाटिल, सुरेखा बेन, पाटिल लक्ष्मी बेन, उषा मोहन सोनकर, निर्मला बेन, रतन जीना भाई पाटिल, लक्ष्मी बेन के रूप में हुई। आतंकियों ने रात के 8.10 बजे बटेंगू में पुलिस वाहन पर हमला किया। जवानों की जवाबी कार्रवाई के बाद वे खन्नाबल की ओर भागे और रास्ते में पुलिस नाके पर भी गोलीबारी की ,जिसमें तीन पुलिसकर्मी घायल हो गए। वहां से भागते हुए आतंकवादियों ने बालटाल से जम्मू की ओर रही बस नंबर जीजे 09जेड 9976 को भी निशाना बनाया। जिससे सात यात्रियों की मौत हो गई और अन्य 19 घायल हो गए।

हमले के बाद  मोबाइल इंटरनेट सेवा को पूरे जम्मूकश्मीर में ऐहतियातन तौर पर प्रशासन ने बंद कर दिया ताकि कोई भी शरारती तत्व सोशल मीडिया का दुरूपयोग कर भड़काने का काम कर सके। इस आतंकी हमले के बावजूद भी अमरनाथ श्रद्धालुओं के हौंसले  पस्त नहीं हुए और अगले दिन सुबह उससे भी अधिक संख्या में श्रद्धालु बाबा के दर्शनों के लिए रवाना हुए। जिस उद्देश्य  से आतंकियों ने अमरनाथ यात्रियों पर हमला किया था उस पर भक्तों की आस्था सरकार का दृढ संकल्प भारी पड़ा।

मृतकों घायलों को मुआवजे की घोषणा

अमरनाथ तीर्थयात्रियों पर आतंकवादी हमले के मद्देनजर मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने मत्रिमंडल की आपात बैठक की, वहीं राज्यपाल एनएन वोहरा ने अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा की समीक्षा की। इससे पहले राज्यपाल जो कि  अमरनाथ श्राइन बोर्ड के अध्यक्ष भी हैं, ने सुरक्षा समीक्षा बैठक की, जिसमें राज्य के नागरिक प्रशासन, पुलिस, सेना, सीआरपीएफ और खुफिया अधिकारियों ने हिस्सा लिया। इसमें यात्रा से जुड़े सुरक्षा के सभी पहलुओं की समीक्षा की गई। इस दौरान यह निर्णय लिया गया कि तीर्थयात्रा निर्बाध रूप से जारी रहेगी। इस निर्णय से सभी शिविर निदेशकों और जम्मू में यात्री निवासों को अवगत करा दिया गया। यहीं से श्रद्धालु प्रत्येक सुबह घाटी के लिए रवाना होते हैं।

इसके अलावा राज्यपाल ने यात्रा नियंत्रण कक्ष में भी बैठक की, जिसमें अमरनाथजी श्राइन बोर्ड के सीईओ उमंग नरूला और अन्य अधिकारियों ने हिस्सा लिया। पहलगाम और नीलकंठ से हेलीकॉप्टर सेवा सामान्य रूप से चल रही है। साथ ही राज्यपाल ने सीईओ को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा है कि समीक्षा बैठक दिन में दो बार होइस बीच, जम्मूकश्मीर सरकार ने आतंकी हमले में मारे गए सात अमरनाथ यात्रियों के परिजनों के लिए छहछह लाख रुपए के मुआवजे की घोषणा की, जबकि श्री अमरनाथजी श्राइन बोर्ड (एसएएसबी) ने पीड़ितों के परिवारों को पांचपांच लाख रुपए देने का फैसला किया है।

