विगत 22 मार्च, 2018 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट ने केंद्र सरकार द्वारा प्रायोजित राष्ट्रीय स्वास्थ्य संरक्षण मिशन को मंजूरी दी। इस मिशन में केंद्रीय सरकार का हिस्सा आयुष्मान भारत के तहत उपलब्ध होगा, जो स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत एक कार्यक्रम है। इस बाबत केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा का कहना है कि, एनएचपीएम सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह स्वास्थ्य खर्च की भयावहता से 50 करोड़ लोगों (10 करोड़ परिवारों) को सुरक्षित करेगा। इससे देश के 40 प्रतिशत जनसंख्या को लाभ मिलेगा।

गौरतलब है कि पांच लाख रुपये की कवरेज वाली इस योजना में परिवार के आकार और उम्र की कोई सीमा नहीं रहेगी। इलाज के लिए अस्पताल में दाखिल होने के वक्त यह योजना गरीब और कमजोर परिवारों की मदद करेगी। सामाजिकआर्थिकजाति जनगणना के आंकड़ों के आधार पर समाज के गरीब और असहाय जनसंख्या को आयुष्मान भारतएनएचपीएम योजना से वित्तीय मदद मिलेगी। केंद्र सरकार द्वारा प्रायोजित राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना (आरएसबीवाई) तथा वरिष्ठ नागरिक स्वास्थ्य बीमा योजना (एससीएचआईएस) योजनाएं एनएचपीएम में शामिल कर दी जाएंगी। सरकार द्वारा वित्त पोषित यह विश्व की सबसे बड़ी स्वास्थ्य बीमा योजना होगी। लोग सरकारी और अधिसूचित निजी अस्पतालों में इलाज की सुविधा प्राप्त कर सकेंगे। सभी सरकारी अस्पतालों को इस योजना में शामिल किया गया है। निजी अस्पतालों की आॅनलाइन सूची बनाई जाएगी। निश्चित रूप से सरकार का यह प्रयास सार्वभौमिक स्वास्थ्य की दिशा में एक सार्थक कदम है।

स्वास्थ्य बजट की स्थिति

1 फरवरी, 2018 को तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली ने अपने वित्तीय भाषण में स्वास्थ्य विषय पर विशेष ध्यान दिया। वित्त मंत्री ने कहा था कि, ‘ 2018-19 में राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम पर 9975 करोड़ रुपये रखा गया है। सर्वे भवन्तु सुखिन: सर्वे सन्तु निरामया हमारी सरकार का मार्गदर्शक सिद्धांत है।

आयुष्मान भारत के अंतर्गत दो प्रमुख पहलों की घोषणा करते हुए उन्होंने कहा कि टीवी पीड़ित सभी रोगियों को उनके उपचार की अवधि के दौरान 500 रुपये प्रति माह के हिसाब से पोषाहार हेतु सहायता प्रदान करने के लिए 600 करोड़ रुपये आवंटित किया गया है। उन्होंने आगे कहा कि हम देश में मौजूदा जिला अस्पतालों को अपग्रेड कर 24 नए सरकारी चिकित्सा कॉलेजों और अस्पतालों की स्थापना करेंगे। इस कदम से यह सुनिश्चित होगा कि प्रत्येक 3 संसदीय क्षेत्रों के लिए कम से कम एक चिकित्सा महाविद्यालय हो।

मोदी सरकार ने अपने चार साल पूरे कर लिए हैं। पिछले चार साल में किए अपने कार्यों को लेकर सरकार अब जनता के बीच में है। इस बीच सरकार के कार्यों का परीक्षण जरूरी हो जाता है।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा था कि, ‘भारत के स्वास्थ्य प्रणाली की नींव के रूप में स्वास्थ्य एवं आरोग्य केन्द्रों की परिकल्पना की गयी है। ये 1.5 लाख केन्द्र स्वास्थ्य देखरेख प्रणाली को लोगों के घरों के पास लाएंगे। ये स्वास्थ्य केन्द्र असंचारी रोगों, मातृत्व तथा बाल स्वास्थ्य सेवाओं सहित व्यापक स्वास्थ्य देखरेख उपलब्ध कराएंगे। ये केन्द्र आवश्यक दवाएं दैनंदिन सेवाएं भी मुफ्त उपलब्ध कराएंगे। इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम के लिए 1200 करोड़ रुपये का प्रावधान है।

देश के गरीब जनता की स्थिति का हवाला देते हुए वित्त मंत्री ने कहा था कि, हम सब जानते हैं कि हमारे देश में लाखों परिवारों को ईलाज के लिए उधार लेना पड़ता है या संपत्तियां बेचनी पड़ती है, सरकार निर्धन एवं कमजोर परिवारों की ऐसी दरिद्रता के बारे में अत्यधिक चिंतित है। अब हम 10 करोड़ से अधिक गरीब एवं कमजोर परिवारों (लगभग 50 करोड़ लाभार्थी) को दायरे में लाने के लिए एक फ्लैगशीप राष्ट्रीय स्वास्थ्य संरक्षण योजना प्रारंभ करेंगे। यह विश्व का सबसे बड़ा सरकारी वित्तपोषित स्वास्थ्य देखरेख कार्यक्रम होगा। आयुष्मान भारत की यह दो पहल वर्ष 2022 तक एक नए भारत की निर्माण करेगी।

गौरतलब है कि 30 अप्रैल, 2018 से आयुष्मान भारत के अंतर्गत वेल इक्वि प्ड आरोग्य केन्द्र खुलने शुरू हो चुके हैं। जिस दिन डेढ़ लाख आरोग्य केन्द्र खुल जाएंगे निश्चित रूप से ग्रामीण भारत की स्वास्थ्य जरूरतों को बहुत हद तक पूर्ण किया जा सकेगा। लेकिन यहां पर ध्यान देने वाली बात यह है कि देश में प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों की स्थिति ठीक नहीं है। इसे ठीक करने की जरूरत है। संक्षेप में यह कहा जा सकता है कि भारत सरकार ने आयुष्मान भारत के जरिए एक बेहतरीन स्वास्थ्य व्यवस्था लागू करने की कोशिश की है, जरूरत इस बात की है कि यह योजना ठीक से अंतिम जन तक पहुंच सके।  

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