भारत में राजनीति करने के मानक बदल रहे हैं। जाति, धर्म एवं रंगरूप से ऊपर, विकास के मुद्दे प्रबल होते हुए दिख रहे हैं। ऐसा पहली बार हो रहा है कि सरकार अपनी योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर इतनी सजग एवं सतर्क है। सरकार के सभी मंत्री अपने मंत्रालय के रिपोर्टकार्ड के साथ आमजन के बीच में हैं। खुद देश के प्रधानमंत्री अपनी योजनाओं का जायजा लेने के लिए मैदान में डटे हैं। इसी कड़ी में पिछले 7 जून, 2018 को प्रधानमंत्री ने वीडियो के माध्यम से सेहत की बात पीएम के साथ कार्यक्रम के अंतर्गत उन लोगों से बातचीत की जिन्हें सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं से लाभ हुआ है। सरकार के इस पहल को अंतिम जन तक पहुंचने की सार्थक कोशिश कहा जा सकता है।

सिर्फ स्वास्थ्य के मुद्दे पर लाभान्वितों से देश का प्रधानमंत्री बात करे, ऐसा शायद पहली बार हुआ है। तकरीबन 47 मिनट तक दिए अपने संबोधन एवं बातचीत में प्रधानमंत्री ने उन सभी पहलों का जिक्र किया, जिसे उनकी सरकार ने पिछले 48 महीनों में लागू किया है। स्वच्छ भारत अभियान, पोषण अभियान, इन्द्रधनुष अभियान, आयुष्मान भारत, प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना, मेडिकल सीटों की बढ़ोत्तरी, एम्स का निर्माण, अंतरराष्ट्रीय योगा दिवस, आयुष को बढ़ावा देने जैसी बातों से लेकर दवाइयों की कीमतों में हुई कमी पर उन्होंने अपनी बात रखी।

7 जून, 2018 को प्रधानमंत्री ने वीडियो के माध्यम से ‘सेहत की बात पीएम के साथ’ कार्यक्रम के अंतर्गत उन लोगों से बातचीत की जिन्हें सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं से लाभ हुआ है।

सरकारी तंत्र स्वास्थ्य के मसले पर कितना गंभीर है। इसका उदाहरण उस समय देखने को मिला जब जनऔषधि केन्द्रों की संख्या 5,000 की वकालत प्रधानमंत्री ने की। और ठीक एक घंटे बाद रसायन एवं उर्वरक राज्य मंत्री मनसुख भाई मांडविया ने ट्वीट करके यह सूचना दी कि प्रधानमंत्री के सपने को रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय जल्द पूर्ण करेगा। इस बीच नया ट्रेंड यह भी देखने को मिल रहा है कि स्वास्थ्य संबंधी प्रधानमंत्री की बातों को सरकार के सभी मंत्री प्रमुखता से अपने ट्वीटर हैंडल से साझा कर रहे हैं। इसे एक अच्छी परिपाटी कही जा सकती है। इससे लोगों तक सरकारी योजनाओं की जानकारी पहुंचाने में बहुत मदद मिलेगी। जानकारों की माने तो पहले की सरकार अपनी योजनाओं को लेकर इस स्तर तक मिशन मोड में कभी नहीं रहती थी। देश के जानेमाने न्यूरो सर्जन डॉ. मनीष को लगता है कि स्वास्थ्य को लेकर इतनी बातें इसके पूर्व कभी नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि सरकार योजनाओं का लाभ अंतिम जन तक पहुंचना चाहती है, यह एक शुभ संकेत है।

वीडियो के माध्यम से प्रधानमंत्री ने झारखंड के रामगढ़ के रहने वाले जनऔषधि संचालक फार्मासिस्ट अंजन प्रकाश से लंबी बातचीत की। वहीं जयपुर, राजस्थान में रहने वाली हैदराबाद की माला ने जेनरिक दवा से हुए फायदों के बारे में पीएम को बताया। अंजन प्रकाश ने बताया कि किस तरह उन्होंने गरीब लोगों की सेवा करने के लिए नौकरी छोड़कर प्रधानमंत्री जनऔषधि केन्द्र खोला। इस केन्द्र को खोलने के लिए 7 दिनों में उन्हें लाइसेंस मिल गया। निश्चित रूप से फार्मासिस्ट अंजन के इस प्रयास से देश के लाखों बेरोजगार फार्मासिस्टों को यह संदेश जरूर जायेगा कि वे चाहे तो जनऔषधि केन्द्र खोलकर एक नया स्टार्टअप शुरू कर सकते हैं। अलीगंज, लखनऊ के विरवान सिंह ने स्टेंट के दाम कम होने के फायदे की बात बताई। आंध्र प्रदेश के विजय बाबू ने डायलेसिस से हुए फायदे के बारे में बोले, तो वही अलवर, राजस्थान की लक्ष्मी देवी ने घुटना प्रत्यारोपण में हुई बचत के बारे में प्रधानमंत्री से अपने अनुभव साझा किये। गौरतलब है कि सरकार की प्रधानमंत्री जनऔषधि परियोजना के तहत अभी तक देश में 3,600 से ज्यादा केन्द्र खुल चुके हैं। इन केन्द्रों पर मिलने वाली जेनरिक दवाइयों की संख्या भी बढ़कर 700 पहुंच चुकी है। सर्जिकल उत्पाद भी यहां मिलने लगे हैं।

हाल ही में पर्यावरण दिवस की पूर्व संध्या पर केन्द्रीय रसायन एवं उर्वरक राज्य मंत्री मनसुख भाई मांडविया ने बेटियों को जनऔषधि सुविधा के रूप में नई सौगात दी। जनऔषधि सुविधा नाम से आॅक्सोबायोडिग्रेडेबल सैनिटरी नैपकिन की विशेषता को बताते हुए रसायन मंत्री ने कहा कि यह सैनिटरी पैड पर्यावरण को प्रदूषित नहीं करेगा। पर्यावरण के अनुकूल इसे बनाया गया है। मिट्टी में यह आसानी से घुलमिल जायेगा। इस अवसर पर रसायन एवं उर्वरक राज्य मंत्री ने बालिकाओं एवं महिलाओं को जनऔषधि सुविधा सैनिटरी पैड गिफ्ट किया। किसी मंत्री द्वारा महिला स्वास्थ्य के प्रति इस तरह कि पहल भी पहली बार ही देखने को मिली। बालिकाओं को सैनिटरी पैड गिफ्ट करने की पहल सरकार की सही सोच एवं मिशन मोड को दर्शाता है।

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