प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जब लखनऊ में ग्राउण्ड ब्रेकिंग सेरेमनी के दौरान योगी आदित्यनाथ सरकार की पीठ थपथपायी, तो सभी का गदगद होना स्वाभाविक था। वाकई में एक समय था जब उत्तर प्रदेश या तो निवेश के लिए तरसता था या फिर इसकी घोषणाएं महज फाइलों में ही कैद होकर रह जाती थी। ऐसे में फरवरी में आयोजित इन्वेस्टर्स समिट के महज पांच महीने बाद ही जिस तरह से इस भारी-भरकम निवेश की परियोजनाओं का शिलान्यास प्रधानमंत्री के हाथों कराया गया, वह प्रदेश के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि से कम नहीं। अगले पांच वर्षों में 10 प्रतिशत की विकास दर हासिल करने का लक्ष्य लेकर चल रही प्रदेश सरकार ने ये साबित कर दिखाया है कि वह वास्तव में धरातल पर काम कर रही है।

भाजपा विकास का इंजन दौड़ाने के साथ उसमें सियासी कोच भी जोड़ने की रणनीति के तहत काम कर रही है, जिसमें एक तरफ सरकार अपनी उपलब्धियां गिनायेगी और दूसरी तरफ विरोधियों को उनकी भाषा में जवाब  भी देगी।

विपक्ष को विश्वास नहीं

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने ग्राउण्ड ब्रेकिंग सेरेमनी पर सवाल उठाये हैं। उन्होंने कहा कि अब तक जो केवल हमारे कामों का ही उद्घाटन करते थे, वह अब हमारी निवेश की योजनाओं को भी नया जामा पहनाकर फिर से पेश कर रहे हैं। जो अरबों के उद्योग और लाखों रोजगार इनकी नीतियों से खत्म हो गए हैं, इन्हें उसका हिसाब भी जनता को देना पड़ेगा। प्रदेश को इन्होंने बीसों साल पीछे धकेल दिया है। प्रधानमंत्री लखनऊ में विकास का सपना बेचने का विफल प्रयास करते नजर आए। वे शिलान्यासों से अपनी खोई लोकप्रियता और विश्वसनीयता को बचाना चाहते है। भाजपा सरकार की तमाम योजनाओं की घोषणाएं हवाई हैं, क्योंकि अभी तक उनका काम जमीन पर कहीं दिखाई नहीं दिया है। वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विपक्ष को आईना दिखाते हुए दावा किया है कि बहुजन समाजवादी पार्टी के समय पर केवल पांच साल में 57 हजार करोड़ का निवेश हुआ था, समाजवादी पार्टी के पांच साल में 50 हजार करोड़ का निवेश हुआ, लेकिन एक साल के अंदर ही भाजपा सरकार 60,000 करोड़ का निवेश प्रदेश में लाने में सफल साबित हुई है। उत्तर प्रदेश ने ईज आॅफ डूइंग बिजनेस में देश में अच्छी स्थिति बना ली है। यूपी इन्वेस्टर्स समिट में 4.68 लाख करोड़ रुपये के एमओयू साइन हुए थे। पांच माह की अल्प अवधि में 60 हजार करोड़ रुपये के निवेश की प्रक्रिया को आरंभ किया जा रहा है। इनमें निवेश का 51 प्रतिशत पश्चिमांचल में, 27 प्रतिशत मध्यांचल व बुंदेखलखंड में और 22 प्रतिशत पूर्वी उत्तर प्रदेश में होने जा रहा है। 50 हजार करोड़ रुपये की परियोजनाएं पाइप लाइन में हैं। इन परियोजनाओं को भी जल्द ही जमीन पर उतारने का काम करेंगे।

