दिल्ली में बुराड़ी के संतनगर में 30 जून की रात एक मकान में जो कुछ हुआ, उस पर अब भी भरोसा नहीं होता। एक रात और 11 लोगों की मौत। उसके बाद हर रोज एक नई कहानी। रहस्य की परतें खत्म होने का नाम नहीं ले रही। मौत की ऐसी स्क्रिप्ट शायद ही इससे पहले कभी लिखी गई हो। जैसे-जैसे और जो-जो लिखा गया, हर किसी के हिस्से में वैसे-वैसे ही मौत आई। अमूमन खुदकुशी का कारण बेरोजगारी, बीमारी, दबाव, भुखमरी, तंगी और तनाव होता है, लेकिन इस कहानी में मौत की वजह अजीबोगरीब है और उसका तरीका भी हैरतअंगेज।

सामूहिक खुदकुशी के मामले पहले भी देखने-सुनने में आए हैं, पर बुराड़ी की घटना अजीबोगरीब है। पुलिस की जांच जिस ओर बढ़ रही है, भरोसा नहीं होता कि मोक्ष के लिए एक पूरे परिवार ने एक साथ जान दे दी।

इसी पहली जुलाई की सुबह दिल्ली के संतनगर की गली नंबर-दो में कोहराम मच गया। पुलिस ने नारायणी देवी के घर से एक-एक कर 11 शव बाहर निकाले तो लोगों के दिल दहल उठे। करीब-करीब सभी के हाथ-पैर बंधे हुए थे और आंख-मुंह पर टेप लगाए गए थे। प्रथमदृष्ट्या लगा कि यह नरसंहार का मामला है। दिल्ली पुलिस के तमाम अफसर मौके पर पहुंच गए। आसपास के जो भी लोग थे, उन्हें खुद की आंखों पर यकीन नहीं आया। मरने वालों में बुजुर्ग महिला नारायणी देवी राठी (77), उनकी बेटी प्रतिभा (57), नातिन प्रियंका (33), बड़ा बेटा भुवनेश उर्फ भूपी (50), बहू श्वेता (48 ), भुवनेश की बड़ी बेटी नीतू (25), छोटी बेटी मीनू (23), बेटा ध्रुव (15), नारायणी देवी का छोटा बेटा ललित (45), उसकी पत्नी टीना (42) और ललित का बेटा शिवम (15) शामिल थे। सभी के गले में फांसी का फंदा कसा था। मौका-ए-वारदात देखकर पुलिस और फोरेंसिक टीम को भी पसीना छूटने लगा।

हत्या और आत्महत्या के बीच मामले की गुत्थी उलझने लगी। जितने लोग, उतने सवाल- मौत का क्या कारण है? अगर हत्या की गई है तो कौन है कातिल? सामूहिक नरसंहार का मास्टरमाइंड कौन है? खुदकुशी का मामला है तो उसकी वजह क्या है? एक साथ पूरा परिवार इस तरह कैसे फांसी के फंदे से झूल गया? नारायणी देवी का शव सबसे अलग क्यों मिला? सभी के मुंह और आंखों पर पट्टी क्यों बंधी थी? बच्चों ने किसी का क्या बिगाड़ा था? पुलिस अगले दिन भी इसी माथा-पच्ची में लगी रही। ऐसा कोई सुराग नहीं मिला, जिससे पता चलता कि इस परिवार का कत्ल किया गया है या फिर उन सभी 11 लोगों ने आत्महत्या की है। क्राइम ब्रांच और फोरेंसिक टीम घर का एक-एक कोना खंगालती रही। तीन जुलाई को पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिली तो पता चला कि मौत की वजह फांसी के फंदे से लटकना है। वहीं फोरेंसिक टीम ने घर के अंदर से जितने भी फिंगरप्रिंट इकट्ठा किए हैं, वे सभी घर के सदस्यों के ही पाए गए। इससे यह तो साफ हो गया है कि किसी बाहरी व्यक्ति ने इन 11 लोगों की हत्या नहीं की है बल्कि सभी ने खुदकुशी की है।

अब बड़ा सवाल यह था कि परिवार के 11 लोगों ने एकसाथ खुदकुशी क्यों की? वहीं नाते-रिश्तेदारों के गले के नीचे  यह बात नहीं उतर रही थी। गली-मोहल्ले के लोगों का मानना था कि यह हत्या की वारदात है। क्राइम ब्रांच की टीम लगातार जांच-पड़ताल में लगी रही। घर-परिवार के दस्तावेज खंगालती रही। आखिरकार मौत का जो रहस्य उजागर हुआ, वह सनसनीखेज निकला। करीब 25 नोटबुक, डॉयरी, रजिस्टर, धार्मिक किताबें और बच्चों की कुछ कापी-किताबों से पुलिस इस निष्कर्ष पर पहुंची कि पूरा परिवार मोक्ष प्राप्त करने के अंधविश्वास में पड़कर नेस्तनाबूद हो गया।

