समें कोई शक-सुबहा नहीं है कि फिल्मों के मामले में आॅस्कर दुनिया का सबसे सम्मानित पुरस्कार है। इसका मुख्य कारण यह है कि हॉलीवुड फिल्म उद्योग और वहां बनने वाली फिल्में सभी देशों में जाती हैं। फिल्में विषय, तकनीक, कला एवं शिल्प के लिहाज से बेहतर होती हैं। इन वजहों से बजट और कमाई के साथ उनके असर का दायरा भी बहुत बड़ा है। आॅस्कर पुरस्कारों की एक खासियत यह भी है कि उन्हें सिनेमा से जुड़े लोग ही तय करते हैं, न कि कोई सरकार या सीमित सदस्यतावाली संस्था। ये पुरस्कार एकेडमी आॅफ मोशन पिक्चर आर्ट्स एंड साइंसेज द्वारा दिए जाते हैं।

इस बार आॅस्कर एकेडमी की सदस्यता के लिए 59 देशों के सिनेमा से जुड़े नौ सौ से अधिक नामचीन लोगों को आमंत्रण दिया गया। इस आमंत्रण में यह कवायद सभी क्षेत्रों और समुदायों से जुड़े लोगों को उचित प्रतिनिधित्व देने के लिए किया गया है।

इस साल एकेडमी ने भारतीय सिनेमा से जुड़ीं 20 हस्तियों को सदस्यता का निवेदन भेजा है। इनमें सौमित्र चटर्जी, शाहरुख खान, माधुरी दीक्षित, नसीरुद्दीन शाह, अनिल कपूर, गुनीत मोंगा, तब्बू, आदित्य चोपड़ा, अली फजल, देबाजीत चंगमई, स्नेहा खानवलकर, उषा खन्ना, बल्लू सलूजा, मनीष मल्होत्रा, डॉली अहलूवालिया, बिश्वदीप चटर्जी, अनिल मेहता, माधबी मुखर्जी, सुब्रत चक्रबर्ती, और अमित रे शामिल हैं। ये सभी अभिनय, निर्देशन, फोटोग्राफी, डिजाइन, एडिटिंग आदि विधाओं से संबद्ध हैं। पिछले साल आॅस्कर एकेडमी ने मुंबई फिल्म जगत से अमिताभ बच्चन, आमिर खान, सलमान खान, ऐश्वर्या राय, दीपिका पादुकोण, प्रियंका चोपड़ा और इरफान खान को सदस्यता के लिए आमंत्रित किया था। उस सूची में बांग्ला सिनेमा के दिग्गज निर्देशक गौतम घोष और बुद्धदेब दासगुप्ता का नाम भी था।   

रिपोर्टों की मानें, तो दुनिया के 59 देशों के सिनेमा से जुड़े 928 नामचीन लोगों को यह आमंत्रण भेजा गया है। इस साल जिन लोगों को आमंत्रित किया गया है, उनमें 17 आॅस्कर विजेता हैं और 92 आॅस्कर पुरस्कारों के लिए नामांकित हो चुके हैं। यह कोशिश एकेडमी में अंतरराष्ट्रीय फिल्मकारों की तादाद बढ़ाने के साथ महिलाओं और विभिन्न समुदायों को ज्यादा प्रतिनिधित्व देने के इरादे से की जा रही हैं, जहां अभी भी अमेरिकी और यूरोपीय मूल के लोगों का बहुमत है।

आमंत्रण की सूची में 49 फीसदी महिलाएं हैं। अगर इन सभी ने इसे स्वीकार करते हुए एकेडमी की सदस्यता ले ली, तो संस्था में उनका प्रतिनिधित्व 28 से 31 फीसदी हो जायेगा। आमंत्रितों में 38 फीसदी अश्वेत हैं और सभी द्वारा मंजूरी मिल जाने से इस श्रेणी में सदस्यों की संख्या 13 से 16 फीसदी हो जायेगी। इस संबंध में यह तथ्य भी दिलचस्प है कि आमंत्रित लोगों में अभिनेत्री क्वेंझाने वालिस भी शामिल हैं, जिनकी आयु मात्र 14 साल है। छियासी साल की संगीतकार सोफिया गुबैदुलिना सबसे अधिक उम्र की हैं।

बीते कुछ सालों से एकेडमी ने सदस्यों में विविधता और व्यापकता लाने के लिए अधिक आमंत्रण भेजने की नीति अपनायी है। पिछले साल नयी सदस्यता के लिए 774 लोगों से आग्रह किया गया था। साल 2015 और 2016 क्रमश: 322 और 683 निमंत्रण भेजे गये थे। इस साल सबसे अधिक बुलावा अभिनेता-अभिनेत्रियों को दिया गया है। इस श्रेणी में 168 नये सदस्यों से आग्रह किया गया है। इनमें से कुछ नाम सिनेमा के बजाय रंगमंच और टेलीविजन के अपने काम के लिए ज्यादा ख्यात हैं। दस ऐसे भी नाम हैं जिन्हें एक से अधिक विभागों ने बुलाया है। उल्लेखनीय है कि आॅस्कर पुरस्कारों की हर श्रेणी को तय करने का जिम्मा अलग-अलग समूहों का होता है। अब यह आमंत्रित व्यक्तियों पर निर्भर करता है कि वे किस समूह से जुड़ना चाहते हैं। फिलहाल एकेडमी की 17 ऐसी शाखाएं हैं।

एकेडमी के रवैये में आये अंतर के पीछे 2014 में 86वें आॅस्कर पुरस्कारों के दौरान हुए विवाद की बड़ी भूमिका है। उस समय पुरस्कारों के लिए नामित लोगों में अश्वेतों की बहुत कम संख्या होने के कारण आॅस्कर को श्वेत वर्चस्व की जगह बताते हुए इसके बहिष्कार का अभियान चला था। अगले साल भी हालात नहीं सुधरने पर बवाल मचा। यह अकारण नहीं था। साल 2016 के शुरू में मतदान का अधिकार रखने वाले 6,241 सदस्यों में करीब 92 फीसदी श्वेत और 75 फीसदी पुरुष थे। एकेडमी के तत्कालीन अध्यक्ष चेरील बून आइजाक्स ने बोर्ड की सहमति से तब यह संकल्प लिया था कि संस्था में 2020 तक महिलाओं और विभिन्न समुदायों के सदस्यों की संख्या दुगुनी कर दी जायेगी। तब से ज्यादा आमंत्रण भेजे जाने लगे हैं।  

ग्लोबल दुनिया में सिनेमा के बनने और प्रदर्शन की प्रक्रिया में विभिन्न देशों और समुदायों की भूमिका लगातार बढ़ती जा रही है। ऐसे में आॅस्कर एकेडमी को विस्तार देने का प्रयास आवश्यक भी है और सराहनीय भी। उम्मीद की जानी चाहिए कि इस व्यापकता से विश्व सिनेमा को समृद्ध करने में बहुमूल्य योगदान मिलेगा। 

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