भी ज्यादा समय नहीं हुआ, जब आरबीआई ने डिजिटल करंसी का विरोध किया था। पर अब आरबीआई खुद इस तरह की करंसी जारी करने के लिए संभावनाएं तलाश रहा है।


अपनी कीमत में आए जबरदस्त उछाल की वजह से बिटकॉइन और इसके जैसी तमाम क्रिप्टो या वर्चुअल करंसी भारत समेत पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बन गयी हैं। कुछ महीने पहले तक भारत में कुछ चुनिंदा लोगों को ही बिटकॉइन या इसके जैसी अन्य क्रिप्टो करंसी के बारे में कोई जानकारी थी, लेकिन बिटकॉइन को लेकर पिछले दिनों इतनी हलचल मची कि समाचार पढ़ने वाले अधिकांश लोगों को इनके बारे में पता चल गया।

दरअसल, मौजूदा समय में डिजिटल पेमेंट के क्षेत्र में वर्चुअल करंसी के महत्व को नकारा नहीं जा सकता। पेमेंट पैटर्न में आए इस बदलाव के साथ ही प्राइवेट डिजिटल टोकन्स के उभार तथा नोट सिक्के की बढ़ती लागत जैसे कारणों ने दुनियाभर के बैंकों को डिजिटल करेंसी लाने के विकल्प तलाशने के लिए प्रेरित किया है। भारतीय रिजर्व बैंक भी डिजिटल करेंसी के महत्व से अनजान नहीं है। इसीलिए इसके साथ ही शीर्ष बैंक खुद अपनी क्रिप्टो करेंसी लाने की बात पर भी विचार कर रहा है। जिससे केवल डिजिटल प्लेटफॉर्म का अधिकतम लाभ उठाया जा सके, बल्कि पेमेंट मॉडल के रूप में देशवासियों को एक वैकल्पिक सुविधा भी मिल सके।

भारतीय रिजर्व बैंक में डिजिटल करंसी जारी करने की संभावना तलाशने के लिए एक अंतरविभागीय समूह का गठन किया है, जो इस मुद्दे पर रिजर्व बैंक को सलाह देगा। विभागीय अधिकारियों का यह समूह डिजिटल करंसी लाने की जरूरत, उसकी संभावनाएं और उसके संभावित खतरों के बारे में अध्ययन करेगा और इसी साल जून के अंत तक अपनी रिपोर्ट बैंक को सौंप देगा।

क्रिप्टो करंसी की बढ़ी मांग

मनी मार्केट एनालिस्ट राजेश गर्ग के अनुसार डिजिटलाइज्ड पेमेंट प्रॉसेस आज के समय में आवश्यक होता जा रहा है। इसका सबसे बड़ा फायदा इससे होने वाले भुगतान में ट्रांजेक्शन चार्ज का नहीं होना और पलक झपकते ही ग्राहक के पास से मर्चेंट के पास पैसा पहुंच जाना भी है। बिटकॉइन तथा अन्य क्रिप्टो करंसी को लेकर भले ही दुनिया भर के तमाम केंद्रीय बैंकों ने निवेशकों को सतर्क रहने की चेतावनी दी है, लेकिन सच्चाई यही है कि वैश्विक कारोबार की दुनिया में इन डिजिटल करंसी का धड़ल्ले से उपयोग हो रहा है। क्रिप्टो करंसी के जरिये भुगतान स्वीकार करने वाली बड़ी कंपनियों में माइक्रोसॉफ्ट, सैमसंग, वॉलमार्ट, ब्रेनट्री, केएफसी कनाडा, नेमचिप, पेम्बुरी टेवेरन शामिल हैं। इसके अलावा एक मई से ही रिचर्ड बैनसन के वर्जिन ग्रुप ने भी अपनी तीन कंपनियों वर्जिन मोबाइल, वर्जिन एयरलाइन और वर्जिन गैलेक्टिक के लिए क्रिप्टो करंसी के जरिये भुगतान स्वीकार करना शुरू कर दिया है।

