राज्य में दो दिवसीय विश्व विनिवेश सम्मेलन का आयोजन हुआ। राज्य में इस तरह का पहला सम्मेलन था, जिसने न केवल राज्य के लिए एक लाख करोड़ रुपये का विनिवेश आमंत्रित
किया, बल्कि भविष्य में पूर्वोत्तर के लिए विकास के रास्ते भी खोल दिए।



सम की पहचान देश ही नहीं वैश्विक पटल पर जनजातियों का प्रदेश, आतंकवाद, बम, गोला-बारूद न जाने और किन-किन रूपों में होती रही है। क्या वाकई में यहां पर यही सब कुछ है? वैसे पश्चिमी देश भी भारत के बारे में कुछ इसी तरह की सोच रखता था। लेकिन अब भारत के बारे में उसने अपनी सोच बदली है। इस तरह की सोच में बदलाव अब असम के बारे में भी देखा जा रहा है। देश के अन्य क्षेत्रों की तरह यहां पर भी समृद्धि संस्कृति, विविधताओं से भरा इतिहास, खान-पान, वेश-भूषा और प्राकृतिक संसाधन मौजूद है। लेकिन इसको वैश्विक पटल पर सही तरीके से पेश नहीं किया गया। इसमें सबसे बड़ा दोष पूर्व की राज्य सरकारों का रहा है।

कार्यक्रम का उद्घाटन पीएम मोदी ने किया। पड़ोसी देश भूटान के प्रधानमंत्री शेरिंग तोगबे तीन दिनों तक एक बड़े डेलीगेशन के साथ गुवाहाटी में मौजूद रहे। वहीं आसियान के कई देशों के मंत्रियों
ने भी हिस्सा लिया। विश्व विनिवेश सम्मेलन के दौरान अलग-अलग उद्योगों की
स्थापना के संबंध में कुल 200 करार किए गए।

राज्य सरकारें अपनी क्षमताओं को लोगों को बताने में हमेशा से कतराती रही हैं। पहली बार असम में मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल की भाजपानीत गठबंधन सरकार ने सत्ता संभाला। इन बातों को समझा और अपनी क्षमताओं से विश्व को अवगत कराने के लिए विश्व विनिवेश सम्मेलन ‘एडवांटेज असम-2018’ का राजधानी गुवाहाटी में दो दिवसीय कार्यक्रमों के तहत 3 और 4 फरवरी को आयोजन किया। कार्यक्रम का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया। जबकि पड़ोसी देश भूटान के प्रधानमंत्री शेरिंग तोगबे तीन दिनों तक एक बड़े डेलीगेशन के साथ गुवाहाटी में मौजूद रहे। वहीं आसियान के कई देशों के मंत्रियों ने भी हिस्सा लिया। असम सरकार ने अपनी ओर से निवेशकों को आकर्षित करने के लिए सभी तरह के उपाय किए थे। जिसके चलते देश व विदेश के बड़े-बड़े उद्योगपति आकर्षित हुए बिना नहीं रहे। दो दिवसीय सम्मेलन के दौरान लगभग एक लाख करोड़ रुपये के विनिवेश के करार पर हस्ताक्षर हुए। सम्मेलन ने यह साबित कर दिया कि असम औद्योगिक निवेश के लिए सबसे उपयुक्त स्थान है।

उद्योगों के अनुकूल माहौल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उद्योग व्यापार के क्षेत्र में विनिवेश करने के लिए असम को सबसे उपयुक्त स्थान बताया। उन्होंने यहां के प्राकृतिक साधनों के साथ ही संसाधनों की प्रचुरता का उल्लेख किया। साथ ही राज्य सरकार द्वारा उद्योग व्यापार के अनुकूल माहौल तैयार होने का जिक्र किया। मोदी ने बताया कि एनडीए सरकार असम समेत पूर्वोत्तर के विकास के लिए तेजी से काम कर रही है। जिसके चलते यहां के लोगों की जीवन दशा में काफी सुधार हो रहा है। असम व पूर्वोत्तर में केंद्र सरकार द्वारा पिछले तीन वर्षों के दौरान किए गए कार्यों का लेखा-जोखा भी उन्होंने पेश किया। केंद्र सरकार द्वारा नेशनल बंबू मिशन के पुनर्गठन को पूर्वोत्तर के लिए वरदान बताया। वहीं देश के सबसे लंबे सड़क पुल धोला-सदिया के लिए मोदी ने अपनी सरकार की पीठ थपथपाई।

