लोकसभा में भ्रष्‍टाचार निवारण (संशोधन) विधेयक, 2018 पारित हो गया है। राज्यसभा से पहले ही ये बिल पास हो गया था। यह विधेयक भ्रष्टाचार की रोकथान अधिनियम 1988 में संशोधन करता है। इस विधेयक से भ्रष्टाचार के मामलों पर रोक लगने के साथ ईमानदार कर्मचारियों को फायदा मिलेगा। इसके तहत रिश्वत लेने वाले के साथ ही रिश्वत देने वाले को भी अपराधी माना जाएगा और उसे लिए भी सजा का प्रावधान होगा। इस विधेयक में रिश्वत लेने वाले के साथ रिश्वत देने वाला भी समान रूप से जिम्मेदार होगा। विधेयक में यह भी सुनिश्चित किया गया है कि किसी को बेवजह परेशान न किया जाए। इसके तहत रिश्वत लेने वालों की तरह रिश्वत देने वालों को भी 3 से 7 साल की कैद के प्रावधान साथ जुर्माना भी लगाया जाएगा। विशेषकर जांच के दौरान यह भी देखा जाएगा कि रिश्वत किन परिस्थितियों में दी गई। इस कानून के अनुसार किसी भी लोकसेवक पर भ्रष्टाचार का मामला चलाने से पहले अगर वह केंद्र का है तो पहले लोकपाल और अगर लोकसेवक राज्य का है तो राज्यों में लोकायुक्तों की अनुमति लेनी होगी। साथ ही रिश्वत देने के आरोपी को अपनी बात रखने के लिए 7 दिनों का समय दिया जाएगा जिसे कुछ विशेष परिस्थितियों में 15 दिन तक बढ़ाया जा सकता है।

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