सहकारिता विभाग का सीधा सम्बंध गांव, गरीब और किसानों के हितों से होने के बावजूद उत्तर प्रदेश में यह महकमा भ्रष्टाचार और एक परिवार के वर्चस्व के कारण सुर्खियों में रहा है। ऐसे में जब योगी आदित्यनाथ सरकार सत्ता में आयी तो उसके सामने एक बड़ी चुनौती सहकारिता विभाग की छवि सुधारना थी। एक साल में सरकार ने भ्रष्टाचारियों पर कार्रवाई से लेकर सहकारी बैंकों की स्थिति बेहतर करने सहित कई महत्वपूर्ण कार्य किए हैं। वहीं अब किसानों को महत्वपूर्ण जानकारी देने की दिशा में नई पहल की जा रही है। सहकारिता विभाग की सफलताओं से लेकर भविष्य की योजनाओं के बारे में विभागीय मंत्री मुकुट बिहारी वर्मा से हिन्दुस्थान समाचार के उत्तर प्रदेश ब्यूरो प्रमुख राजेश तिवारी ने बातचीत की, पेश है प्रमुख अंश


हकारिता विभाग का सीधा सम्बंध गांव, गरीब और किसानों के हितों से होने के बावजूद उत्तर प्रदेश में यह महकमा भ्रष्टाचार और एक परिवार के वर्चस्व के कारण सुर्खियों में रहा है। ऐसे में जब योगी आदित्यनाथ सरकार सत्ता में आयी तो उसके सामने एक बड़ी चुनौती सहकारिता विभाग की छवि सुधारना थी। एक साल में सरकार ने भ्रष्टाचारियों पर कार्रवाई से लेकर सहकारी बैंकों की स्थिति बेहतर करने सहित कई महत्वपूर्ण कार्य किए हैं। वहीं अब किसानों को महत्वपूर्ण जानकारी देने की दिशा में नई पहल की जा रही है। सहकारिता विभाग की सफलताओं से लेकर भविष्य की योजनाओं के बारे में विभागीय मंत्री मुकुट बिहारी वर्मा से हिन्दुस्थान समाचार के उत्तर प्रदेश ब्यूरो प्रमुख राजेश तिवारी ने बातचीत की, पेश है प्रमुख अंश
सहकारिता क्षेत्र में पिछले एक वर्ष की सरकार की उपलब्धियां?
सबसे पहले तो सहकारिता क्षेत्र से जुड़े सभी संस्थानों में बायोमेट्रिक मशीन लगाकर सबकी उपस्थिति सुनिश्चित कराने की अनोखी पहल हुई है। पहले की सरकारों में सहकारिता से जुड़े हुए लोगों का कार्यालय आने व जाने का कोई समय तय नहीं था।  नियमित किए जाने योग्य करीब 400 संविदा कर्मचारियों को नियमित किया गया। 16.27 लाख रुपए के.सी.सी. कार्ड का वितरण कर कृषकों को डिजिटल पेमेन्ट सुविधाओं से लाभान्वित किया गया। उप्र कोऑपरेटिव बैंक से जुड़े ग्राहकों को अपने खाते की जानकारी के लिए मोबाइल एप की सुविधा दी गई।
उ.प्र. में सहकारिता क्षेत्र से जुड़े संस्थानों पर अक्सर भ्रष्टाचार के आरोप लगते रहे हैं, इससे निजात पाने का कोई उपाय?
पिछली सरकारों में यह विभाग भ्रष्टाचार का अड्डा बन गया था। अभी भी पिछली सरकार की भ्रष्टाचार के मामले रोजाना दो से चार आते रहते हैं। भ्रष्टाचार मामले में करीब 46 लोगों पर कठोर कार्रवाई की गई है। निलम्बन हो रहे हैं, जेल भेजे जा रहे हैं, रिकवरी हो रही है। जबकि करीब 150 मामले की जांच चल रही है। सभी कार्यालयों को कम्प्यूटरीकृत किया है। मैन्यूवल कार्यों पर रोक लगाई है।
प्राय: सहकारी समितियों के चुनावों में अध्यक्ष व अन्य पदाधिकारी सत्तारूढ़ दल के ही होते हैं। क्या यहां भी राजनीति हावी है?