इसके अलावा राज्यपाल ने यात्रा नियंत्रण कक्ष में भी बैठक की, जिसमें अमरनाथजी श्राइन बोर्ड के सीईओ उमंग नरूला और अन्य अधिकारियों ने हिस्सा लिया। पहलगाम और नीलकंठ से हेलीकॉप्टर सेवा सामान्य रूप से चल रही है। साथ ही राज्यपाल ने सीईओ को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा है कि समीक्षा बैठक दिन में दो बार होइस बीच, जम्मूकश्मीर सरकार ने आतंकी हमले में मारे गए सात अमरनाथ यात्रियों के परिजनों के लिए छहछह लाख रुपए के मुआवजे की घोषणा की, जबकि श्री अमरनाथजी श्राइन बोर्ड (एसएएसबी) ने पीड़ितों के परिवारों को पांचपांच लाख रुपए देने का फैसला किया है। राज्य सरकार ने गंभीर रूप से घायल यात्रियों को दो लाख रुपए देने जबकि मामूली रूप से  घायल यात्रियों को एक लाख रुपए देने को कहा है।  राज्य सरकार यात्री बस के चालक शेख सलीम गफ्फूर को अनुकरणीय साहस और सूझबूझ दिखाने के लिए तीन लाख रुपए का पुरस्कार देगी। राज्यपाल एनएन वोहरा ने एसएएसबी के अध्यक्ष के नाते घटना में मारे गए लोगों को पांच लाख रुपए की राहत, गंभीर रूप से घायल लोगों को डेढ़ लाख रुपए और मामूली रूप से घायल लोगों को 75,000 रुपए के मुआवजे की घोषणा की है।  वहीं, आतंकी हमले में मारे गए सात अमरनाथ श्रद्धालुओं के शव वायुसेना के विशेष विमान से गुजरात के सूरत पहुंचाए गए। इससे पूर्व राज्यपाल एनएन वोहरा, मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती, उपमुख्यमंत्री डॉ. निर्मल सिंह और अन्यों ने दिवंगत श्रद्धालुओं को श्रद्धाजंलि दी। मारे गए घायल हुए सभी श्रद्धालु गुजरात महाराष्ट्र के रहने वाले हैं।

नहीं खत्म होने देंगे कश्मीरियत: मुफ्ती

राज्य की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने कहा कि अमरनाथ यात्रियों पर हुए हमले से हर कोई दुखी है। यह एक निंदनीय घटना थी। इससे कश्मीर का सर शर्म से झुका है। कई वर्षों के बाद कश्मीर किसी मुद्दे पर एकजुट हुआ है, हर कश्मीरी को इस हमले से दुख हुआ है। महबूबा ने कहा कि हर साल लाखों श्रद्धालु अमरनाथ की यात्रा के लिए आते हैं, कश्मीरी लोग अपनेअपने तरीके से सभी की सेवा भी करते हैं। उन्होंने कहा कि कोई कितनी भी कोशिश कर ले, लेकिन कभी भी कश्मीरियत खत्म नहीं होगी।

लोगों से एकजुट रहने का आह्वान: फारूक

पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला ने  अमरनाथ तीर्थ यात्रियों पर हमले के बाद भारत के लोगों से एकजुट रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि ह्यमैं अपने देश में हर किसी के लिए अपील करता हूं, कृपया बड़ी संख्या में आओ ताकि आप उन तत्वों को हरा सको, जो हमारे राष्ट्र को नष्ट करना चाहते हैं। उन्होंने आगे कहा कि लोगों के लिए यह जरूरी है कि वे डरे नहीं हैं। अब्दुल्ला ने कहा, ‘आओ और उन्हें दिखाओ कि आप
डरे नहीं हैं, यह बहुत महत्वपूर्ण है।

धर्मनिरपेक्षता पर हमला : यासीन

पीपुल्स डेमोक्रेटिक फ्रंट (पीडीएफ) के अध्यक्ष और विधायक खानसाहिब हकीम मोहम्मद यासीन ने कहा कि यात्रियों पर हमला कश्मीर के मूल्यों और परंपराओं पर हमला है। हकीम ने कहा कि, ‘कश्मीर हमेशा खुली बाहों के साथ तीर्थयात्रियों का स्वागत करता आया है। तीर्थयात्रियों पर हमला हमारी धर्मनिरपेक्ष परंपरा पर हमला है। ऐसे शर्मनाक कृत्य की निंदा करने के लिए शब्दों की कमी पड़ जाती है।

हमला घिनौना और शर्मनाक: मीर

जम्मू एवं कश्मीर प्रदेश कांग्रेस कमेटी (जेकेपीसीसी) के अध्यक्ष जी.. मीर ने तीर्थयात्रियों पर आतंकवादियों द्वारा किए गए हमले की निंदा करते हुए कहा है कि यह हमला बहुत ही घिनौना और बेहद शर्मनाक है।

कश्मीर चैंबर

कश्मीर चैंबर आफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ने  अमरनाथ यात्रियों पर हुए आतंकी हमले की कड़ी निंदा की है। चैंबर ने इस हमले में मारे गए लोगों के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की है।

