Ashok Gehlot, Chief Minister of Rajasthan, at his residence in Jaipur, Rajasthan on July 11, 2013. Pic: Sanjay Rawat

राजस्थान में नजदीक आ रहे विधानसभा चुनाव में नेतृत्व सौंपने को लेकर कांग्रेस में घमासान तेज हो गया है और पार्टी के भीतर की कलह सड़कों पर आने लगी है। चुनावों में जाने से पहले ही अपनी जीत सुनिश्चित मानकर राजस्थान कांग्रेस में अब ‘कौन बनेगा करोड़पति’ की तर्ज पर ‘कौन बनेगा मुख्यमंत्री’ का खेल खेला जा रहा है। राजस्थान में दो खेमों में बंटी कांग्रेस को अपने ही नेताओं से चुनौती मिलने लगी है। कांग्रेस महासचिव अशोक गहलोत और राजस्थान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट के बीच कई मुद्दों पर गंभीर असहमति दिखने लगी है। ताजा मामला चुनावों में नेतृत्व का है। जहां सचिन पायलट और कांग्रेस आलाकमान चुनाव बाद विधायकों की मर्जी से नेता चुनने की बात कहता रहा है वहीं पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत खुद को राजस्थान की पसंद बताते हुए अगला मुख्यमंत्री होने का पहले इशारों में दावा ठोकने लगे हैं। पायलट भी आजकल बातों ही बातों में गहलोत पर निशाना साधते नजर आ रहे हैं। पायलट का कहना है कि आजादी के बाद राज्य में सबसे कम 21 सीट आई थी, तब राहुल गांधी ने उन्हें कमान सौंपी थी। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी राजस्थान कांग्रेस में वरिष्ठ पार्टी नेताओं के आंतरिक मतभेदों से पहले से ही परेशान हैं। अब कांग्रेस नेताओं की तेज हुई बयानबाजी को लेकर केंद्रीय नेतृत्व ने सख्त कदम उठाने की चेतावनी दे दी है। हाल ही प्रदेश में हुए मेरा बूथ मेरा गौरव कार्यक्रमों के बाद नेताओं में जुबानी जंग और विवाद की घटनाएं बढ़ी हैं, जबकि कांग्रेस अपने ही नेताओं की गलत बयानबाजी का खमियाजा गुजरात विधानसभा चुनाव में उठा चुकी है ऐसे में अब केंद्रीय नेतृत्व ऐसे किसी भी नेता को बख्शने के मूड में नहीं है।

प्रदेश कांग्रेस की अंतर्कलह अब गुटबाजी में बदल गई है। इसके चलते पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट, दोनों के समर्थकों में भावी मुख्यमंत्री को लेकर बयानबाजी जारी है।

दो लोकसभा और एक विधानसभा उपचुनाव में बेहतर परिणामों के बाद कांग्रेस पार्टी को राजस्थान से काफी उम्मीदें हैं। उपचुनावों में जीत के बाद प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट के नेतृत्व में उम्मीद देख रहे कांग्रेस आलाकमान ने यही सोचकर दो बार मुख्यमंत्री रहे अशोक गहलोत को केंद्रीय नेतृत्व में महासचिव पद की अहम जिम्मेदारी दी थी। लेकिन जानकारों की माने तो प्रदेश की राजनीति में लंबा अनुभव रखने वाले गहलोत राजस्थान की सियासत छोड़ने को तैयार नहीं हैं। अब गहलोत के प्रदेश की जनता और पत्रकारों को लगातार ‘मै थांसू दूर नहीं’ का इशारा आलाकमान की रणनीति में सेंध लगाने लगा है और पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री लालचंद कटारिया समेत अन्य कांग्रेसी नेताओं की गहलोत के पक्ष में की जा रही बयानबाजी ने नेतृत्व की दौड़ को और तेज कर दिया है। हालांकि पायलट समर्थक भी अब खेमेबंदी में जुटने लगे हैं। उनका कहना है कि सचिन पिछले साढेÞ चार साल से कांग्रेस का नेतृत्व कर रहे हैं तो चुनावों में नेता वहीं होंगे।  

