रवरी का महीना पूरी दुनिया के शेयर बाजारों के लिए दु:स्वप्न की तरह रहा। ब्लैक ट्यूजडे (6 फरवरी) और ब्लैक फ्राइडे (9 फरवरी) को अमेरिकी शेयर बाजार में बिकवाली ने दुनिया भर के बाजारों को पस्त कर दिया। नास्डैक, निक्की, हैंगशेंग, कोस्पी, शंघाई कंपोजिट, ताइवान वेटेड जैसे तमाम सूचकांक ध्वस्त हो गये। यही हाल भारत में सेंसेक्स और निफ्टी का भी रहा। देखते ही देखते दुनिया भर में निवेशकों के लगभग 38 लाख करोड़ रुपये स्वाहा हो गये। सिर्फ भारत में ही बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का बाजार पूंजीकरण आठ लाख करोड़ रुपये घट गया। बाजार की चाल से पूरी दुनिया के निवेशकों में हाहाकार मच गया।

सामान्य तौर पर शेयर बाजार जिप-जैप मेथड पर चलता है। मार्केट सेंटिमेंट्स के बेहतर होने पर यह छलांग लगाता नजर आता है, वहीं मार्केट सेंटिमेंट्स के बिगड़ने पर बाजार गोते लगाने लगता है। लंबे समय से भारतीय शेयर बाजार अच्छे सेंटिमेंट्स के कारण लगातार चढ़कर रिकॉर्ड स्तर पर कारोबार कर रहा था। लेकिन अंतरराष्ट्रीय माहौल ने इतना प्रतिकूल असर डाला कि 36 हजार के स्तर पर पहुंचने के बाद ये फिसलकर शुक्रवार को 34 हजार के स्तर पर गिर गया। फरवरी में ही भारत में आम बजट पेश किया गया है। इसलिए इस मुद्दे को लेकर राजनीति भी शुरू हो गई कि शेयर बाजार का गिरना सरकार की आर्थिक नीतियों की चूकों को दर्शाने वाला है।

बढ़ा बिकवाली का दबाव

मोतीलाल ओसवाल इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज के रिसर्च हेड गौतम दुग्गड़ का मानना है कि भारतीय बाजार में आयी इस गिरावट  की एक वजह बजटीय प्रावधान जरूर हो सकते हैं, लेकिन इसका मुख्य कारण अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बिकवाली का दबाव ही है। एशियाई और यूरोपीय शेयर बाजार का पूरा कारोबार अमेरिकी बाजार की चाल, अंतरराष्ट्रीय दबाव और सेंटिमेंट्स के आधार पर चलता है। अगर वॉल स्ट्रीट स्थित न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज में उछाल आता है तो भारत समेत पूरे एशियाई और यूरोपीय बाजार में तेजड़िये हावी होते नजर आते हैं, लेकिन वहीं अगर वॉल स्ट्रीट से नकारात्मक खबरें आती हैं तो हर जगह मंदड़िये सूचकांक को गोता लगा देते हैं।

जनवरी के महीने से ही अमेरिकी शेयर बाजार की स्थिति डांवाडोल बनी हुई है। तीन दिन के अमेरिकी शटडाउन ने निवेशकों को बुरी तरह से प्रभावित किया है।  इसके बाद शुक्रवार को फिर से हुए शटडाउन ने न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज में बदहवासी के हालात बना दिये। साथ ही अमेरिका में ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंका ने बाजार को और दवाब में ला दिया। इसके परिणामस्वरूप सूचकांक एस एंड पी-500 और डाऊ जोंस दोनों ने जबरदस्त गोता लगाया। अनुमान लगाया जा सकता है कि जब 29740 बिलियन डॉलर बाजार पूंजीकरण वाले अमेरिकी शेयर बाजार का ये हाल है तो महज 2230 बिलियन डॉलर बाजार पूंजीकरण वाले भारतीय शेयर बाजार का क्या हाल होगा। दुग्गड़ का मानना है कि अगर अमेरिका में जल्द ही ट्रंप प्रशासन ने शटडाउन की वजह से उत्पन्न हालात को नहीं निपटाया, तो वहां का बाजार तो डूबेगा ही, भारतीय बाजार भी बुरी तरह से प्रभावित होगा।

बजट भी जिम्मेदार

इंडिया बुल्स सिक्योरिटीज लिमिटेड के चीफ एनालिस्ट श्वेतांक शेखर का कहना है कि शेयर बाजार की आड़ी-तिरछी चाल के लिए बजटीय प्रावधानों के साथ ही डालर के मुकाबले रुपये की कीमत में आई गिरावट और रेटिंग एजेंसी फिच का वो बयान भी काफी हद तक जिम्मेदार है, जिसमें भारत सरकार पर कर्ज का भारी दबाव होने की बात कही गयी थी। इन वजहों के कारण ही लॉन्ग टर्म के कई निवेशकों ने शेयर बाजार से हाथ समेटना शुरू कर दिया, तभी अमेरिकी शेयर बाजार के क्रैश ने भारत में भी सेंसेक्स और निफ्टी को गोता लगाने के लिए मजबूर कर दिया। जो निवेशक अपना पैसा निकालने की बात सोच ही रहे थे, वे हड़बड़ी में अपना पैसा निकालने में जुट गये, जिससे बाजार का सूचकांक लगातार गिरता चला गया।