एक रजिस्टर में लिखा था, ‘जब आप मोक्ष प्राप्ति के लिए हवन करोगे तो उसके बाद आप अपने कानों में रुई और साथ में मुंह और आंख पर कपड़ा बांधोगे, ताकि एक-दूसरे को देख न सको और न ही चीख सुन सको। अंतिम समय में आखिरी इच्छा की पूर्ति के वक्त आसमान हिलेगा, धरती कांपेगी। उस वक्त तुम घबराना मत। मंत्रों का जाप बढ़ा देना, यह सब पढ़कर संयुक्त पुलिस आयुक्त आलोक कुमार माथा पकड़कर बैठ गए। आगे लिखा था, ‘कप में रखा पानी का रंग जब बदलेगा, तब नीचे उतर जाना। तुम मरोगे नहीं, कुछ बड़ा हासिल करोगे। गले में फंदा डालकर क्रिया करोगे तो मैं आपको साक्षात दर्शन दूंगा और मैं आपको आकर बचा लूंगा। आपकी जो आत्मा है, वो बाहर निकलेगी और फिर वापस आ जाएगी। तब आपको मोक्ष की प्राप्ति होगी।’

सीसीटीवी फुटेज में मिले सबूत

पांच जुलाई को क्राइम ब्रांच (दिल्ली पुलिस) के संयुक्त आयुक्त आलोक कुमार ने बताया कि दो ऐसे बड़े सुबूत मिले हैं, जिससे इस मामले की तस्वीर और साफ हो गई है। परिवार के सभी सदस्यों ने अंधविश्वास में आकर ही जान गंवाई है। घटना की रात ललित का बेटा शिवम बाजार से प्लास्टिक के चार स्टूल खरीदकर लाया था। इन्हीं स्टूलों पर चढ़कर नौ लोग फंदे से लटके। ललित और उसकी पत्नी ने सब से बाद में खुदकुशी की। संतनगर की गली नंबर-दो में लगे चार सीसीटीवी फुटेज में पाया गया है कि 30 जून की रात 10.20 से 10.40 के दौरान भुवनेश और ललित दुकान बंद कर रस्सी और तार लेकर भूतल से पहली मंजिल पर गए थे। इसी तरह गली के अंतिम छोर पर लगे सीसीटीवी की फुटेज में टीना और उसका बेटा शिवम प्लास्टिक के स्टूल लेकर घर लौटते देखे गए हैं। फर्नीचर के दुकान के कर्मचारी सुनील ने भी स्टूल खरीदे जाने की तस्दीक की है। आगे की जांच-पड़ताल जारी है।

लिखावट की तस्दीक में पुलिस को पता चला कि यह सब ललित ही लिखता था। दरअसल, उसके पिता भोपाल सिंह की मौत हो चुकी है। वे ललित को बहुत प्यार करते थे। उसका दावा था कि मृत्यु के बाद भी वे उसे नजर आते थे। ललित का कहना है कि भोपाल सिंह उसके पास आते हैं, बातें करते हैं और कई बार दिशा-निर्देश भी देते हैं। यह बात घर के बाकी सदस्यों को पता थी। ललित के हर आदेश का घर के लोग अनुसरण करते थे। एडिशनल डीसीपी (नॉर्थ) विनीत कुमार का कहना है, ‘मकान की तलाशी में जो नोट्स बरामद हुए हैं, उससे लगता है कि पूरा परिवार निश्चित रूप से कुछ आध्यात्मिक और रहस्यवादी चीजों के अभ्यास में लगा हुआ था।’

ललित की डायरी के अनुसार, पिता की आत्मा के निर्देश पर 30 जून की रात मोक्ष पाने के लिए पूरा परिवार फंदे पर लटकने को तैयार हो गया। रात करीब 12 बजे पूजा-हवन शुरू हुआ। ललित के लिखने के अनुसार, उसके पिता का निर्देश था कि अलग-अलग स्टूल पर सभी खड़े होंगे। सभी के हाथ-पैर, आंख और मुंह बांध दिए गए। मां को अलग मंदिर के पास स्टूल पर खड़ा कर दिया गया। ललित ने छड़ी से इशारा किया और घंटेभर चले अनुष्ठान के बाद समझा जाता है कि ललित और टीना ने सभी के नीचे से स्टूल खींच लिए। उसी के साथ परिवार के आठ लोग फांसी के फंदे से लटक गए। उनकी मौत हो गई। चूंकि नारायणी देवी को चलने में दिक्कत थी, इसलिए उन्हें यह कथित वट तपस्या अपने कमरे में ही करनी थी। ललित और टीना नारायणी के कमरे में गए। उनके फंदे के लिए एक बेल्ट का इस्तेमाल किया। इसके बाद ललित और टीना वापस हॉल में पहुंचे। सभी के मुंह पर टेप और रुमाल बंधे थे। कोई चीख भी नहीं पाया। हाथ बंधे थे, इसलिए फंदा नहीं खोल पाया और मुश्किल से दो मिनट के अंदर सभी मारे गए। अब परिवार के 11 में से दो सदस्य बचे थे टीना और ललित। अंत में वे दोनों भी फांसी के फंदे से झूल गए। इस तरह मोक्ष तो किसी को मिला नहीं, लेकिन अंधविश्वास के चलते अकाल ही काल के गाल में जरूर समा गए।

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