तो अब कौन आएगा

गत एक साल से लगातार पत्रकारों के समक्ष इशारों-इशारों में मुख्यमंत्री पद के लिए दावेदारी ठोक रहे अशोक गहलोत ने उदयपुर में धमाका करते हुए सीधे तौर पर कहा कि खलक (जनसमुदाय) की आवाज, खुदा की आवाज होती है। कांग्रेस की ओर से मुख्यमंत्री पद का दावेदार कौन होगा, की बात पर गहलोत ने स्पष्ट किया कि दस साल से जब चेहरा सामने है तो अब किस रूप में कौन से चेहरे को सामने लाया जाएगा। उन्होंने कहा कि ‘मैं जनता का सेवक था और अंतिम सांस तक सेवक रहूंगा’। वे चाहे दिल्ली में हैं, चाहे गुजरात गए, पंजाब या फिर कर्नाटक में गए। तब भी ये अफवाह उड़ाई गई कि गहलोत तो चले गए। लेकिन ‘मैं फिर स्पष्ट कर देना चाहता हूं कि मैं आप सभी से दूर नहीं हूं’। इससे पहले गहलोत बार-बार बिना नाम लिए पायलट को सत्ता से दूर रहने की सलाह देते हुए कहते रहे हैं कि कुछ पत्रकारों का समूह प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष को मुख्यमंत्री पद का सपना दिखाकर नेताओं को राह से भटकाते रहते हैं, इनसे दूर रहना चाहिए। मुझे भी भटकाया गया, लेकिन मैं उनके झांसे में नहीं आया और बाद में दो बार मुख्यमंत्री बना। उधर पायलट ने भी हाल ही जयपुर में आयोजित चुनाव कार्यशाला में गहलोत को जवाब देते हुए कहा था कि मैंने गहलोत की सलाह मानते हुए उन पत्रकारों से दूरी बना ली है और अब मेरा ध्यान लक्ष्य की ओर केंद्रित है। बाद में आॅस्ट्रेलिया दौरे से लौटते ही पायलट ने गहलोत का बिना नाम लिए फिर तंज कसा कि प्रदेश में आजादी के बाद 2013 में सबसे कम 21 सीट आईं थीं, तब राहुल गांधी ने मुझे जिम्मेदारी दी। मैं निष्ठा से इस काम को निभा रहा हूं, चाहे रास्ते में कितनी चुनौती आए, मुझे पार्टी ने बहुत कुछ दिया है। उन्होंने वरिष्ठ नेताओं पर निशाना साधते हुए कहा कि बड़े नेताओं को एक ही बात समझनी चाहिए कि पार्टी ने उन्हें बहुत कुछ दिया है तो उन्हें अब पार्टी को लौटाने के लिए भी हमेशा तैयार रहना चाहिए।  इधर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राष्ट्रीय महासचिव सीपी जोशी ने भी मेवाड़ में अपने जन्मदिन कार्यक्रमों के बहाने नेतृत्व के मैदान में ताल ठोक दी है। हालांकि जोशी ने तो सीधे संकेत नहीं दिए लेकिन उनके समर्थकों का कहना था कि जब 2008 में जोशी को कमान सौंपी गई थी, तब प्रदेश में कांग्रेस सरकार बनी थी और कार्यकर्ता जानते हैं कि प्रदेश में एक बार फिर जोशी ही कांग्रेस की सरकार जिता सकते हैं

‘‘गहलोत सर्वमान्य नेता’’

