म्मू कश्मीर का क्षेत्रीय राजनीतिक दल नेशनल कांफ्रेंस चाहें जो कहे, वहां के हालात सुधारने में केंद्र सरकार की ईमानदार कोशिशों को दरकिनार नहीं किया जा सकता। केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह के ताजा सूबाई दौरे के पहले नेशनल कांफ्रेंस को लगा था कि वह हर बार कुछ घोषणाएं कर जाते हैं, जबकि उन पर अमल नहीं हो पाता। नेशनल कांफ्रेंस के स्थानीय नेताओं ने एक बार फिर से सभी पक्षों के साथ बातचीत का सुर भी अलापा। हमारा मानना है कि इस पूरे संदर्भ को समझने के लिए मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती का बयान ध्यान में रखना चाहिए। सीएम ने साफ कर दिया कि हाल के फैसलों से केंद्र ने राज्य के लोगों को एक और मौका दिया है। इस मौके को गंवा देने पर पछताना पड़ सकता है। दरअसल, केंद्रीय गृहमंत्री के दौर के कई आयाम रहे। जम्मू में एक बड़े खेल आयोजन का उद्घाटन करते हुए उन्होंने कहा कि सूबे के युवाओं में एक सकरात्मक ऊर्जा का संचार हो रहा है। इस तरह लगता है कि जम्मू कश्मीर में एक सुखद बदलाव रहा है। साथ ही उन्होंने कुपवाड़ा जैसे संवेदनशील सीमा क्षेत्र का दौरा किया, तो एक खास बैठक में पूरे सूबे की कानून व्यवस्था और प्रसिद्ध अमरनाथ यात्रा के हालात पर भी जानकारियां लीं। स्पष्ट है कि इस दौरे के हर पड़ाव पर सीमाओं की सुरक्षा के साथ राज्य के पर्यटन और वहां विकास से जुड़ी चिंताएं शामिल थीं। इन पर अमलीजामा के लिए जरूरी है कि राज्य के सभी वर्ग और संगठन एक सुर में वहां पहले शांति स्थापना की बात करें।

केंद्रीय गृहमंत्री के इस बार के जम्मूकश्मीर दौरे की एक खास बात यह भी है कि सूबे की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती पहले की अपेक्षा केंद्र के ज्यादा अनुकूल हुई हैं। इस सूबे में भारतीय जनता पार्टी ने पीडीपी के साथ मिलकर जब सरकार बनाई, तरहतरह की आशंकाएं जताई गईं थीं। अब ढेर सारे सवालों के साथ दोनों ही सरकारों में इस बात पर भी सहमति बनी है कि अलगाववादी सुर अलाप रहे नेताओं और उनके बहकावे में आये नवयुवकों के बीच किस कदर फर्क रखकर चलना है। फिर सीमा पार से और अंदर हो रही आतंकी घटनाओं से दोनों दलों की राज्य सरकार ने सख्ती से निपटने का फैसला भी किया है।

पिछले साल अगस्त और सितंबर में राजनाथ सिंह के ही राज्य दौरे के समय सीएम असहज दिख रही थीं। सितंबर की यात्रा के दौरान तो वह पत्रकारों के साथ बातचीत बीच में ही छोड़कर खड़ी हो गईं थीं, जबकि केंद्रीय गृहमंत्री कुछ पल बैठे रह गये थे। इस बार राजनाथ सिंह का दौरा शुरू होने के पहले ही महबूबा मुफ्ती ने साफ कर दिया कि चरमपंथियों के कारण केंद्र सरकार की तरफ से शांति की कोशिशों को नुकसान पहुंच सकता है। दरअसल, केंद्रीय गृहमंत्री ने साफ कर दिया था कि राज्य के हालात पर विचार के बाद ही सूबे में सुरक्षा बलों की ओर से गोली चलाने जैसी बड़ी कार्रवाई रोकने पर विचार किया जायेगा। ज्ञातव्य है कि रमजान के पवित्र महीने में केंद्र के निर्देश पर सुरक्षा बलों ने गोली चलाने से बचने का फैसला किया था। बात साफ हो चली है कि सूबे की मुखिया और वहां के विपक्षी दलों की ओर से सभी पक्षों के साथ बातचीत की मंशा को भी तभी बल मिल सकता है, जब वहां हिंसा थम जाय। इस बाबत वहां किस तरह के कदम उठाने हैं, केंद्र और राज्य सरकार के एक निश्चित फैसले से ही मुमकिन होगा। दौरे के दूसरे दिन गृहमंत्री सीमा क्षेत्र का हालात ले रहे थे और उम्मीद की जा रही थी कि वह कुछ फैसलों का एलान करेंगे। निश्चित ही लंबे समय बाद राज्य में फौरी कदमों पर दोनों सरकारों की सहमति नजर आयेगी। राजनाथ सिंह का राज्य के गुर्जर बकरवाल समुदाय के प्रतिनिधिमंडल से मिलना भी कुछ संकेत कर रहा है। उम्मीद बंधी है कि राज्य के कुछ दूसरे मूल निवासियों को भी उनका हक दिलाने के लिए कदम उठाए जा सकते हैं।

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