फुटबॉल के मैदान पर दस नम्बरियों ने सफलता की जो इबारत लिखी है, वह अपने आप में नायाब मिसाल है। ये दस नम्बरी अपने प्रतिद्वंद्वियों के ख्वाबों को रौंदते आए है। फुटबाल के मैदान पर किसी भी खिलाड़ी को अपनी टीम में जर्सी नम्बर दस मिलना उसे अपनी टीम के सर्वोच्च स्टार खिलाड़ी होने का गौरव तो प्रदान करता है, वहीं प्रतिपक्षी टीमों के लिए ह्यदस नम्बरीह्य सदैव खतरे की घंटी साबित होते आए है। फुटबॉल जगत में ‘दस’ का अंक जादुई है। आलमी फुटबाल में ‘दस’ के दम पर कई खिलाड़ियों ने महारत और महानता के अध्याय रचे है। फीफा विश्व कप और फुटबाल की दुनियां के शीर्ष मुकाबलों में दस नम्बरियों की तूती बोलती रही है। विश्व कप में मैदान पर आकर्षण, रोमांच और श्रेष्ठतम प्रदर्शन का ताना बाना बुनकर अपनी टीमों को विजयी बनाने में ‘दस नम्बर’ की जर्सी वाले खिलाड़ियों का विशेष रोल रहा है। फुटबॉल के खेल में दर्शकों को अपने चहेते खिलाड़ियों को पहचानने में आसानी हो, इसी उद्देश्य से खिलाड़ियों की जर्सी पर नम्बर अंकित करने की परम्परा की शुरुआत की गई जो अब एक सदी से भी अधिक पुरानी हो चुकी है। इस परम्परा से रैफरीज को भी खिलाड़ियों को पहचान कर खेल पर नियंत्रण रखने में सहूलियत होने लगी। मगर उस समय किसी नम्बर या अंक विशेष का कोई खास महत्त्व नहीं था, अंक मात्र पहचान के प्रतीक ही थे। मगर विश्व फुटबॉल के पितामह कहे जाने वाले सर्वकालिक श्रेष्ठ ब्राजीलियन स्टार पेले ने जब दस नम्बरी जर्सी का वरण कर सफलता का अमर इतिहास मैदान पर लिखा तो यह नम्बर एक तरह से फुटबॉल में श्रेष्ठता का पर्याय बन गया। हकीकत में दस नम्बर की जर्सी को पेले ने ही अपनी लोकप्रियता से मशहूर किया, इसके बाद फुटबॉल सहित दीगर खेलों में जहां कहीं भी नम्बर कोड लागू है, दस नम्बर की जर्सी को पहनने वाले खिलाड़ियों को महानता का दर्जा प्राप्त होता रहा है। भारतीय क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर ने दस नम्बर की जर्सी पहनकर खेल की शान में चार चांद लगाए और भारतीय क्रिकेट को अपने प्रदर्शन से इतनी बुलंदिया प्रदान की कि उनकी निवृति के बाद दस नम्बर की जर्सी को ही उनके साथ रिटायर कर दिया गया। फुटबॉल में अलग-अलग देशों के खिलाड़ियों ने दस नम्बर की जर्सी पहनकर अपने पैरों के जादू से दुनियांभर के प्रशंसकों का दिल जीता है, बावजूद इसके दस नम्बरी जादूगर के रूप में पेले का अमिट छाप छोड़ने वाला प्रदर्शन और उनकी शख्सियत का कमाल आज भी सबसे जुदा और अक्षुण्ण है। यह पेले के महान प्रदर्शन की ही देन है कि आज फुटबॉल के मैदान पर दुनियां में कहीं भी मैदान पर कदम रखने वाला छोटे से छोटा खिलाड़ी यही ख्वाहिश रखता है कि भविष्य में जब वह अपने देश की टीम का हिस्सा बने तो दस नम्बर की जर्सी पहनने का श्रेय उसे ही हासिल हो, दरअसल पेले ने 10 नम्बर को व्यक्तिगत श्रेष्ठता के पैमाने के रूप में स्थापित किया है, इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता।

फुटबॉल के खेल में दर्शकों को अपने चहेते खिलाड़ियों को पहचानने में आसानी हो, इसी उद्देश्य से खिलाड़ियों की जर्सी पर नम्बर अंकित करने की परम्परा की शुरुआत की गई जो अब एक सदी से भी अधिक पुरानी हो चुकी है।