केंद्रीय उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री सुरेश प्रभाकर प्रभु ने विश्व विनिवेश सम्मेलन में कहा कि देश का विकास करने के लिए सभी राज्यों का विकास होना होगा। राज्यों का विकास करने के लिए उसके जिलों का विकास करना होगा। यह बड़े सौभाग्य की बात है कि नरेंद्र मोदी ने गुजरात का मुख्यमंत्री रहते हुए एडवांटेज गुजरात शुरू किया था और प्रधानमंत्री रहते हुए एडवांटेज असम का उन्होंने उद्घाटन किया। असम भी अब निवेश के जरिए विकास के रास्ते पर तेजी से आगे बढ़ेगा।

आगे बढ़ने का हौसला

मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल ने सम्मेलन के दौरान बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें ‘ए फॉर असम’ का मतलब समझा कर विकास की नई ऊंचाइयों को छूने के लिए प्रेरित किया। मुख्यमंत्री ने सम्मेलन के आयोजन का उद्देश्य बताते हुए कहा कि इसके जरिए असम में व्याप्त असीम विनिवेश की संभावनाओं की ओर पूरी दुनिया का ध्यान आकृष्ट कराना था। उन्होंने बताया कि 50 वर्ष पहले तक असम चाय, तेल, वन एवं प्राकृतिक संपदाओं के कारण देश का एक विकसित राज्य था। ऐसे में इसे फिर से विकास की कतार में सबसे आगे खड़ा करना सरकार की प्राथमिकता है। हालांकि इस दौरान उन्होंने पूर्व की सरकारों पर इस ओर काम नहीं करने का भी अपरोक्ष रूप से आरोप मढ़ दिया। असम में विनिवेश की असीमित संभावनाओं को भी उन्होंने रेखांकित किया। वहीं केंद्र सरकार की एक्ट ईस्ट पॉलिसी के चलते दक्षिण पूर्व एशियाई देशों की पूरी आबादी को असम की ओर अपनी ओर आकर्षित करने में सफल होने की बात दोहराई। पूर्वोत्तर में आवागमन की सुविधा बढ़े इसके लिए सभी आसियान देशों के साथ गुवाहाटी से सीधी विमान सेवा शुरू करने की योजना पर सरकार द्वारा कार्य शुरू होने की बात दोहराई।

मुख्यमंत्री ने गुवाहाटी में ट्विन टावर ट्रेड सेंटर बनाए जाने, ब्रम्हपुत्र नद और इसकी 100 से अधिक सहायक नदियां के जरिए विशाल जल परिवहन का नेटवर्क तैयार करने तथा बांग्लादेश के चटगांव तक जहाज सेवा शुरू करने की भी योजना पर कार्य तेजी से चलने का उल्लेख करते हुए कहा कि असम में पर्यटन, कृषि, बागवानी, फूड प्रोसेसिंग, बंबू प्रोसेसिंग, डेरी, मुर्गी पालन, चाय, जल परिवहन, हवाई परिवहन, इनफार्मेशन टेक्नोलॉजी, स्किल डेवलपमेंट, स्वास्थ्य, शिक्षा आदि के क्षेत्र में तेजी से विकास होगा। जो असम समेत पूरे पूर्वोत्तर की तस्वीर को बदलने में सक्षम होगा।

भारत-भूटान की मित्रता

भूटान के प्रधानमंत्री शेरिंग तोगबे का मानना है कि भारत का प्रेम भूटान के हृदय को छूता है। भारत ने हमेशा ही भूटान के साथ बड़े भाई का नाता निभाया है। भारत की असम से होकर 266 किलोमीटर सीमा भूटान के साथ मिलती है, बावजूद कभी कोई परेशानी सामने नहीं आई। जबकि दोनों देशों का खानपान, रहन-सहन, सभ्यता-संस्कृति सब कुछ आपस में काफी मिलती है। इस भौगोलिक और प्राकृतिक संबंधों के जरिए भूटान भी अपने व्यवसायिक संबंधों को एडवांटेज असम के जरिए एडवांटेज भूटान के रूप में दिखाने में सफल हुआ है।

भूटानी प्रधानमंत्री ने कहा कि असम के विकास का आनुपातिक लाभ पूर्वोत्तर के सभी राज्यों के साथ ही भूटान को भी मिलेगा। भूटान-भारत के साथ अपने संबंधों की स्वर्ण जयंती समारोह मना रहा है। भारत के साथ संबंधों के लाभ की चर्चा करते हुए भूटानी राष्ट्राध्यक्ष ने कहा कि एक समय भूटान की सिमटी हुई अर्थव्यवस्था थी। साधन, संसाधनों की कमी थी। पूरे देश में सिर्फ दो सड़के थीं, लेकिन भूटान के राजाओं की मेहनत और भारत जैसे मित्रों के सहयोग से वर्तमान में भूटान जैसा छोटा देश भी विश्व बिरादरी में एक सम्मानित देश के रूप में गिना जाता है।

