Cricket - Women's Cricket World Cup Final Preview - India Nets & Press Conference - London, Britain - July 22, 2017 India's Mithali Raj during the press conference Action Images via Reuters/John Sibley

खेल एक ही है। कप्तान दो हैं। एक की उपलब्धियां विराट हैं। दूसरे का खेल पर राज है। बस अंतर पुरुष और महिला खिलाड़ी होने का है। क्या महज लैंगिक अंतर के नाते दूसरी के साथ भेदभाव हो सकता है? इस तुलनात्मक टिप्पणी का आशय भारतीय क्रिकेट की पुरुष और महिला टीमों के कप्तान विराट कोहली व मिताली राज के बीच कोई लकीर खींचना नहीं है। मकसद उस पितृ-सत्तात्मक सोच को उजागर करना है, जो समाज के दीगर क्षेत्रों की तरह ही खेलों के प्रति भी नजर आती है।

इसकी एक नजीर गत दिनों टी-20 महिला एशिया कप के दौरान देखने को मिली। मलेशिया की राजधानी कुआलालंपुर में टीम इंडिया और श्रीलंका के मध्य खेले गए मैच में मिताली राज टी-20 अंतरराष्ट्रीय मैचों में 2,000 रन बनाने वाली पहली भारतीय बल्लेबाज बन गईं। दिलचस्प बात यह है कि भारतीय पुरुष क्रिकेटरों में भी अब तक कोई ये कारनामा अंजाम नहीं दे सका है। टी-20 मैचों में विरोट कोहली 1,983, रोहित शर्मा 1,852 और सुरेश रैना 1,499 रनों के साथ उनसे पीछे हैं।

महिला क्रिकेटरों के खेल को वह लोकप्रियता हासिल नहीं है, जो पुरुष खिलाड़ियों के पास है। यह दर्शकों की पसंद मानकर नजरअंदाज किया जा सकता है।

इतना बड़ा कीर्तिमान हासिल करने के बावजूद मिताली राज को वह सुर्खियां नसीब नहीं हो सकीं, जिसकी वे हकदार थीं। धर्म की तरह लोगों की रगों में दौड़ने वाले क्रिकेट प्रेमी बताएं कि क्या वो वाकई मिताली के इस रिकॉर्ड से बाखबर हैं? जाहिर है बेखबर लोगों की संख्या ज्यादा है।

टी-20 में 2,000 रन के आंकड़े को छूने वाली मिताली विश्व की सातवीं महिला क्रिकेटर हैं। इंग्लैण्ड की पूर्व कप्तान सी. एडवर्ड (2,605 रन), वेस्टइंडीज की कप्तान स्टैफिनी टेलर (2,582 रन) और न्यूजीलैण्ड की कप्तान सूजी बेट्स (2,582 रन) जैसी सरीखी खिलाड़ी उनसे आगे हैं। इसके बावजूद मिताली राज की उपलब्धि कम नहीं होती है।

असल में मिताली राज की झोली में इस तरह के कई और रिकॉर्ड हैं। मसलन अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सर्वाधिक रन बनाने का रिकॉर्ड भी उन्हीं के खाते में दर्ज है। एक दिवसीय मैचों में 6,000 रनों का आंकड़ा पार करने वाली वह विश्व की पहली महिला क्रिकेटर हैं। उन्होंने सबसे अधिक वनडे मैच (194) खेले हैं, तो स्कोर के मामले में भी 6,373 रनों के साथ दीगर खिलाड़ियों के मुकाबले काफी आगे हैं। एकदिवसीय मैचों में सर्वाधिक हॉफ सेंचुरी और लगातार सात अर्ध शतक ठोकने का रिकॉर्ड भी उनके पास है। लेकिन सचिन तेंदुलकर को क्रिकेट का भगवान कहने वाले भारतीय क्रिकेट प्रेमी अब क्रिकेट की इस देवी की उपेक्षा करते रहे हैं।

हरमनप्रीत कौर के नेतृत्व में टीम इंडिया टी-20 महिला एशिया कप अपनी पड़ोसी बांग्लादेशी सखियों से भले हार गई, लेकिन अलबत्ता इस दौरान भारतीय महिला टीम ने कई कीर्तिमान अपने नाम किए। टीम की सीनियर खिलाड़ी झूलन गोस्वामी 67 टी-20 मैचों में सर्वाधिक 56 विकेट लेने वाली पहली भारतीय गेंदबाज बन गई हैं। इस सूची में टीम इंडिया के स्पिनर आर. अश्विन 52 विकटों के साथ दूसरे स्थान पर हैं। गौरतलब है कि झूलन 200 वनडे विकेट चटकाने वाली विश्व की अकेली महिला क्रिकेटर हैं। मगर महिला क्रिकेटरों के इन कीर्तिमानों का शायद ही किसी को इल्म हो।

तमाम विपरीत परिस्थितियों के बावजूद जब महिला वर्ल्ड कप 2017 के फाइनल में भारतीय टीम पहुंचने में कामयाब रही तब लोगों की आंखें खुलीं। तभी स्मृति मंधाना, हरमनप्रीत कौर और पूनम राउत जैसी खिलाड़ी लड़कियों की रोल मॉडल बन गईं। हालांकि इसके बाद भी महिला क्रिकेटरों की उपेक्षा का दौर खत्म नहीं हुआ है। किसको परवाह है कि विश्व कप के बाद सात माह तक भारतीय महिला टीम ने कोई अंतरराष्ट्रीय मैच नहीं खेला? महिला आईपीएल की चर्चा जोरों पर होने के बावजूद आखिर ये मूर्त रूप क्यों नहीं ले सका?  

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के स्तर पर भी यही दोहरा रवैया देखने को मिलता है। उसके नए कान्ट्रैक्ट में महिला एवं पुरुष क्रिकेटरों के मानदेय में कई गुणा वृद्धि के बावजूद दोनों वर्गों में लंबा अंतर है। नए ग्रेड के अनुसार पुरुष खिलाड़ियों के लिए 7, 5, 3 और 1 करोड़ रुपये सालाना तय किए गए हैं, जबकि इसकी तुलना में महिला क्रिकेटरों का 50, 30 और 10 लाख का ग्रेड ही तय किया गया है। इन उपेक्षाओं के बावजूद महिला क्रिकेटर अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर रही हैं। इसी लगन और मेहनत से वो देर-सबेर अपना हक लेकर रहेंगी।

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