1952 से यही कहानी, जिसने जीता मेवाड़वागड़, उसने प्रदेश की कमान संभाली। जी हां, यही कारण है कि उपचुनावों में करारी हार के बाद जहां पूरे देश में भाजपा नेतृत्व खोई हुई जमीन को पुन: मजबूत करने में जुट गया है, वहीं राजस्थान में भी सूबे की मुखिया वसुंधरा राजे ने जनता के बीच सक्रिय हो गई हैं। इस बार भी उन्होंने शुरुआत मेवाड़वागड़ यानी दक्षिणी राजस्थान से की है। 28 मई से लगातार चार दिन बांसवाड़ा जिले की चारों विधानसभाओं का सघन दौरा और लगे हाथ पांचवां दिन और जोड़ते हुए पड़ोस के डूंगरपुर जिले के भी महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल बेणेश्वर धाम के दर्शन कर सीएम राजे ने एक तरह से एलान कर दिया कि दक्षिणी राजस्थान का यह हिस्सा सरकार और भाजपा के लिए महत्वपूर्ण है। यही कारण रहा कि बांसवाड़ा से ही उन्होंने फसली ऋण माफी योजना का आगाज किया जो राजस्थान के इतिहास की ऐसी पहली योजना है जिसमें सीधेसीधे किसान का 50 हजार का ऋण माफ कर दिया जा रहा है, जबकि पिछली सरकारों में यह राशि दसदस हजार रुपए तक ही सीमित रही थी।

मुख्यमंत्री राजे ने जय किसानजय राजस्थान के उद्घोष के साथ 31 मई को वागड़ की धरा से इस ऐतिहासिक योजना की शुरुआत की। इस योजना के तहत प्रदेश के 29 लाख 30 हजार किसानों के करीब साढ़े 8 हजार करोड़ रुपये के ऋण माफ किए जाएंगे। इसके साथ ही नए ऋण का पात्रता प्रमाण पत्र भी दिया जा रहा है। इस योजना में लघु एवं सीमान्त किसानों के 30 सितम्बर 2017 तक के ओवरड्यू ऋण पर बकाया ब्याज और पेनल्टी माफ करने के बाद शेष बचे ऋण में से 50 हजार तक का कर्जा माफ किया गया है। योजना में ऐसे किसानों का भी कर्जा माफ किया गया है जो लघु एवं सीमांत नहीं हैं और जिनकी भूमि 2 हेक्टेयर से ज्यादा है। ऐसे किसान का लघु किसान की जोत के अनुपात में 50 हजार रुपये तक ऋण माफ किया गया है। जो किसान ऋण चुकाने की स्थिति में नहीं हैं, उन्हें राहत देने के लिए एक स्थायी संस्था के रूप में कृषक ऋण राहत आयोग का गठन किया जा रहा है। ऋणधारक किसान इस आयोग के सामने अपना पक्ष रख सकेंगे जिस पर उसे मेरिट के आधार पर राहत मिल सकेगी।

मेवाड़-वागड़ यानी दक्षिणी राजस्थान में उदयपुर सहित राजसमंद, चित्तौड़गढ़, प्रतापगढ़, बांसवाड़ा और डूंगरपुर जिले आते हैं। इनमें प्रतापगढ़, बांसवाड़ा और डूंगरपुर जनजाति बहुल जिले हैं।

मुख्यमंत्री ने यह भी दावा किया कि प्रदेश में पहली बार समर्थन मूल्य पर 8 हजार 900 करोड़ रुपये की फसल खरीद की गई। मौजूदा सरकार अपने वर्तमान कार्यकाल में इस साल के अन्त तक किसानों को 80 हजार करोड़ रुपये का ब्याज मुक्त फसली ऋण वितरित कर देगी, जो देश में सर्वाधिक होगा। भूमि विकास बैंकों से किसानों को मिलने वाले ऋण की ब्याज दर भी 12 से घटाकर साढ़े पांच प्रतिशत की गई है। सीएम राजे ने इन क्षेत्रों में जनसंवाद को भी पूरी तरह जनता पर फोकस वाला रखा।

द.राजस्थान का चुनावी गणित

मेवाड़वागड़ यानी दक्षिणी राजस्थान में उदयपुर सहित राजसमंद, चित्तौड़गढ़, प्रतापगढ़, बांसवाड़ा और डूंगरपुर जिले आते हैं। इनमें प्रतापगढ़, बांसवाड़ा और डूंगरपुर जनजाति बहुल जिले हैं। उदयपुर में 8, राजसमंद में 4, बांसवाड़ा में 6, प्रतापगढ़ में 2, डूंगरपुर में 3, चित्तौड़गढ़ में 5 विधानसभा क्षेत्र हैं। इनमें प्रतापगढ़, डूंगरपुर, बांसवाड़ा की सभी 11 उदयपुर की 5 सीटें एसटी के लिए और चित्तौड़गढ़ की एक सीट एससी की है। सीधा सा गणित है कि मेवाड़वागड़ के कुल 28 विधानसभा क्षेत्रों में से 16 विधानसभा क्षेत्र जनजाति वर्ग का प्रतिनिधित्व करते हैं। और सन1952 से अब तक के चुनावों के परिणाम यही कहानी कहते हैं कि जिस पार्टी ने यहां का दिल जीता, उसी की पार्टी की सरकार राजस्थान में बनी।

पिछले विधानसभा चुनाव में उदयपुर से भाजपा ने इन 28 सीटों में से बम्पर 25 पर कब्जा जमाया था। शेष तीन में से झाड़ोल और बागीदौरा में कांग्रेस जीती। तीसरी सीट वल्लभनगर में जनता सेना जीती थी। जनता सेना भी भाजपा से ही टूटे लोगों का दल होने से उसे भी भाजपा का मान लिया जाए तो उदयपुर संभाग में 26 सीटें भाजपा के समर्थन में रही। शायद यही वजह है कि इस बार भी मुख्यमंत्री राजे इस क्षेत्र को महत्वपूर्ण मान रही है। खासतौर से जनजाति वर्ग को साथ जोड़ने और उनको महत्व देकर यह दर्शाना भी लक्ष्य है कि राजस्थान की सरकार हर वर्ग के विकास के प्रति समर्पित है। इसके पीछे कारण भी है कि बांसवाड़ाडूंगरपुर सबसे पिछड़े क्षेत्रों में माने जाते हैं और बांसवाड़ा ने आज तक रेल नहीं देखी।  

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