कांग्रेस ने गिनाई कमियां

देश में अपने तरह का पहली बार गुवाहाटी में आयोजित एडवांटेज असम को लेकर विपक्ष बंटा-बंटा दिखा। कांग्रेस पार्टी ने इस आयोजन को पैसे की बर्बादी, ट्वीन टावर का औचित्य नहीं होने की बात को लेकर सोनोवाल सरकार की जमकर खिंचाई की। जबकि एआईयूडीएफ ने इसके लिए भाजपानीत गठबंधन सरकार की पीठ थपथपाई। एआईयूडीएफ के अध्यक्ष व सांसद मौलाना बदरूदीन अजमल ने इसके राज्य के विकास के लिए बड़ा कदम बताते हुए कहा कि इस तरह के आयोजन काफी पहले होने चाहिए थे, जो नहीं हुआ। लेकिन सोनोवाल सरकार ने राज्य में उद्योग व व्यवसाय के लिए अनुकूल माहौल तैयार कर बड़ा काम किया है। इसके लिए सरकार की प्रशंसा की जानी चाहिए।

शीर्ष उद्योगपतियों ने किया संबोधित

विश्व विनिवेश सम्मेलन को फिक्की के चेयरमैन राजेश शाह, एमसीएलईओडी रसेल इंडिया लिमिटेड के प्रबंध निदेशक आदित्य खेतान, सेंचुरी प्लाई बोर्ड के प्रबंध निदेशक सजन भजनका, स्पाइसजेट के अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक अजय सिंह, डाबर ग्रुप के अध्यक्ष आनंद बर्मन, पतंजलि के मुख्य कार्यकारी अधिकारी आचार्य बालकृष्ण, सन फार्मास्युटिकल्स इंडस्ट्रीज लिमिटेड के प्रबंध निदेशक दिलीप सांघवी, टाटा संस के अध्यक्ष एन चंद्रशेखरन, रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी, केंद्रीय उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री सुरेश प्रभु ने संबोधित किया। उद्योगपतियों ने राज्य में व्यापार व उद्योग के अनुकूल माहौल तैयार होने की बात करते हुए राज्य में बड़े पैमाने पर निवेश करने की हामी भरी। उद्योगपतियों के इस आश्वासन को मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल की बड़ी कामयाबी बताई जा रही है। सम्मेलन में मणिपुर के मुख्यमंत्री बिरेन सिंह, विख्यात फिल्म निर्माता-निर्देशक सुभाष घई, पेप्सी कंपनी के कंट्री हेड रवि जयपुरिया सहित 4,600 प्रतिनिधियों ने हिस्सा लेने के लिए आॅनलाइन पंजीयन करवाया था।

एक लाख करोड़ के विनिवेश

विश्व विनिवेश सम्मेलन के दौरान अलग-अलग उद्योगों की स्थापना के संबंध में कुल 200 करार किए गए। इसके तहत कुल एक लाख करोड़ रुपए का विनिवेश असम में होना निश्चित हुआ है। इस सम्मेलन का यह सार्थक पहलू है। हालांकि विपक्ष इसको लेकर सरकार पर तंज कस रहा है, लेकिन यह भी सत्य है कि राज्य में बड़े पैमाने पर विनिवेश हुआ है। इसे राज्य की आर्थिक स्थिति में बड़ा बदलाव आने वाला है। उद्योग मंत्री पटवारी ने बताया कि 2,250 करोड़ रुपये की लागत से सरकार जल परिवहन को शुरू करेगी। 250 करोड़ रुपये विभिन्न स्थानों पर ब्रम्हपुत्र और बराक नदियों की खुदाई के लिए रखा गया है। जिसमें खुदाई बांग्लादेश के कुछ हिस्से में भी की जाएगी। जल परिवहन की योजना पर खर्च के लिए विश्व बैंक ने 1000 करोड़ रुपये की मंजूरी दी है। जबकि भारत सरकार के जहाजरानी मंत्रालय द्वारा 1250 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है। इसके तहत 6 बंदरगाहों को अत्याधुनिक बनाया जाएगा। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल बीते 2 माह से अधिक समय से इस विनिवेश सम्मेलन के लिए देश और विदेश में रोड शो कर विदेशी निवेशकों को आमंत्रित किया।

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