डिजिटलाइज्ड पेमेंट प्रॉसेस की वजह से माउस के एक क्लिक के साथ ही दुनिया के किसी भी कोने में बिना किसी क्लियरिंग प्रॉसेस के ही भुगतान लेने वाले के खाते में करंसी पहुंच जाती है। इसके साथ ही चूंकि इस प्रॉसेस में मानव श्रम और समय की जरूरत की न्यूनतम जरूरत होती है, इसीलिए दुनिया भर में कार्यरत तमाम क्रिप्टो करंसी एक्सचेंज ने इसे किसी भी तरह के ट्रांजेक्शन चार्ज से मुक्त रखा है। जबकि सामान्य परिस्थितियों में अंतर्राष्ट्रीय बाजार में होने वाली खरीद में एक देश की मुद्रा को दूसरे देश की मुद्रा में या फिर डॉलर में बदलने के लिए केंद्रीय बैंक को तय चार्ज देना पड़ता है। यही वजह है कि अब तमाम देशों में कारोबारियों के बीच वर्चुअल करंसी का चलन बढ़ता जा रहा है।

भारतीय रिजर्व बैंक ने किया था विरोध

आरबीआई अभी भले ही अपनी क्रिप्टो करंसी लाने की बात पर विचार कर रहा है, लेकिन इसी शीर्ष बैंक ने पिछले साल ही इसका प्रत्यक्ष विरोध भी किया था। बिटकॉइन की जबरदस्त उछाल के बाद आरबीआई के एक बयान में कहा गया था कि ह्यवर्चुअल करंसी, जिसे क्रिप्टो करंसी या क्रिप्टो ऐसेट के रूप में जाना जाता है कि वह फाइनेंशियल सिस्टम को ज्यादा एफिशियंट और इन्क्लूसिव बना सकता है, लेकिन इससे कंजूमर प्रोटेक्शन, मार्केट इंटीग्रिटी और मनी लॉन्ड्रिंग जैसे विभिन्न प्रकार की चिंताएं भी पैदा होती हैं। बयान जारी करने के बाद शीर्ष बैंक ने अपने पॉलिसी स्टेटमेंट में कहा था कि रिजर्व बैंक ने बिटकॉइन समेत तमाम वर्चुअल करेंसी के यूजर्स, होल्डर्स और ट्रेडर्स को इनकी डीलिंग से जुड़े विभिन्न जोखिमों के प्रति लगातार सचेत किया है। इन डिजिटल करंसी से जुड़े जोखिमों को देखते हुए तत्काल प्रभाव से फैसला किया कि भारतीय बैंकिंग सिस्टम से संबंधित कोई भी संस्था ऐसे किसी भी कारोबारी प्रतिष्ठान के साथ कोई सौदासमझौता नहीं करेगी और उन्हें कोई सर्विस नहीं देगी, जो वर्चुअल करंसी में डील करती है। आरबीआई से संबद्ध ऐसी संस्थाओं को एक निश्चित समय सीमा में वर्चुअल करंसी में डील करने वाले प्रतिष्ठानों से रिश्ता तोड़ना होगा। 

पहले विरोध, अब विचार

हालांकि इसके पहले भारतीय रिजर्व बैंक ने वर्चुअल करंसी के उपयोग को लेकर चिंता भी जताई थी और सभी वित्तीय संस्थानों को वर्चुअल करंसी में डील करने वाले व्यक्तियों या संस्थाओं से दूरी बनाकर रखने का निर्देश दिया था। इसके बावजूद अब खुद आरबीआई क्रिप्टो करंसी जारी कर भारतीय नागरिकों को एक डिजिटल प्लेटफॉर्म देने के विकल्प पर विचार कर रही है। यह बात आश्चर्यजनक जरूर है, लेकिन वित्तीय मामलों के जानकार इसे समय की जरूरत बताते हैं।

