हते हैं जब सटीक रणनीत और मेहनत हो तो कुछ भी कठिन नहीं है। यह बात राज्य के निगम चुनाव में भाजपा को मिली जीत से साबित हुई।


झारखंड नगर निकाय चुनाव जीतकर भाजपा ने सेमी फाइनल पास कर लिया है। निकाय चुनाव को 2019 में होने वाले लोकसभा और विधानसभा चुनावों का सेमी फाइनल माना जा रहा था। भाजपा ने नगर निकायों के 68 पदों पर में से 36 पद पर जीत दर्ज कर विपक्ष को करारी शिकस्त दी है। जबकि बिखरा विपक्ष भाजपा को मात देने में नाकामयाब रहा। संपूर्ण विपक्ष के लिए नगर निकायों के चुनाव का परिणाम एक सबक भी है। नगर निकाय चुनाव के पहले विपक्षी दलों को अपनी-अपनी ताकत पर भरोसा था। लिहाजा किसी ने न तो एकजुटता की पहल की और न ही एक दूसरे के साथ तालमेल कर चुनव लड़ने की कोशिश की।

भाजपा का परचम

राज्य में पहली बार दलगत आधार पर हुए 34 शहरी निकायों के चुनाव में से मेयर और अध्यक्ष के 20 पद और डिप्टी मेयर व उपाध्यक्ष के 15 पदों पर भाजपा का परचम लहराया। राज्य के पांचों नगर निगम पर भाजपा ने कब्जा कर लिया।

वहीं 17 नगर परिषदों में सात के अध्यक्ष और पांच के उपाध्यक्ष पद पर उसे सफलता मिली। इसके अलावा कोडरमा के झुमरीतिलैया का उपचुनाव भी भाजपा ने जीत लिया। राज्य के 13 नगर पंचायतों में भी चुनाव हुए। इनमें नौ नगर पंचायतों में भाजपा ने अध्यक्ष और पांच उपाध्यक्ष पर जीत हासिल की। इस चुनाव में भाजपा की सहयोगी ऑल झारखंड स्टूडेंट्स यूनियन (आजसू) ने भी कई सीटों पर उम्मीदवार उतारा था। इनमें रामगढ़ नगर परिषद के दोनों पद और नगर पंचायत में डोमचांच में अध्यक्ष तथा बुंडू में उपाध्यक्ष पद जीतकर अपनी उपस्थिति दर्ज करायी है।

विकास पर भरोसा

वार्ड पार्षद को छोड़कर ऊपर के सभी पदों के चुनाव में राष्ट्रीय और क्षेत्रीय दलों ने अपने उम्मीदवारों को पार्टी सिंबल दिया था। भाजपा, कांग्रेस, झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो), झारखंड विकास मोर्चा (झाविमो) और आजसू सहित सभी दलों ने रांची के मेयर और डिप्टी मेयर पद के लिए अपने-अपने उम्मीदवार खड़े किए थे। लेकिन किसी को कामयाबी नहीं मिली। मेयर पद पर भाजपा की आशा लकडा ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी झामुमो की वर्षा गाडी को करीब 39 हजार मतों से हराया। डिप्टी मेयर पद पर भी भाजपा के ही संजीव विजयवर्गीय ने कांग्रेस के राजेश गुप्ता को 33 हजार से अधिक वोटों से पराजित किया। रांची की जनता ने विपक्षी दलों के वादों पर भरोसा न कर भाजपा के विकास कार्यों पर विश्वास जताया।  

 

पलट दी बाजी

झारखंड में नगर निकाय चुनाव से पहले तरह-तरह के कयास लगाये जा रहे थे। जिससे विपक्षी दलों का हौसला बुलंद था। लेकिन इन सब के बीच अपने कुशल संगठन एवं कौशल के बल पर प्रदेश संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह ने पर्दे के पीछे रहकर पूरी बाजी पलट दी। इस तरह बेजोड़ चुनावी प्रबंधन के बल पर भाजपा ने झारखंड के निकाय चुनाव में अप्रत्याशित जीत हासिल कर ली।

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नामधारी दलों को पछाड़ते हुए कांग्रेस दूसरे नम्बर पर

विपक्षी दलों में झारखंड नामधारी दलों को पीछे करते हुए कांग्रेस इस चुनाव में दूसरे नम्बर पर रही। कांग्रेस के पांच प्रत्याशियों ने नगर परिषद के अध्यक्ष, तीन ने उपाध्यक्ष और एक ने नगर पंचायत के उपाध्यक्ष पद पर जीत हासिल की। झामुमो के दो प्रत्यशियों ने नगर परिषद अध्यक्ष, तीन ने उपाध्यक्ष और एक-एक प्रत्याशी ने नगर परिषद के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष और एक-एक प्रत्याशी ने नगर पंचायत के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चुनाव जीता। वहीं झाविमो के दो प्रत्याशियों ने नगर परिषद के उपाध्यक्ष और एक-एक प्रत्याशी ने नगर पंचायत के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष की सीट पर कब्जा जमाया। राजद के एक प्रत्याशी ने नगर पंचायत के अध्यक्ष और दो ने उपाध्यक्ष का चुनाव जीता। राजनीतिक प्रेक्षकों के अनुसार निकाय चुनाव में वोटरों की भूमिका कुछ अलग रही। रांची नगर निगम के मेयर और डिप्टी मेयर के प्रत्याशियों से नाराजगी के बावजूद  वोटरों ने भाजपा के नाम पर कमल चुनाव चिन्ह पर बटन दबाया। प्रत्याशी चयन को लेकर कार्यकर्ताओं में असंतोष की भावना भी साइलेंट वोटरों के निश्चय को नहीं डिगा सकी। यही कारण है कि अधिकतर बूथों पर भाजपा कार्यकर्ताओं की अनुपस्थिति के बावजूद परम्परागत मतदाताओं ने भाजपा की झोली भर दी।

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