ग्राउण्ड ब्रेकिंग सेरेमनी में राजधानी लखनऊ को भी परियोजनाओं की सौगात मिली है। 1417.74 करोड़ रुपये की इन सात परियोजनाओं से लगभग साढ़े पांच हजार युवाओं को रोजगार मिलेगा। इनमें डेस्टिनी हॉस्पिटैलिटी, पीटीसी इंडस्ट्रीज, अनहिता हॉस्पिटलिटी, कैरा लाइसस्पेस, केएल मेमोरियल सोसाइटी, उबर व पुरुषोत्तम राम फूड इंडस्ट्री के लिए भूमि उपलब्ध हो गई है। निवेशकों ने इन परियोजनाओं से सम्बन्धित एनओसी भी ले ली है। सातों इकाइयों का प्रोजेक्ट तैयार है। इसके अलावा हरदोई में बर्जर पेंट व बाराबंकी में एसएलएमजी बेवरेज परियोजनाओं को भी धरातल पर उतारा जायेगा।

निवेश परियोजनाएं

० रिलायंस जियो इंफोकॉम-10000 करोड़

० वर्ल्ड ट्रेड सेंटर-10000 करोड़

० टेग्ना इलेक्ट्रॉनिक्स-5000 करोड़

० इंफोसिस-5000-करोड़

० बीएसएनएल-5000 करोड़

० वन 97 कम्युनिकेशन-3500 करोड़

० अडानी पावर-2500 करोड़

० टीसीएस-2300 करोड़

० पतंजलि आयुर्वेद-2118 करोड़

० लूलू समूह-2000 करोड़

० एसेल इंफ्रा-1750 करोड़

० कनोडिया ग्रुप-1200 करोड़

० फीनिक्स मिल्स-800 करोड़

० स्पर्श इंडस्ट्रीज-600 करोड़

० सची एजेंसी प्रा.लि-552 करोड़

० एसएलएमजी बेवरेजेस-550 करोड़

० इंटेक्स-500 करोड़

० एसीसी-500 करोड़

० ग्रीनप्लाई इंडस्ट्रीज-500 करोड़ के आर पल्प एंड पेपर्स-500 करोड़

कम्पनी निवेश (करोड़ रुपये में)

निवेश में जुटा बिड़ला ग्रुप

आदित्य बिड़ला ग्रुप के चेयरमैन कुमार मंगलम बिड़ला ने कहा कि अपने छोटे से ही कार्यकाल में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश में इंडस्ट्री के लिए बड़ा काम किया है। अलग-अलग क्षेत्रों में निवेश के अलावा हम प्रदेश में सामाजिक उत्तरदायित्व में बड़ी भूमिका निभाने को तैयार हैं। बिड़ला समूह 15 मैनुफैक्चरिंग प्लांट उत्तर प्रदेश में लगायेगा। समूह 25,000 करोड़ रुपये सीमेंट, केमिकल और फाइनेंसियल सर्विसेस के क्षेत्र में निवेश करेगा। समूह की कम्पनी अल्ट्राटेक सीमेंट के बारा और डाला सीमेंट कारखानों में 7000 करोड़ रुपये के निवेश की शुरुआत हो चुकी है।

अडानी समूह तैयार

अडानी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडानी ने यूपी इनवेस्टर्स समिट को बहुत बड़ा मौका करार दिया। अडानी समूह प्रदेश में 36,500 करोड़ रुपए का निवेश करने के लिए तैयार है। इस ग्रुप ने प्रदेश में 1.9 लाख रोजगार अवसरों के सजृन की योजना बनाई है। अडानी ग्रुप ने बीती फरवरी में 36,000 करोड़ का एमओयू साइन किया था। आगे कारपोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी के तहत क्वालिटी एजुकेशन और स्किल डेवलपमेंट के लिए काम करेंगे।