पिछले एक सप्ताह से गहलोत के पक्ष में बयानबाजी भी तेज होने लगी है। पूर्व केंद्रीय मंत्री लालचंद कटारिया ने गत सप्ताह दिल्ली में कहा था कि यदि चुनाव में प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट को नेतृत्व सौंपा गया तो यहां जीती-जिताई बाजी को कांग्रेस हार जाएगी। उन्होंने राष्ट्रीय महासचिव अशोक गहलोत को जनता का सर्वमान्य और लोकप्रिय नेता बताते हुए उन्हें नेतृत्व सौंपने की मांग कर डाली। कटारिया के बयान का विवाद समाप्त नहीं हुआ कि दो और कांग्रेस नेताओं सांगानेर से कांग्रेस के प्रत्याशी रहे संजय बाफना और बगरू विधानसभा से प्रत्याशी रहे प्रहलाद रघु ने भी उनके बयान में सुर मिला दिए और कहा कि गहलोत के नेतृत्व में राजस्थान में दो बार बनी सरकार ने ऐतिहासिक काम किए हैं जनता उसे आज याद करती है कि और गहलोत को प्रदेश कांग्रेस का नेता बनाया गया और उनके नेतृत्व में चुनाव होते हैं तो कांग्रेस पार्टी राजस्थान में प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता में लौटेगी। इससे पूर्व पूर्वी राजस्थान के कद्दावर नेता और विधायक विश्वेंद्र सिंह ने भी कांग्रेस के कुनबे को बिना दुल्हे की बारात बताते हुए कहा था कि राजस्थान में कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं में कंफ्यूजन की स्थिति बनी हुई है। ऐसे में ये बेहतर होगा कि चुनाव से पूर्व नेता के लिए सर्वे करा लिया जाए। हालांकि इस मामले में अब तक चुप्पी साधे बैठे पायलट के समर्थक भी सक्रिय होने लगे हैं।

कटारिया के बयान के बाद जयपुर जिला कांग्रेस अध्यक्ष प्रतापसिंह खाचरियावास का कहना है कि पायलट बीते साढ़े चार साल से प्रदेशाध्यक्ष हैं। इस दौरान उन्होंने 21 सीटों पर सिमटी कांग्रेस को फिर से फाइट में लाने का काम किया है इसलिए उनके नेतृत्व में ही कांग्रेस चुनावों में जाएगी। इधर चित्तौड़गढ़ में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राष्ट्रीय महासचिव सीपी जोशी समर्थकों ने कार्यकर्ता संवाद कार्यक्रम में जोशी के नेतृत्व में सरकार बनने की बात कह कर नेतृत्व के दावों को और उलझा दिया। लगातार बयानबाजी से नाराज राजस्थान प्रभारी अविनाश पांडे का कहना है कि ऐसी बातें करने वाले पार्टी को धोखा दे रहे हैं। ऐसा बयान पार्टी को नुकसान पहुंचाने जैसा है। ऐसे बयान देने वालों के खिलाफ प्रदेश कांग्रेस कठोर कार्रवाई करेगी। यह एक तरह से पार्टी के खिलाफ साजिश है। ऐसे बयान देना गैर जिम्मेदाराना है।

मेरा बूथ मेरा गौरव

इससे पहले कांग्रेस कार्यकर्ताओं में जोश भरने, बूथ मैनेजमेंट ठीक करने और कांग्रेस की जमीनी स्थिति जानने के उद्देश्य से हर विधानसभा क्षेत्र में चलाए गए मेरा बूथ मेरा गौरव कार्यक्रम में भी गुटबाजी और कलह जमकर उभरी। कार्यक्रम विधायकी का चुनाव लड़ने के इच्छुक नेताओं का जमावड़ा होकर रह गया। कार्यक्रम में हालात ये हो गए हैं कि नेतृत्व के सामने ही कांग्रेस के नेता और समर्थक न सिर्फ उलझते रहे बल्कि मारपीट और एक-दूसरे की गाड़ियों में तोड़फोड़ तक की। जयपुर, बीकानेर, चूरु, राजसमंद समेत अनेक जिलों में आलाकमान की तमाम कोशिशों के बावजूद बवाल थमने का नाम नहीं ले रहा था। करीब एक सौ पचहत्तर विधानसभा क्षेत्रों में से अधिकाशं में कलह के बाद अब कार्यक्रम को थामना पड़ा। जानकारों के अनुसार कांग्रेसी नेता ऐसा मान बैठे हैं कि भाजपा के खिलाफ प्रदेश में माहौल बन रहा है और उनकी जीत निश्चित है।  

कोई जवाब दें

Please enter your comment!
Please enter your name here