पिछली सरकार में हुए कुकर्मो पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। पहले सहकारिता पर एक ही परिवार के सदस्यों का कब्जा था। अभी भी कुछ पदों पर ऐसे लोग काबिज हैं। वास्तव में पहली बार कोऑपरेटिव का चुनाव हो रहा है। इस बार हाईकोर्ट के गाइड लाइन्स पर उत्तर प्रदेश सहकारी निर्वाचन आयोग चुनाव करा रहा है। जो भी निर्वाचन से जुड़े लोग हैं, वह हमारे नहीं है। पर्यवेक्षक भी सरकार की ओर से तय किये गये हैं। पहले से चुनाव केन्द्र निर्धारित हैं, किसी का घर निर्वाचन केन्द्र नहीं बना है।
सहकारी समिति में भर्ती की संभावना या प्रक्रिया में कोई सुधार?
उ.प्र. सहकारी संस्थागत सेवा मण्डल के स्तर से संपादित होने वाली वर्ग-3 और वर्ग-4 की भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के साथ ही साक्षात्कार को समाप्त किया है। शीघ्र ही रिक्त स्थानों को भरा जायेगा।
सहकारिता से जुड़े बैंकों में अक्सर भ्रष्टाचार के आरोप लगते रहते हैं, कोई उपाय?
सहकारिता से जुड़े सभी बैंकों को कम्प्यूटरीकृत किया गया है। कोई भी लेन-देन नगदी में करने पर रोक लगाई गई है। बैंकों को पेपरलेस करने की पहल जारी है।
सहकारी बैंकों में जमाकर्ता का पैसा नहीं मिलता, ऐसे आरोप लगते रहते हैं, कोई सुधार?
हमारे कुल 16 बैंक है। जमाकर्ता हमारे आठ बैंकों में जमाकर्ता अपना पैसा कभी भी निकाल सकते हैं। शेष आठ बैंकों में 5 प्रतिशत प्रतिमाह भुगतान की व्यवस्था है। आगामी वर्ष में इन आठ बैकों में भी जमाकर्ता का पूरा भुगतान करने की व्यवस्था में हम सफल होंगे।
अब किसानों को कृषि से संबंधित नई-नई जानकारी देने के लिए हम एक नये प्रकार की मोबाइल सिम ला रहे हैं। यह सिम ‘इफको’ की ओर से एयरटेल कम्पनी द्वारा तैयार कराया जा रहा है। यह सिम प्रतिदिन कृषि से संबंधित सिम धारकों को तीन बार वायस संदेश भेजेगा। जो किसान एयरटेल का सिम उपयोग कर रहे हैं, उन्हें हम इस सिम को देंगे। इसका कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं होगा। यह सिम सो रहे किसानों को जगाने का काम करेगा। इससे भी कई लोगों को रोजगार मिलेगा।
खाद को लेकर किसानों को अक्सर परेशानी होती है, यह समय पर मिले, इसकी कोई योजना?
किसानों की जितनी मांग होगी, उसे हम पूरा करने के लिए तैयार हैं। किसानों को खाद की कमी नहीं होगी। वर्ष 2017-18 में 31.40 लाख मी. टन उर्वरक वितरण के लक्ष्य के सापेक्ष अब तक 28.95 लाख मी. टन उर्वरक का वितरण हुआ, जो लक्ष्य का 92.19 प्रतिशत है।
इस वर्ष गेहूं क्रय का लक्ष्य और लाभ क्या है?
वर्ष 2017-18 में पीसीएफ एवं पीसीयू के माध्यम से 16.00 लाख मी. टन गेहूं की खरीद करने का लक्ष्य था जिसके सापेक्ष कुल 19.25 लाख मी. टन गेहूं की खरीद हुई, जो लक्ष्य का 120.32 प्रतिशत है। पिछले वर्ष गेहूं खरीद से 130 करोड़ का शुद्ध मुनाफा हुआ था। जितने विभाग गेहूं खरीद कर रहे थे, उसमें से प्रथम स्थान सहकारिता विभाग को मिला था। सारे
किसानों का पैसा सीधे भुगतान हुआ। धान खरीद में भी हमने रिकॉर्ड बनाया था, इस बार भी पिछले रिकॉर्ड को तोड़ेंगे।
प्रदेश की साधन सहकारी समितियां मुख्यत: खाद-बीज वितरण या किसानों को अल्पकालिक ऋण देने तक सीमित रही हैं। इनकी उत्पादन व कृषि उत्पादों के विपरण में कोई भूमिका नहीं होती?