हमले के विरोध में जम्मू बंद

वहीं, अमरनाथ यात्रियों पर हुए आतंकी हमले के विरोध में जम्मू में बंद रहा जिससे सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ। बंद का आह्नान विश्व हिंदू परिषद ने किया था और नेकां, कांग्रेस, पैंथर्स पार्टी और चैंम्बर, बार एसोसिएशन तथा विभिन्न संगठनों ने इसका समर्थन किया था। बंद के चलते जम्मू, उधमपुर, कटडा, रियासी, सांबा, रामबन क्षेत्रों में विभिन्न संगठनों द्वारा रोष प्रकट किया गया तथा पाकिस्तान के पुतले जलाए गए।

आतंकी हमले के विरोध में पूर्ण बंद

अमरनाथ के श्रद्धालुओं पर हमले को लेकर वादी में पैदा हुआ जनाक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। 12 जुलाई को पहलगाम और उससे सटे इलाकों में लोगों ने आतंकी हमले के खिलाफ पूर्ण बंद रखते हुए हमलावरों को पकड़कर कठोर दंड देने की मांग की। वहीं, श्रीनगर में होटल मालिकों ने काला दिवस मनाया। हमले के खिलाफ गत 11 जुलाई को कश्मीर में विभिन्न सामाजिक, व्यापारिक और मजहबी संगठनों ने धरना दिया था। यह लोग हमले के खिलाफ नारेबाजी करते हुए दोषियों को जल्द पकड़ कठोर दंड देने की मांग कर रहे थे। जुलूस में शामिल मकबूल बट नामक एक प्रदर्शनकारी दुकानदार ने कहा कि यह हमला किसी यात्री पर नहीं हुआ है, बल्कि कश्मीरियों की भाईचारे की रिवायत पर हुआ है। फिरदौस अहमद नामक एक होटल मालिक ने कहा कि यात्रियों पर हमला कश्मीरियत पर हमला है। यात्री हमारे मेहमान होते हैं और मेहमानों की कोई जान ले, यह हम सहन नहीं करेंगे। जिस किसी ने यह हमला किया है, वह मुसलमान है और वह कश्मीरियों का हमदर्द। वह कश्मीरियों का दुश्मन है।

स्थिति का जायजा लेने पहुंचा केन्द्रीय दल

हमले के तुरंत बाद सेना प्रमुख जनरल विपन रावत स्थिति का जायजा लेने श्रीनगर पहुंच गए तो केन्द्रीय गृह राज्य मंत्री हंस राज अहीर और पीएमओ में राज्य मंत्री डॉ. जितेन्द्र सिंह, सीआरपीएफ के डीजीपी आर.के भटनागर और केन्द्रीय गृह मंत्रालय का दल भी श्रीनगर पहुंच गया जिसने स्थिति का जायजा लिया।

राजनाथ ने की सुरक्षा स्थिति की समीक्षा

केन्द्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने जम्मूकश्मीर में सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की और आतंकी हमले में सात अमरनाथ यात्रियों की मौत की पृष्ठभूमि में अमरनाथ यात्रा के दौरान सुरक्षा बढ़ाए जाने का आदेश दिया। गृह मंत्री ने घंटे भर लंबी चली बैठक में कश्मीर घाटी खासकर पवित्र गुफा की ओर जाने वाले दो रास्तों में जारी हालात का जायजा लिया। इस बैठक में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल, गृह मंत्रालय के उच्चाधिकारी, खुफिया एजेंसियों तथा केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के शीर्ष अधिकारी शामिल हुए। बैठक के तुरंत बाद, एनएसए ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बैठक में हुई चर्चा की जानकारी दी, साथ ही अमरनाथ यात्रियों की सुरक्षा के लिए उठाए गए कदमों के बारे में भी बताया। यात्रा मार्ग की सुरक्षा के लिए राज्य पुलिस बल के अलावा अर्धसैनिक बलों के 21,000 जवानों को तैनात किया गया है। पिछले वर्ष के मुकाबले इस वर्ष अर्धसैनिक बलों के 9,500 अधिक जवान तैनात किए गए हैं। हालांकि जिस बस पर हमला हुआ वह उन वाहनों के काफिले का हिस्सा नहीं था जो पर्याप्त सुरक्षा के बीच अमरनाथ यात्रा पर जाते हैं। हमले के वक्त बस श्रीनगर से जम्मू जा रही थी। पुलिस ने बताया कि बस चालक ने यात्रा के लिए तय नियमों का उल्लंघन किया है। नियमों के अनुसार शाम सात बजे के बाद हाईवे से सुरक्षा हटा ली जाती है इसलिए उस पर यात्रा के लिए किसी वाहन को जाने की इजाजत नहीं होती है।