आरबीआई की पूर्व महाप्रबंधक (मुद्रा विनियम) टीवी थिरुमला का कहना है कि बाजार में मौजूद तमाम क्रिप्टो करंसी पर किसी भी देश की सरकार या किसी भी केंद्रीय बैंक का नियंत्रण नहीं है। इसलिए तो उनकी कीमतों पर किसी प्रकार का नियंत्रण किया जा सकता है और ही उनके भविष्य को लेकर कोई निश्चित राय बनायी जा सकती है। लेकिन यदि कोई केंद्रीय बैंक अपनी क्रिप्टो करेंसी जारी करेगा, तो ये काम उस देश के मुद्रा अधिनियम के तहत किया जाएगा। साथ ही उसके एवज में सुरक्षित स्वर्ण भंडार या अन्य किसी सुरक्षित संपत्ति की गारंटी होगी, ताकि उस क्रिप्टो करंसी में निवेश करने वाले या उसके मार्फत लेनदेन करने वाले व्यक्ति के आर्थिक हित सुनिश्चित रहें।

जहां तक आरबीआई की बात है, तो वह एक संप्रभु देश का केंद्रीय बैंक है और उसके लिए इस तरह की व्यवस्था करना संभव भी है। साथ ही आरबीआई की क्रिप्टो करंसी को दुनिया के तमाम देशों से मान्यता मिलने की संभावना भी अधिक होगी, क्योंकि यह एक संप्रभु देश के केंद्रीय बैंक द्वारा जारी की गई एक विश्वसनीय और सुरक्षित मुद्रा भंडार की गारंटी वाली क्रिप्टो करेंसी होगी। जबकि अभी प्रचलन में जितने भी क्रिप्टो करंसीज हैं, उन्हें दुनिया के किसी भी केंद्रीय बैंक ने जारी नहीं किया है। सबसे बड़ी बात तो ये है कि आरबीआई द्वारा जारी होने वाली क्रिप्टो करंसी की गारंटी खुद भारत सरकार होगी, जबकि अन्य प्रचलित क्रिप्टो करंसी की गारंटी लेना तो दूर उसे मान्यता देने वाला भी कोई देश नहीं है।

क्रिप्टो करंसी की सुरक्षा

हालांकि मनी मार्केट के कुछ जानकार आरबीआई के प्लेटफॉर्म से जारी होने वाले संभावित क्रिप्टो या वर्चुअल करंसी को भी खतरों से पूरी तरह से सुरक्षित नहीं मानते। दिल्ली स्कूल आॅफ इकोनॉमिक्स में डेवेलपमेंट मैक्रोइकोनॉमिक्स विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. दिव्येंदु मैती का कहना है कि यदि आरबीआई खुद क्रिप्टो करंसी जारी करता है, तो इससे निवेशकों का मूल पैसा डूबेगा नहीं, इस बात की तो गारंटी होगी, लेकिन इस मुद्रा को जब तक अंतर्राष्ट्रीय मान्यता नहीं मिलती, तब तक क्रिप्टो करंसी एक्सचेंज में इसके जरिये विनिमय करना आसान नहीं होगा। इसके साथ ही ये करंसी पूरी तरह से क्रिप्टोग्राफी पर आधारित है। ऐसे में हैकिंग एक्सपर्ट क्रिप्टोलॉजिस्ट इस मुद्रा भंडार में कभी भी सेंध लगा सकते हैं। ऐसा हुआ तो निवेशकों को भले ही नुकसान हो, लेकिन देश को भारी चपत लग सकती है। इसलिए अगर आरबीआई क्रिप्टो करंसी के फील्ड में उतरता है, तो उसे पहले इसकी टेक्निकल सिक्योरिटी की मुकम्मल व्यवस्था करनी होगी।

स्पष्ट है कि डिजिटलाइज पेमेंट प्रॉसेस की बढ़ती मांग को देखते हुए आने वाले दिनों में क्रिप्टो करंसी का बाजार तेजी से बढ़ सकता है। जहां तक बिटकॉइन की तेजी को देखते हुए ऐसी करंसी पर रोक लगने की आशंका की बात है, तो ऐसा होने की संभावना काफी कम है। सच तो ये है कि डिजिटल पेमेंट मॉड्यूल की दुनिया भर में बढ़ती मांग को देखते हुए अभी कई अन्य देश भी इस तरह की करेंसी लाने की बात कर सकते हैं। ४४४

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