र्नाटक की राजाराजेश्वरी नगर विधानसभा सीट पर कांग्रेस ने सफलता हासिल कर विधानसभा में अपनी ताकत और बढ़ा ली है। ये परिणाम बीजेपी के लिए एक चेतावनी भी है कि अगर पार्टी ने ध्यान नहीं दिया तो आगामी 11 जून को जयनगर विधानसभा सीट के लिए होने वाले चुनाव में भी कांग्रेस अपना परचम लहरा सकती है। जयनगर में बीजेपी प्रत्याशी बीएन विजयकुमार के निधन की वजह से चुनाव रद्द हो गया था। अब बीजेपी ने यहां बीएन विजयकुमार के भाई बीएन प्रह्लाद को अपना टिकट दिया है।

विजयकुमार संघ पृष्ठभूमि वाले एक लोकप्रिय नेता थे। यहां विधायक रहते हुए उन्होंने विपक्ष में होने के बावजूद काफी काम कराया। इसी कारण लोगों के बीच उनकी स्वीकार्यता भी काफी अधिक थी। अब पार्टी ने उनके भाई को टिकट देकर चुनावी संग्राम में उतरने का फैसला किया है और यहां अपनी जीत को लेकर काफी आश्वस्त भी है। परंतु उसका यही अति आत्मविश्वास उसके लिए घातक भी सिद्ध हो सकता है। इसके पीछे कई कारण बताए जा सकते हैं। सबसे पहले तो स्थानीय कार्यकर्ता तथा पार्षद प्रह्लाद के चयन से खुश नहीं हैं। कार्यकर्ताओं का मानना है कि बीएन प्रह्लाद कभी भी अधिक सक्रिय नहीं रहे। ऐसे में स्थानीय कार्यकर्ताओं की उपेक्षा कर उनको टिकट दिया जाना ठीक नहीं है। पार्टी प्रत्याशी के रूप में प्रह्लाद के नाम की घोषणा होने के बाद से ही कई सक्रिय कार्यकर्ताओं ने खुद को चुनाव प्रचार अभियान से अलग कर लिया है, ये बात बीजेपी के लिए नुकसानदेह साबित हो सकती है।

राज्य की जयनगर विधानसभा सीट अब काफी अहम मानी जा रही है। राजाराजेश्वरी नगर विधानसभा सीट में कांग्रेस को मिली जीत के बाद भाजपा के लिए जयनगर सीट जीतना नाक का सवाल भी बन सकता है।

जयनगर विधानसभा सीट बेंगलुरु संसदीय सीट के तहत आती है, जहां से अभी केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री एचएन अनंत कुमार सांसद हैं। बेंगलुरु और इसके अगल-बगल की कुल चार संसदीय सीटों में से सिर्फ बेंगलुरु साउथ सीट में आने वाले विधानसभा सीटों पर बीजेपी को विधानसभा चुनाव के दौरान सफलता मिल सकी थी, जबकि बेंगलुरु नॉर्थ, बेंगलुरु सेंट्रल और बेंगलुरु रूरल सीट की विधानसभा सीटों पर कांग्रेस ने आशा के विपरीत जबरदस्त प्रदर्शन करते हुए बीजेपी का सफाया कर दिया था। हालांकि पहले यही माना जा रहा था कि बेंगलुरु की इन चारों सीटों पर विधानसभा चुनाव के दौरान बीजेपी का वर्चस्व रहेगा। लेकिन पार्टी कार्यकर्ता अपने समर्थकों को मतदान केंद्रों तक ला पाने में सफल नहीं हो सके। इसी वजह से कांग्रेस ने आसानी से यहां की दर्जनभर से अधिक सीटों पर अपना कब्जा कर लिया था। बताते हैं कि कांग्रेस को खुद इस बात की उम्मीद नहीं थी कि वह बेंगलुरु में ऐसी सफलता हासिल कर सकेगी। दूसरी ओर बीजेपी यह मानकर चल रही थी कि इन सीटों पर तो उसका ही कब्जा होगा।

फिलहाल बीजेपी जयनगर विधानसभा सीट पर जीत हासिल कर यह जताना चाहती है कि बेंगलुरु क्षेत्र में उसकी पकड़ कमजोर नहीं पड़ी है। कांग्रेस ने यहां से पूर्व गृहमंत्री आर. रामलिंगा रेड्डी की बेटी सौम्या रेड्डी को अपना उम्मीदवार बनाया है। रामलिंगा रेड्डी जयनगर सीट से विधायक भी रह चुके हैं और उन्होंने अपनी राजनीतिक पारी एक पार्षद के रूप में ही शुरू की थी। स्थानीय नेता होने की वजह से जयनगर के मतदाताओं पर उनकी पकड़ भी अच्छी है, जो अंतत: उनकी बेटी और कांग्रेस प्रत्याशी सौम्या के काम आएगी। यहां मुख्य मुकाबला सौम्या और बीएन प्रह्लाद के बीच ही होने वाला है।

बीजेपी इस सीट को अपने लिए पक्का मानकर चल रही है, लेकिन बीएन प्रह्लाद की उम्मीदवारी ने की वजह से कार्यकर्ताओं की नाराजगी और सौम्या रेड्डी को पिता आर. रामलिंगा रेड्डी का मिल रहा साथ आगे चलकर बीजेपी के लिए भारी भी पड़ सकता है। यहां बीएन प्रह्लाद की जीत तभी संभव है, जब पार्टी के कार्यकर्ता अपने समर्थकों को अधिक से अधिक संख्या में मतदान केंद्रों तक ला सकें। बिना कार्यकर्ताओं के सक्रिय हुए बीजेपी के लिए इस सीट को अपने पक्ष में निकाल पाना आसान नहीं होगा नहीं होगा। पार्टी अगर इस सीट को जीत लेती है, तो यह उसके लिए काफी उत्साहजनक होगा।

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