सेना प्रमुख देंगे अजीत डोभाल को ब्यौरा

अमरनाथ यात्रियों पर हुए हमले के मद्देनजर सेना और सरकार दोनों हरकत में हैं और आतंकियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के संदेश दिए जा रहे हैं। घटना के बाद सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने कश्मीर का दौरा किया और यात्रियों की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार सेना और सरकार से बातचीत की। सेना प्रमुख बीते 11 जुलाई को श्रीनगर पहुचें थे और जहां उन्होंने पुलिस महानिदेशक एसपी वैद्य से मुलाकात कर अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा हालात का जायजा लिया। किसी भी हमले के मद्देनजर सेना और पुलिस बल को सतर्क रहने का निर्देश दिया गया है। जम्मू कश्मीर में सेना प्रमुख प्रदेश के राज्यपाल से भी मिले और जम्मू कश्मीर की सुरक्षा व्यवस्था पर मंथन किया। बैठकों में सेना प्रमुख सीआरपीएफ महानिदेशक से भी मिले। सीएम महबूबा मुफ्ती की ओर से भी हमले के दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई का भरोसा दिया जा रहा है।

पहले भी निशाने पर रही है यात्रा

कश्मीर से 1988-89 में कश्मीरी हिन्दुओं को भगाने के बाद पाकिस्तान की शह पर हमेशा आतंकियों के निशाने पर अमरनाथ यात्रा रही है। 1990 के बाद से आतंकवादियों ने श्री अमरनाथ यात्रियों को निशाना बनाना शुरू किया। वर्ष 1993 में दो हमलों में तीन लोग मारे गए। 1994 में एक हमले में दो यात्रियों की मौत हुई। 1995 में तीन हमले हुए लेकिन जानी नुकसान नही हुआ। 1996 में आतंकियों ने हमले किए परन्तु कोई क्षति नहीं हुई। वर्ष 2000 में आतंकियों ने पहलगाम के करीब आरू नामक स्थान पर हमले किए जिसमें 32 श्रद्धालुओं सहित 35 लोग मारे गए और 60 लोग घायल हो गए। 2001 में शेषनाग में आतंकी हमले में तीन पुलिस अधिकारियों सहित 12 श्रद्धालु मारे गए।

2002 में श्री अमरनाथ यात्रा पर दो आतंकी हमले हुए जिसमें 9 श्रद्धालु मारे गए 29 गंभीर रूप से घायल हुए। 2003 में आतंकियों अमरनाथ यात्रा में शामिल होन वालों की सीधे निशाना तो नहीं बनाया लेकिन यात्रा के दौरान ही कटड़ा में वैष्णोदेवी के आधार शिविर पर हमला कर 8 श्रद्धालुओं और सेना के एक ब्रिगेडियर को भी मार डाला।  वर्ष 2000 के बाद से अब तक बाबा अमरनाथ यात्रा पर तीन बड़े आतंकी हमले हो चुके हैं। इनमें पचास के करीब लोगों की मौत हुई थी। वर्ष 1995 में हरकत उल मुजाहिद्दीन ने चेतावनी जारी की थी कि कोई भी मुस्लिम अमरनाथ यात्रा में सहयोग दे। यात्रा पर बड़ा हमला एक अगस्त 2000 को पहलगाम आधार शिविर पर हुआ। आतंकियों ने हमला कर 32 लोगों की जान ले ली थी। हमले के चंद घंटों बाद आतंकियों ने कश्मीर में दो और हमले कर बाहरी राज्यों की 27 श्रमिकों जम्मू संभाग के डोडा के दूरदराज इलाके में 11 हिन्दुओं की हत्या कर दी थी।  वहीं 10 जुलाई रात आतंकियों ने एक बार फिर अपने इरादे जाहिर करते हुए अमरनाथ यात्रियों पर हमला किया। जिसमें 7 यात्रियों की मौत हो गई जबकि 19 लोग घायल हो गए। राज्य केन्द्र सरकार द्वारा सुरक्षा के तमाम दावों के बावजूद आतंकी हमला करने में कामयाब रहे।

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