लोकसभा चुनाव 2014 के परिणाम आने के बाद सांसद नहीं होने के बावजूद प्रकाश जावड़ेकर को कैबिनेट में शामिल किया गया और उन्हें पर्यावरण मंत्रालय के स्वतंत्र प्रभार समेत सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंप दी गयी। केन्द्रीय मंत्री स्मृति ईरानी के विवादों में आने के बाद जावड़ेकर को मानव संसाधन विकास मंत्रालय की जिम्मेदारी भी दी गयी। महाराष्ट्र के पुणे शहर में जन्में प्रकाश जावड़ेकर अपने शिक्षण के दौरान अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) से जुड़ गए थे। आपातकाल के विरोध में जावड़ेकर ने सत्याग्रह किया और इसी दौरान वे 16 महीने तक जेल में भी रहे। 1984 में पहली बार राष्ट्रीय राजनीति में आए और भारतीय जनता युवा मोर्चा के राष्ट्रीय सचिव बने। 1994 और 2002 में वे महाराष्ट्र भाजपा के प्रवक्ता भी रहे। प्रस्तुत है मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर से अवनीश राजपूत की बातचीत के प्रमुख अंश:-

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली केन्द्र सरकार को तीन साल से अधिक समय हो गया, लेकिन अभी तक राष्ट्रीय शिक्षा नीति का कुछ  पता नहीं चला।

» आने वाले नये साल पर देश को राष्ट्रीय शिक्षा नीति की सौगात मिलेगी, मंत्रालय इस दिशा में तेजी से काम कर रहा है। हमारा लक्ष्य सबको शिक्षा और अच्छी शिक्षा है। यह शिक्षा नीति शिक्षा क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन लाएगी। हम आने वाले बीस साल को ध्यान में रखकर इस विषय पर काम कर रहे हैं।

शिक्षा में मानव संसाधन विकास मंत्रालय का दखल बढ़ा है। पाठ्यक्रमों में परिवर्तन की बात भी सामने रही है।

» शिक्षा कोई राजनीतिक एजेंडा नहीं है। यह समाज के हर वर्ग से जुड़ा विषय है। मंत्रालय का दखल जहां आवश्यक है, वहीं होता है क्योंकि यह देश की आने वाली नयी पीढ़ी के भविष्य का सवाल है। जहां तक बात पाठ्यक्रमों में परिवर्तन की है, तो अभी तक ऐसा कुछ हुआ नहीं है। लगभग सभी जगह पिछली सरकार में तय पाठ्यक्रम के अनुसार ही पढ़ाई हो रही है।

बात अगर स्कूली शिक्षा की करें, तो इस सरकार में ऐसी कौन सी उपलब्धि मंत्रालय के हाथ आयी है जिसे आप प्रमुखता से गिना सकते हैं।

» उपलब्धियां गिनाने की चीज नहीं है, यह धरातल पर स्वत: दिखाई देती हैं। मोदी सरकार के नेतृत्व में चल रहा विकास कार्य दिख रहा है। फिर भी स्कूली शिक्षा को लेकर मंत्रालय की दो उपलब्धियों का जिक्र जरूर करना चाहूंगा। इस सरकार में 59 नये केन्द्रीय विद्यालय शुरू किये गये हैं और लगभग 50 नये विद्यालयों को मंजूरी दी गयी है। इसके साथ ही 62 नये जवाहर नवोदय विद्यालयों को भी मंजूरी दी गयी है, इसमें से 27 इस शैक्षणिक सत्र से आरंभ हो गए।

सुनने में यह भी रहा है कि आपने पिछली कांग्रेस नेतृत्व वाली केन्द्र सरकार द्वारा शुरू की कई नीतियों में बड़े पैमाने पर परिवर्तन का निर्णय लिया है।

» शिक्षा में सुधार हमारा मुख्य एजेंडा है और हम इसको केन्द्र में रखकर काम कर रहे हैं। कई ऐसे विषय सामने आये हैं जिनमें परिवर्तन आवश्यक नजर आता है। जैसे किसी को भी फेल नहीं करने की नीति बनी थी, इसको लेकर हमने थोड़ा परिवर्तन किया है। इस संदर्भ में राज्यों को अधिकृत किया गया है कि वह कक्षा पांचवीं और आठवीं में छात्रों को दो अवसर दें, बावजूद उसके अगर छात्र पास नहीं होते हैं, तो उसे फेल कर सकते हैं। इस संबंध में एक विधेयक का प्रारूप भी दिया गया है।

राज्य के स्कूलों की स्थिति में दिनप्रतिदिन गिरावट देखी जा रही है, ऐसे में किस आधार पर आप कह सकते हैं कि शिक्षा में सुधार आपकी सरकार के मुख्य एजेंडे में शामिल है।

» देखिये, ऐसी बात नहीं है। राज्य सरकार के स्कूलों की स्थिति में पहले की अपेक्षा बहुत सुधार हुआ है। कई राज्यों की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के कारण छात्रों का निजी क्षेत्र के स्कूलों से सरकारी स्कूलों की तरफ जाने का आकर्षण बढ़ा है। हम सरकारी स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए सभी संभव कोशिश कर रहे हैं। जल्द ही इसका परिणाम सभी को देखने को मिलेगा।

उच्च शिक्षा को लेकर मंत्रालय कितना गंभीर है। आपके मंत्रालय द्वारा उच्च शिक्षा के क्षेत्र में क्या प्रमुख उपलब्धि रही हैं।

» उच्च शिक्षा की व्यापकता हो, इसके लिए मंत्रालय ने कई नये निर्णय लिए हैं। इस सरकार में सात नये आईआईएम, छह नये आईआईटी, एक नया आईआईआईटी, दो नये आईआईएसईआर (तिरुपति और बेरहामपुर), एक नया एनआईटी के साथ ही मोतिहारी में नया केन्द्रीय विश्वविद्यालय स्थापित हुआ। इससे आप अनुमान लगा सकते हैं कि सरकार उच्च शिक्षा को लेकर कितना कुछ कर रही है।

देखा जाए तो पिछली सरकारों की तुलना में इस सरकार ने जम्मूकश्मीर राज्य के छात्रों के लिए कई विशेष योजनाएं प्रारंभ की हैं। इसके पीछे क्या उद्देश्य है?

» समाज की मुख्यधारा से जुड़कर राष्ट्रहित में सब लोग काम करें, इसके लिए सबको शिक्षा और सबको रोजगार मिले यह आवश्यक है। इसलिए हमने यहां विशेष छात्रवृत्ति योजना के तहत 24,200 छात्रों को छात्रवृत्ति के साथ ही 2.25 लाख रुपये प्रति वर्ष इंजीनियरिंग पाठ्यक्रम के प्रत्येक छात्र को दिये हैं। इतना ही नहीं, वहां मेडिकल छात्रों को भी प्रतिवर्ष 04 लाख रुपये की सहायता दी जा रही है, जबकि सामान्य पाठ्यक्रम के छात्रों को प्रति वर्ष 1.3 लाख रुपये की सहायता राशि प्रदान की गयी है।

एक आखिरी सवाल, पिछले दिनों आपके कार्यों की राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने भी सराहना की। क्या कहना चाहेंगे आप।

»  मैं उनके प्रति अपना आभार प्रकट करना चाहूंगा कि उन्होंने मेरे और मंत्रालय के कार्यों की खुलकर तारीफ की।

कोई जवाब दें

Please enter your comment!
Please enter your name here