काम पूरा करेगा एस्सेल ग्रुप

एस्सेल ग्रुप के चेयरमैन डॉ. सुभाष चन्द्रा का ग्रुप प्रदेश में 22,500 करोड़ रुपये के निवेश का काम पूरा करेगा। आगे निवेश की राशि को और बढ़ाया जाएगा। डॉ. चन्द्रा ने ई-रिक्शा के जरिए जिन्दगी में बदलाव लाने की बात कही। इसके तहत प्रदेश के 20 शहरों में 250 ई-रिक्शा चार्जिंग स्टेशन और 1000 बैटरी स्वीपिंग स्टेशन खोले जाएंगे। इससे ई-रिक्शा चलाने वालों को न तो रिक्शा खरीदना पड़ेगा, न किसी कागजी झंझट में पड़ना होगा, न चार्जिंग की दिक्कत होगी और कुछ समय बाद रिक्शा भी उन्हीं का हो जाएगा। देश भर में आज करीब छह लाख ई-रिक्शा आ गए हैं। इसके लिए 25,000 ई-रिक्शा डिप्लॉय किए जाएंगे और पांच साल के बाद ये रिक्शे उन्हें चलाने वालों के नाम कर दिए जाएंगे। कम्पनी की इस कवायद का मकसद ई-रिक्शा चलाने वालों की आमदनी बढ़ाना है। कम्पनी इस प्रोजेक्ट की शुरुआत गाजियाबाद से करेगी और फिर लखनऊ, कानपुर, आगरा, नोएडा, मेरठ, वाराणसी, गोरखपुर और इलाहाबाद जैसे शहरों में इसका विस्तार किया जाएगा।

आईटीसी किसानों की आय दोगुना करने में जुटी

आईटीसी लि. के मैनेजिंग डायरेक्टर संजीव पुरी के मुताबिक आइटीसी का एग्री बिजनेस डिवीजन प्रदेश के 50 जिलों में 12 लाख किसानों, 2,000 ई-चौपालों और 28,000 चौपाल प्रदर्शन केंद्रों को सशक्त बनाने में जुटा है। कम्पनी ने फलों के पल्प से ही फ्रूट जूस बनाने का फैसला किया है। इसके लिए यूपी में अमरूद और जामुन के अधिक उत्पादकता वाले बगीचों में कम्पनी ने निवेश करना शुरू कर दिया है।

भागीदार बनेगा लूलू ग्रुप

ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी के कार्यक्रम में यूसुफ अली, चेयरमैन एंड मैनेजिंग डायरेक्टर, लूलू ग्रुप ने प्रदेश में 2000 करोड़ का निवेश करने की बात कही है। उन्होंने भी माना कि आज यूपी में देश-विदेश के निवेशकों को भरोसा अभूतपूर्व तरीके से बढ़ा है।

एनएमसी हेल्थ केयर

डॉ. बी.आर. शेट्टी, सीईओ, एनएमसी हेल्थ केयर, यूएई ने प्रदेश में यूनानी और होम्योपैथिक अस्पताल योजना के साथ उसमें योगदान देने की बात कही है। एनएमसी हेल्थकेयर वाराणसी में 50 एकड़ क्षेत्रफल में मेडिकल कॉलेज विकसित करेगा जिसमें आयुष, सिद्ध और यूनानी जैसी परंपरागत चिकित्सा पद्धतियों की शिक्षा भी दी जाएगी।

एक तरफ भाजपा इन औद्योगिक परियोजनाओं के जरिए ये साबित करना चाहती है कि वास्तव में डबल इंजन की सरकार का लाभ आम जनता को मिल रहा है। वहीं विपक्ष को इसमें लोकसभा चुनाव का सियासी हथकण्डा नजर आ रहा है। खासतौर से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जिस तरह से प्रदेश में सक्रिय हैं और हाल ही में उन्होंने एक के बाद एक मगहर, नोएडा, वाराणसी, मीर्जापुर और शाहजहांपुर के बाद लखनऊ में दो दिन का दौरा किया, उससे विरोधी खेमे में हड़बड़ाहट है। खुद प्रधानमंत्री भी अपने भाषणों में विपक्ष पर हमला करने का मौका नहीं छोड़ रहे हैं। लखनऊ में पहले दिन उन्होंने जहां खुद को गरीबों की तकलीफों, किसानों के दर्द का भागीदार बताते हुए विपक्ष के आरोपों पर सियासी पलटवार किया। वहीं अगले दिन आलोचना के लिए स्वयं के खाते में चार साल जबकि दूसरों के खाते में सत्तर साल की बात कहकर फिर करारा जवाब दिया।

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