केन्द्रापाड़ा  से सांसद बैजयंत पंडा जो दिल्ली की मीडिया में जय पांडा के नाम से जाने जाते हैं। उन्होंने अंतत: बीजू जनता दल प्राथमिक सदस्यता से त्यागपत्र दे दिया है। इसके साथ ही कुछ माह से उनके बीजद के बीच चल रहे खींचतान का पटाक्षेप हो गया है। पिछले कुछ माह से बैजयंत पंडा राज्य सरकार के बीच विवाद कुछ ज्यादा ही बढ़ गया था। बैजयंत पंडा ने कभी भी पार्टी के मुखिया तथा मुख्यमंत्री नवीन पटनायक को निशाना नहीं बनाया बल्कि हमेशा से ही मुख्यमंत्री कार्यालय के अधिकारी को ही नाम लेकर निशाना बनाते थे। लेकिन इस बार जब उनके पिता तथा ओडिशा के प्रतिष्ठित उद्योगपति बंशीधर पंडा का निधन हुआ उस समय तो मुख्यमंत्री उनके अंतिम दर्शन करने के लिए आये  और ही बीजद का एक भी नेता उनका अंतिम दर्शन करने के लिए आया। इसके बाद बैजयंत पंडा ने बीजद के मुखिया तथा मुख्यमंत्री को पत्र लिख कर पार्टी छोड़ने की घोषणा की। यहां यह उल्लेख करना आवश्यक है कि बंशीधर पंडा का नवीन पटनायक के पिता बीजू पटनायक के साथ पारिवारिक गहरे संबंध थे।

मुख्यमंत्री को लिखे अपने त्यागपत्र में पंडा ने कहा कि उनके पिता बीजू पटनायक के संबंधों को सभी जानते हैं। इसके बावजूद उनके अंतिम दर्शन के लिए आपका आना या फिर पार्टी के किसी नेता का आना अमानवता है। साथ ही उन्होंने यह भी लिखा है कि बीजद के उनके कुछ मित्रों ने उन्हें बताया कि उन्हें बंशीधर पंडा के अंतिम दर्शन करने जाने के लिए मना किया गया था। पंडा ने अपने पत्र में इस बात का भी उल्लेख किया है कि गत चार वर्षों में बीजद में उनकी स्थिति खराब से और खराब होती जा रही थी। उन्हें यह अनुभव हो रहा था कि बीजद उन्हें नहीं चाह रही है। इससे उनके आत्मसम्मान पर धक्का लगा है। इसलिए इस तरह की संकीर्ण परिवेश  में वह आत्मसम्मान की बलि नहीं चढ़ाना चाहते थे और उन्होंने पार्टी से त्यागपत्र देना उचित समझा।

उनके पारिवारिक संबंध होने के बाद भी अंतिम दर्शन करने पर मीडिया सोशल मीडिया में मुख्यमंत्री नवीन पटनायक की काफी आलोचना हुई। बैजंयत पंडा ने अपने ट्विटर फेसबुक हैंडल पर उनके परिवार नवीन पटनायक के परिवार के संयुक्त फोटो डाल कर यह बताने का प्रयास किया कि उनके परिवार के बीजू पटनायक के साथ कितने गहरे संबंध थे। बैजयंत पंडा ने कहा कि  बीजद से त्यागपत्र देने से पहले लगातार उनके खिलाफ साजिश रची गई तथा उन्हें परेशान किया गया। केन्द्रापड़ा संसदीय क्षेत्र में उनके सांसद निधि से किये गये विकास कार्यों के उदघाटन करते समय उन्हें  अनेक बार परेशान किया गया।

केवल इतना ही नहीं उनके परिवार के स्वामित्व वाले कंपनी इम्फा ग्रुप में श्रमिक आंदोलन करवाये गये। पुलिस की उपस्थिति में बाहरी लोग हथियार लेकर आंदोलन स्थल पर बैठते देखा गया। लेकिन पुलिस ने कुछ नहीं किया। पंडा ने यह भी आरोप लगाया कि यह आंदोलन श्रमिकों का आंदोलन नहीं है बल्कि बाहरी लोगों द्वारा इम्फा ग्रुप को परेशान करने के लिए आंदोलन है। पंडा के परिवार के स्वामित्व वाली कंपनी ओरटेल के विभिन्न शहरों में कार्यालयों को सील किया गया। जब कोई  सरकार किसी के पीछे पड़ती है तो जो होता है वह सब बैजयंत पंडा के साथ हुआ। लेकिन उनके पिता के निधन पर जब बीजद से कोई नहीं आया तो उन्होंने पार्टी को अलबिदा कह दिया।

बैजयंत पंडा  अब आगे क्या करेंगे इसका कोई स्पष्ट संकेत अभी तक नहीं दिया है लेकिन भाजपा के वरिष्ठ नेता तथा केन्द्रीय मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने कहा है कि प्रधानमंत्री मोदी के समर्थन करने वाले किसी भी अच्छे व्यक्ति का पार्टी स्वागत करेगी। बैजयंत पंडा भी समयसमय पर सोशल मीडिया अखबारों में लेख लिख कर प्रधानमंत्री मोदी की प्रशंसा करते रहे हैं। इसलिए संभावना अधिक है कि वह भाजपा में शामिल हो सकते हैं।

कोई जवाब दें

Please enter your comment!
Please enter your name here