राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सर संघचालक मोहन भागवत ने गीता के सिद्धांत को जनमानस तक पहुंचाने का आह्वान किया। युवा पीढ़ी को नवराष्ट्र के निर्माण में आ रही चुनौतियों का समाधान गीता ज्ञान में निहित है। गीता हमें कठिन से कठिन परिस्थितियों में भागने को नहीं कहती, जिस प्रकार महाभारत के युद्ध में अपने कर्तव्य का निर्वहन करने के लिए भगवान श्री कृष्ण वृन्दावन छोड़कर मोहग्रस्त अर्जुन को धर्म व अर्धम की लड़ाई के कर्तव्यबोध करवाने के लिए कुरुक्षेत्र आ गए थे, फिर कभी वापिस वृंदावन लौटकर नहीं गए। आरएसएस सर संघचालक अंतरराष्ट्रीय गीता जयंती महोत्सव में सांस्कृतिक संध्या कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि धर्मनगरी कुरुक्षेत्र में लोगों को संबोधित कर रहे थे।

देश के प्रत्येक व्यक्ति को गीता के संदेश को जीवन में उतारकर कर समाज हित में कार्य करना होगा। दुनिया में सभी समस्याओं का समाधान गीता में समाहित है। गीता में कर्तव्यनिष्ठता से लेकर उत्कृष्ट जीवन जीने की प्रेरणा देती है। कुरुक्षेत्र की पवित्र भूमि पर भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को गीता संदेश देते हुए बताया कि धर्मयुद्ध की लड़ाई लड़नी होगी। भाग्य में जो लिखा है, वही मिलेगा, इसलिए फल की चिंता मत करो केवल कर्म करो। कर्तव्य को पहचान कर कर्म करना चाहिए। अपनों का मोह त्यागकर धर्म रक्षा के लिए कर्तव्य निष्ठा जरूरी है। समाज में आज भी विकृतियां व्याप्त हैं, जो प्राचीन समय से चली आ रही हैं। मनुष्य की पहचान जाति से नहीं बल्कि गुणों के साथ होती है। इसलिए व्यक्ति निर्माण की आवश्यकता है, जो केवल गीता के संदेश को जीवन में उतार कर ही हो सकता है। 

आरएसएस सर संघचालक ने कहा कि आज लंबे समय बाद भारत में समय अनुकूल है और देश विश्व में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि जैसा करोगो-वैसा भोगेगे, अच्छे काम करोगे तो अच्छा परिणाम मिलेगा और बुरे कर्म करोगे तो बुरा परिणाम मिलेगा। किसी को निराश व हारकर आत्महत्या की ओर नहीं बढ़ना चाहिए, बल्कि कठिन से कठिन परिस्थितियों का मुकाबला करना चाहिए। वीरों के कर्तव्य अधर्म के विरुद्ध व असत्य के विरुद्ध लड़ना है। भगवान श्रीकृष्ण ने सबके सहयोग से गोवर्धन पर्वत को अपनी उंगली पर उठा लिया था।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने कहा कि गीता जीवन का सार है। न्याय व अन्याय के बीच न्याय की ही जीत होती है। आज भी भ्रष्टाचार व सामाजिक कुरीतियां समाज में व्याप्त हैं, जिनकी लड़ाई मिलकर लड़नी होगी। युवाओं को गीता का संदेश जीवन में उतारकर भलाई का कार्य करना होगा। हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने कहा कि सबसे कठिन काम व्यक्तित्व निर्माण है। जीवन की हर चुनौतियों का समाधान गीता में समाहित है। भारत की युवा पीढ़ी का निर्माण करने के लिए गीता का संदेश पहुंचाना जरूरी है।

गीता की जन्मस्थली ज्योतिसर में भगवान श्रीकृष्ण का विराट स्वरूप स्थापित किया जाएगा और इस पवित्र स्थल को श्रीकृष्णा सर्किट के तहत विकसित किया जाएगा। इस योजना के अंतर्गत दोनों योजनाओं की मोहन भागवत ने आधारशिला रखी गई और मंत्रोच्चारण के बीच भूमि पूजन किया गया। श्रीकृष्णा सर्किट परियोजना के तहत प्राचीन वट वृक्ष परिक्रमा पथ विस्तारीकरण का कार्य और ज्योतिसर में 10 करोड़ की लागत से स्थापित होने वाले भगवान श्रीकृष्ण के विराट स्वरूप प्रतिमा योजना का शिलान्यास किया।

