दिनचर्या में फेसबुक, वाट्सएप जैसे अन्य सोशल मीडिया प्लेटफार्मों का उपयोग लगातार बढ़ता जा रहा है। हर नये के साथ नये प्रकार की समस्याएं भी जन्मती है। यही सोशल मीडिया के साथ भी हो रहा है। देश में बढ़ते सोशल मीडिया के चलन ने कई विकारों को बल दिया है। इसके कारण परिवार से लेकर आपसी नातों में गहरी दरार आई है, जिसको पाटना बेहद मुश्किल होता जा रहा है। सोशल मीडिया पर परिवार तोड़ने का आरोप लग रहा है। जो कि सर्वथा गलत नहीं है। एक दौर था जब संबंध निभाना व्यक्ति के लिए महत्वपूर्ण हुआ करता था, लेकिन बदलते समय में सोशल मीडिया के बढ़ते चलन ने संबंधों को बिगाड़ने में कोई कसर नहीं छोड़ी है।

पत्नी को पति, पति को पत्नी समय ही नहीं दे पा रहे हैं। इसका कारण है सोशल मीडिया में अधिक सक्रियता। आज परिवारों में कलह और टूटन में सोशल मीडिया अपनी बड़ी भूमिका निभा रहा है।

गाजियाबाद सिहानी गेट प्रभारी निरीक्षक संजय पांडे बताते हैं कि हम पारिवारिक विवादों को सुलझाने के लिए बड़े स्तर पर प्रयास करते हैं। कई बार पुलिस संबंधित पक्षों की काउंसलिंग करवा कर रिश्ते टूटने से बचाती है। उन्होंने बताया कि स्मार्ट  फोन और सोशल मीडिया से परिवारों खासतौर से पति-पत्नी में विवाद के मामले तेजी से बढ़े हैं। हर महीने ऐसे कई मामले आते हैं जिसमें कहीं न कहीं सोशल मीडिया जरूर जुड़ा होता है। इस तरह के ज्यादातर मामलों में परिवार काउंसलिंग के बाद भी टूट जाते हैं। कुछ मामले में लोग अपनी गलती को समझ कर सामान्य जिंदगी में लौटने का प्रयास करते हैं। इससे बचने के लिए जरूरी है कि सोशल मीडिया और स्मार्टफोन का दायरा सीमित कर परिवार व समाज के लिए भी वक्त निकाला जाए। संजय पांडे बताते हैं कि अभी एक ऐसा मामला हमारे सामने आया जिसमें एक महिला ने फेसबुक पर 30 फेक अकाउंट बना रखे थे। आप समझ ही सकते हैं कि कोई इतने अकाउंट का उपयोग किस उद्देश्य से करेगा।

इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल में वरिष्ठ मनोवैज्ञानिक डॉ. संदीप वोहरा बताते हैं कि सोशल मीडिया का बढ़ता चलन लगातार परिवार को तोड़ रहा है। सोशल मीडिया एक आभासी दुनिया है। जहां पर सच्चाई कोसों दूर भी हो सकती है। हमें जो दिखता है कई बार असली नहीं होता। महिला हो या पुरुष सोशल मीडिया पर किसी के जीवन का एक पक्ष देखकर वह उसकी तरफ आकर्षित तो हो जाता है। लेकिन क्या प्रथम दृष्टा दिखने वाली प्रोफाइल, फोटो उस व्यक्ति का संपूर्ण जीवन होता है। ऐसा बिल्कुल नहीं है। वोहरा ने बताया कि अस्पताल में हर हफ्ते ऐसे 80 से 100 मरीज आते हैं जिनमें इंटरनेट की लत के कारण उत्पन्न हुए विकार के मरीज भी होते हैं।  इसमें कोई शक नहीं कि सोशल मीडिया की वजह से पति पत्नी के रिश्ते में दूरी बढ़ रही है। ऐसा देखा गया है कि पति अपने दैनिक कामों में व्यस्त है और पत्नी सोशल मीडिया के माध्यम से एक अलग रिश्ता तलाशने की कोशिश में है। इस आदत को लेकर दोनों में कई बार झगड़े होते हैं। कई बार स्थिति तलाक तक पहुंच जाती है। कई मामले ऐसे भी आये हैं जिसमें रिश्तों को पतियों के द्वारा खुद के मोबाईल के प्रति अत्यधिक सजगता को कारण माना गया है। पत्नियां पति के चैटिंग से परेशान हैं। धीरे-धीरे यही लड़ाई थाने तक पहुंच जाती है। ऐसा नहीं है कि इसमें किसी एक पक्ष की गलती हो। यहां पति और पत्नी किसी की भी गलती के कारण रिश्ते टूट रहे हैं।

एक समय था जब लोग एक दूसरे से बातचीत करके आस-पड़ोस के लोगों के साथ समय बिताया करते थे। लेकिन आज एक ही घर में लोगों के पास एक दूसरे से बात करने का समय नहीं है। पति-पत्नी आपस में बात करने की जगह अपने-अपने फोन पर चैटिंग करना ज्यादा पसंद कर रहे हैं। यही दिनचर्या सामाजिक मूल्य के बदलाव का परिचायक बन चुकी है। महिला थानों और परिवार परामर्श केंद्रों में घरेलू विवाद के आने वाले मामले 95% तक बढ़ चुके हैं। जिसका कारण कहीं न कहीं सोशल मीडिया है। पत्नी को पति, पति को पत्नी समय ही नहीं दे पा रहे हैं। इसके कारण विवाद बढ़ते हैं और कोर्ट कचहरी तक पहुंच जाते हैं। दिल्ली से लेकर एनसीआर या कहें पूरे भारत का यही हाल है। सोशल मीडिया का मॉडल दांपत्य जीवन में कड़वाहट घोल रहा है।

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