फुटबॉल में जब ड्रेस कोड का आगाज हुआ था, तो आरम्भ में डिफेंडर ही दस नम्बर की जर्सी धारण करते थे, मगर यह बड़ी दिलचस्प दास्तान है कि जब ब्राजील की ओर से पेले ने दस नम्बर की जर्सी पहनी तो उसकी टीम रक्षात्मक शैली को छोड़कर आक्रामक पद्धति को अपनाने लगी और इसके तहत दस नम्बरी पेले को प्रमुख स्ट्राइकर की भूमिका सुपर्द की गई। पेले ने अपने अद्वितीय कौशल के दम पर केवल प्रतिद्वंद्वी टीमों पर दनादन गोलों की झड़ी लगाना ही आरम्भ नहीं किया बल्कि ‘स्ट्राइकर’ के रूप में खेलते हुए भी मिडफील्ड में रक्षण में भी दबदबा बनाया। पेले के बाद पुर्तगाल के यूसेबियो, ब्राजील के ही श्वेत पेले कहे जाने वाले जीको, इटली के सर्जियो बैजियो, इंग्लैंड के गैरी लिनेकर, अर्जेंटीना के डिएगो मैराडोना, हालैंड के रूड गुलिट, जर्मनी के लोथार मैथ्यूज, कोलंबिया के वाल्देरामा, बेल्जियम के एंजो शिफो, रोमानिया के जॉर्ज हांगी, रूस के इगोर पोतार्सोव से लेकर नए दौर में ब्राजील के ही रिवाल्डो, रोनाल्डिनहो व नेमार जूनियर, अर्जेंटीना के डेनियल ओरतेगा एवं लियोनल मैसी सहित कई खिलाड़ियों ने दस नम्बर की जर्सी पहनकर फुटबॉल के मैदान पर अपने पैरों से जादू बिखेरा है। इन खिलाड़ियों ने पेले के नक्शे कदम चलते हुए खेल में अपनी अलग पहचान अवश्य बनाई है, मगर यह कहना होगा कि कई आए और कई गए पर पेले की छवि को भुलाकर या फिर यूं कहे कि उनसे एक कदम आगे जाकर अपनी मुकम्मल हैसियत बनाने का एजाज किसी को नहीं मिल पाया है। जब भी कोई नया दस नम्बरी आता है और श्रेष्ठता के पायदान तय करने लगता है तो उसके बढ़ते कदमों को मापने का पैमाना पेले द्वारा अंकित किए गए महानता के अक्स ही होते हैं।

पेले के समकक्ष पहुंचने की योग्यता अगर किसी दस नम्बरी खिलाड़ी ने फुटबॉल के मैदान पर दिखाई है तो उनमें अर्जेंटीना के डिएगो मैराडोना का नाम सबसे ऊपर रखा जा सकता है। मैराडोना ने अपने व्यक्तिगत कौशल के दम पर 1986 में मैक्सिको विश्व कप में अर्जेंटीना को सफलता के सातवें आसमान पर पहुंचा दिया। इटली में 1990 के विश्व कप में एक बार फिर मैराडोना के नेतृत्व में अर्जेंटीना फाइनल में पहुंचा, मगर यह मैराडोना और अर्जेंटीना की बदकिस्मती थी कि वे एक कड़े मुकाबले में जर्मनी से हार गए। इसके बाद एक बार फिर 1994 के विश्व कप के फाइनल दौर में अर्जेंटीना को पहुंचाने में इस बेमिसाल स्ट्राइकर ने अहम भूमिका निभाई। मगर वहां पर में स्पर्धा नशीली दवाइयों के सेवन का दोषी करार दिए जाने के मैराडोना भारतीय समाज के परिप्रेक्ष्य वाले असली दस नम्बरी बन गए। इस प्रकार उन्होंने दस नम्बर की जर्सी को भी कलंकित किया। फ्रांस की टीम जब 1998 में सिरमौर बनी तो दस नम्बर की जर्सी पहने जिनेडाईन जिडान ने उस खिताबी जीत में अहम भूमिका निभाई थी। कोरिया और जापान की संयुक्त मेजबानी में 2002 के विश्व कप में जब ब्राजील ने सर्वाधिक पांच खिताब जीतने का नया रिकॉर्ड बनाया तो इस जीत में 10 नम्बरी रोनाल्डिनहो ने सबसे अधिक 8 गोल स्कोर कर अपनी धाक जमाई। जर्मनी की मेजबानी में 2006 के विश्व कप में इटली की टीम चौथी बार विजेता बनने में कामयाब हुई, लेकिन बेस्ट प्लेयर होने का एजाज फ्रांस के दस नम्बरी जिडान को मिला। दक्षिण अफ्रीका में 2010 के विश्व कप में स्पेन ने पहली बार खिताब जीता तो वहां सर्वाधिक गोल स्कोर करने वाले चार शीर्ष खिलाड़ियों में उरूग्वे के दस नम्बरी डियेगो फॉरलेन कोरैजो एवं हालैंड की ओर से दस नम्बरी की जर्सी में उतरे वैसले स्नाइडर भी शामिल रहे, जिन्होंने 5-5 गोल स्कोर किए। ब्राजील की मेजबाजी में 2014 में गत फीफा विश्व कप में जर्मनी ने चौथी बार खिताब जीता तो यहां पर दस नम्बर की जर्सी में कोलंबिया के जेम्स डेविड रोड्रिग्ज 6 गोलों के साथ टॉप स्कोरर थे। वहीं जर्मनी के हाथो फाइनल मुकाबला हारे अर्जेंटीना के दस नम्बरी मैसी को इस विश्व कप का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी घोषित किया गया था।

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