 

गीता ने मातृशक्ति को स्थापित किया : रामनाथ कोविंद

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने गीता की पवित्र धरा कुरुक्षेत्र से गीता के कर्मयोग को सार्थक करने का संदेश दिया। उन्होंने हरियाणा की बेटियों की सफलता को नारी सशक्तिकरण से जोड़ते हुए कहा कि बेटियां कुरीतियों के द्वंद्व से बाहर निकलकर राजनीति, खेल, सौंदर्य व विज्ञान के क्षेत्र में विश्व स्तर पर ख्याति प्राप्त कर प्रदेश की छवि को सुधार रही हैं। जिस प्रदेश की नारी घूंघट उठाने में ही झिझक महसूस करती थी, वहां की बेटियों ने अपने इस अंतर्द्वंद्व को समाप्त करते हुए अंतरिक्ष तक की उड़ान भर ली। हरियाणा की बेटियों ने संस्कृति के जीवन मूल्यों को दुनिया के कोने-कोने तक पहुंचाया है। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद अंतरराष्ट्रीय गीता जयंती महोत्सव का शुभारंभ करने के बाद कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के श्रीमद्भागवत गीता सदन में आयोजित डिजिटल युग में ‘स्व-अन्वेषण, श्रीमद् भगवद्गीता दर्शन के परिप्रेक्ष’ विषय पर आयोजित संगोष्ठी में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे। 

राष्ट्रपति ने कहा कि महर्षि वेद व्यास ने गीता को गीता का ही नाम क्यों दिया? शायद उन्होंने गीता को स्त्रीलिंग नाम मातृशक्ति की गरिमा की मान्यता के लिए दिया था। गीता जीवन जीने का का सार है। जीवन के हर पग पर गीता से शिक्षा प्राप्त कर उस समस्या का हल प्राप्त हो सकता है। मन में हर समय द्वंद्व चलता है जैसे न्याय का अन्याय से, सामाजिक का असमाजिक से और अच्छाई का बुराई से। ऐसे में इस द्वंद्व से जीत पाने का रास्ता केवल और केवल गीता के अंदर है। जब कोई व्यक्ति भौतिक रूप से समृद्ध नजर आता है, तो हर व्यक्ति सोचता है कि वह बहुत खुश होगा, लेकिन असल में वही सबसे दुखी निकलता है। आज हम जिस जगह पर गीता संगोष्ठी का शुभारंभ कर रहे हैं, उस हाल का नाम भी श्रीमद्भगवद गीता सदन है। यही इसकी सार्थकता सिद्ध करती है।

नारी शक्ति की इसी महिमा को कन्या भ्रूण के लिए कुख्यात रहे हरियाणा में बेटियां सिद्ध कर रही हैं। हरियाणा की माटी में ही जन्मी सुषमा स्वराज, कल्पना चावला, संतोष यादव, साक्षी मलिक, गीता फोगाट, मानुषी छिल्लर ने नारी शक्ति को पूरी दुनिया के सामने प्रस्तुत किया है। इन बेटियों ने गीता के कर्मयोग को अपने जीवन में उतारा और फल की चिंता न करते हुए अपने लक्ष्य की ओर अग्रसर होती रहीं। राष्ट्रपति ने हरियाणा में सुधरते लिंगानुपात पर मनोहर सरकार की पीठ भी थपथपाई। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा है कि गीता सम्पूर्ण जीवन को जीने की संहिता है। श्रीमद् भगवद् गीता जीवन के द्वंद्वों से बाहर निकालती है। 21वीं सदी के डिजिटल युग में तनाव, दुविधा, अप्रसन्नता से मुक्ति का रास्ता गीता हमें दिखाती है। इसको अपने व्यवहार में शामिल कर ही स्थिर, सफल व दुविधा रहित जीवन की दिशा में हम आगे बढ़ सकते हैं। 

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