पिछले कुछ वर्षों में स्वास्थ्य के क्षेत्र में सरकार द्वारा उठाये गए कदमों का असर अब दिखने लगा है। इस तथ्य की जानकारी अभी हाल में जारी नमूना पंजीकरण प्रणाली (एसआरएस) से मिलती है। रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2011-2013 में प्रसव के दौरान मातृमृत्यु दर (एमएमआर) 167 थी। जो वर्ष 2014-2016 के दौरान घटकर130 हो गई है। इस तरह मातृ मृत्यु में 2013 से लगभग 22 प्रतिशत की रिकॉर्ड गिरावट दर्ज की गई। यह गिरावट इंपावर्ड एक्शन ग्रुप राज्यों जैसेबिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और असम में भी देखी गई।  जहां यह आंकड़ा 246 से घटकर 188 तक गया। जो कि महत्वपूर्ण है। वहीं उत्तर प्रदेश में 30 फीसदी की कमी के साथ राज्यों की रैकिंग में सबसे ऊपर है। रिपोर्ट के अनुसार दक्षिणी राज्यों में यह 93 से घटकर 77 रह गई। इस प्रकार वर्ष 2013 की तुलना में वर्ष 2016 में प्रसव के समय मां की मुत्यु के मामलों में करीब 12 हजार की कमी आई है। और मातृ मृत्यु दर का कुल आंकड़ा पहली बार घटकर 32 हजार पर गया। गौरतलब है कि मातृमृत्यु दर को 100,000 जीवित जन्मों की मातृ मृत्यु की संख्या के रूप में परिभाषित किया जाता है।

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