पहले ब्लैक ट्यूजडे फिर ब्लैक फ्राइडे ने दुनिया भर के शेयर बाजारों को ध्वस्त करके रख दिया है। निवेशकों के लाखों करोड़ रुपये इन दो दिनों में ही छू-मंतर हो गये। अंतरराष्ट्रीय
बिकवाली के दबाव में सिर्फ बीएसई में ही निवेशकों को आठ लाख करोड़
रुपये का चूना लग गया।

श्वेतांक का कहना है कि ब्लैक ट्यूजडे यानी 6 फरवरी के पहले तक अमेरिकी शेयर बाजार मौद्रिक उपलब्धता की वजह से लगातार चढ़ान पर था। लेकिन ट्रंप प्रशासन ने अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर दूरगामी कदम उठाने का संकेत देकर निवेशकों का सतर्क कर दिया है। माना जा रहा है कि वहां ब्याज दरें बढ़ायी जा सकती हैं, जिससे कर्ज की लागत बढ़ेगी। अमेरिकी शटडाउन के साथ इस चिंता ने भी अमेरिकी बाजार में भूचाल लाने में अहम भूमिका निभायी और फिर वहां के झटके ने भारत समेत पूरी दुनिया के शेयर बाजार को झकझोर कर रख दिया।

रिकवरी की है क्षमता

शेयर एनालिस्ट और निवेश पत्रिका शेयर मंथन के संपादक राजीव रंजन झा भी मानते हैं कि भारतीय बाजार पर अमेरिकी शटडाउन और बाजार के टूटने का जबरदस्त असर पड़ा है। लेकिन साथ ही उनका कहना है कि भारतीय शेयर बाजार में आम बजट पेश होने के बाद से ही निगेटिव सेंटिमेंट बना हुआ है। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बजट में लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स का दोबारा प्रावधान कर निवेशकों को काफी निराश किया है।

राजीव रंजन का मानना है कि भारतीय शेयर बाजार अभी संक्रमण के दौर से गुजर रहा है। तीन साल से ज्यादा समय से बाजार में तेजड़ियों का प्रभाव बना रहा है और इस वजह से छोटे निवेशकों का रुझान काफी तेजी से बढ़ा है। अभी शेयर बाजार में अधिकतम पांच लाख रुपये तक निवेश करने वाले निवेशकों की संख्या लगभग 55 फीसदी है। ये लोग बाजार पूंजीकरण या फिर बाजार की चाल पर भले ही ज्यादा असर न डालें, लेकिन इनमें हताशा का माहौल बनने पर पूरे बाजार के सेंटिमेंट्स पर असर पड़ता है। इसके साथ ही बाजार की चाल में थोड़ी भी नकारात्मकता आने पर यही वर्ग सबसे ज्यादा नुकसान का भी सामना करता है। इसलिए छोटे निवेशकों को बाजार के मौजूदा चाल में सबसे ज्यादा सतर्क रहना चाहिए।

उनका मानना है कि भारतीय निवेशकों को शेयर बाजार में आई गिरावट से घबराने की जगह धैर्य से काम करना चाहिए, क्योंकि यहां के मूल तत्व काफी मजबूत हैं। ब्लैक ट्यूजडे को 1275 अंकों की टूट के बाद जिस तरह से सेंसेक्स ने बाजार बंद होने के पहले 714 अंकों का सुधार किया, उससे ही इस बात का संकेत मिलता है कि भारतीय बाजार अंतरराष्ट्रीय दबावों की वजह से एक बार गिर जरूर सकता है, लेकिन उसमें रिकवरी करने की पूरी क्षमता है।

सतर्क रहें छोटे निवेशक

भारतीय शेयर बाजार में मची इस हलचल को मार्केट एनालिस्ट आशुतोष श्याम पूरी तरह से सामान्य बताते हैं। उनका कहना है कि बाजार गिरने पर लोग प्राय: कहते हैं कि एक झटके में निवेशकों के लाखों करोड़ रुपये स्वाहा हो गये। लेकिन सच यही है कि बाजार के लुढ़कने से घबड़ाकर जो लोग आनन फानन में बिकवाली शुरू करते हैं, उनको ही नुकसान का सामना करना पड़ता है। ऐसे में छोटे निवेशकों को बाजार गिरने की चिंता छोड़कर स्थिति सामान्य होने का इंतजार करना चाहिए। बाजार के उठा-पटक के दौर में बाजार में घुसना या फिर बाजार से निकलना दोनों ही हानिकारक हो सकता है। इसलिए निवेशकों को कुछ दिन के लिए खरीद-बिक्री से दूर होकर बाजार की चाल पर नजर रखना चाहिए, ताकि सही मौका देखकर अपने शेयर की बिकवाली या लिवाली की जा सके और फायदा भी उठाया जा सके।

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विनय के पाठक
रांची विश्वविद्यालय से स्नातक। वर्ष 1988 में रांची में ही फील्ड रिपोर्टर के रूप में रांची एक्सप्रेस से जुड़े। उसके बाद साप्ताहिक रविवार, प्रभात खबर, सेंटिनल, पांचजन्य, राजस्थान पत्रिका, टेलीग्राफ, इकोनॉमिक्स टाइम्स, अमर उजाला, बीएजी फिल्म्स, न्यूज 24, इंडिया टीवी, जी न्यूज जैसी संस्थाओं के लिए उप संपादक से लेकर विशेष संवाददाता, सहायक फीचर एडिटर, समन्वय संपादक, एक्जक्यूटिव प्रोड्यूसर जैसे पदों पर कार्य कर चुके हैं। टीवी की दुनिया में ‘पोलखोल’ और ‘सनसनी’ जैसे कार्यक्रमों का भी प्रोडक्शन किया है।

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