हमारी सरकार ने इस सम्बन्ध में विचार ही नहीं कार्य करना भी शुरू कर दिया है। अब इन केन्द्रों से पशु आहार, आचार, मुरब्बा, हाथ से बनी वस्तुओं समेत कई प्रकार के उत्पादों का क्रय और विक्रय हो सकेगा। इन समितियों को वर्ष भर काम देने पर विचार चल रहा है।
अक्सर भण्डारण को लेकर समस्याएं बनी रहती हैं, आपकी सरकार में कोई उपाय?
मार्च-2017 में राज्य भण्डारण निगम की कुल क्षमता 35.67 लाख मी. टन थी तथा उपयोगिता 73.17 थी। जनवरी 2018 में निगम की कुल क्षमता 38.37 लाख मी. टन है तथा उपयोगिता 80.49 प्रतिशत हो गई है। भण्डारणी सहकारी संस्थाओं को 10 प्रतिशत एवं किसानों को 30 प्रतिशत की छूट है।
कोई उपलब्धि जो आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण हो?
अप्रैल 2017 से माह फरवरी 2018 तक की अवधि में भण्डारण शुल्क के रूप में 20211.10 लाख प्राप्त हुये हैं, जबकि इस अवधि में पूर्व वर्ष में 14611.00 लाख प्राप्त हुये। यह विगत वर्ष की तुलना में 138 प्रतिशत अधिक है।
गुजरात में जिस प्रकार ‘अमूल’ ने सहकारिता को नई पहचान दी है, आपकी कोई योजना?
यह एक दीर्घकालीक व दूरगामी योजना है, अभी फिलहाल कोई ऐसी योजना नहीं है। अभी तो हमारी प्राथमिकता में सहकारिता की खोई ‘साख’ का वापस दिलाना और घाटे से उबारना है।
क्या आगामी समय में किसी ब्रांड के स्थापित होने की संभावना है?
सभी ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल प्राप्त हो, इसके लिए सहकारिता से जुड़े सभी क्रय केन्द्रों पर आरओ ट्रीट प्लांट लगाने की पहल शुरू हुई है। इससे काफी संख्या में लोगों को रोजगार मिलेगा और दिमागी बुखार जैसी बीमारियों से निजात मिलेगी। यह सहकारिता का प्रोडक्ट होगा। प्रयास है कि यह पानी अन्य कम्पनियों के पेय जल से सस्ता हो।
भाजपा के विचारक पं.दीनदयाल उपाध्याय के ‘अन्त्योदय’ दर्शन और ‘सहकारिता’ को किस तरह देखते हैं?
दोनों एक दूसरे के पूरक हैं। पं. दीनदयाल उपाध्याय का सपना था कि पंक्ति में खड़ा अंतिम व्यक्ति स्वावलम्बी हो, उसे सभी प्रकार की योजनाओं का लाभ मिले। सहकारिता क्षेत्र का भी यही सपना है। सहकारिता एक ऐसा माध्यम है जिससे गरीबों, किसानों को आत्मनिर्भर बनाया जा सकता है। करीब 37 लाख नये राशन कार्ड बनाये गये, जिसमें 1 लाख अन्त्योदय कार्ड शामिल है।
आपके नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में सहकारिता के किस दिशा में जाने की उम्मीद की जाए?
हम लगातार नये-नये प्रयोग कर रहे हैं। अब किसानों को कृषि से संबंधित नई-नई जानकारी देने के लिए हम एक नये प्रकार की मोबाइल सिम ला रहे हैं। यह सिम ‘इफको’ की ओर से एयरटेल कम्पनी द्वारा तैयार कराया जा रहा है। यह सिम प्रतिदिन कृषि से संबंधित सिम धारकों को तीन बार वायस संदेश भेजेगा। जो किसान एयरटेल का सिम उपयोग कर रहे हैं, उन्हें हम इस सिम को देंगे। इसका कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं होगा। यह सिम सो रहे किसानों को जगाने का काम करेगा। इससे भी कई लोगों को रोजगार मिलेगा।
 
अंत में क्या कहना चाहेंगे?
सहकारिता के पास सब कुछ है, धन भी है, संसाधन भी है, लोग भी हैं, भवन भी है, सिफ नहीं है तो योजना। हम सभी को योजना देने जा रहे हैं।

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