जैसे जैसे चुनाव नजदीक आ रहे हैं, ‘जीजा जीका मामला फिर गर्म हो चला है। उनके खिलाफ केस भी दर्ज हो गया। इस बार एक साधारण से समाज सेवक ने मामला दर्ज कराया है। नई बात यह है कि अब भाजपा इस मामले को भुनाने की तैयारी कर रही है। विरोधी भी सवाल कर रहे हैं कि  चार साल तक यह मामला क्यों नहीं उठाया गया और जांच क्यों नहीं कराई गई। वैसे पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा और जीजा जी, यानी रॉबर्ट वाड्रा को लेकर कांग्रेस घिर गई है। इस पार्टी के लिए जीजा भी गले की फांस बन गए हैं और भाजपा इसी के सहारे हरियाणा में  नैया पार लगाने की जुगत में लग गई है। वैसे उम्मीद है कि जल्द होने वाले पांच राज्यों के चुनाव में भी रॉबर्ट वाड्रा का मुद्दा गरमाया रहेगा।  सवाल होते रहेंगे कि एक व्यक्ति कैसे कुछ लाख लगाकर अरबों का मालिक बन गया।

पिछले चुनाव में प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी भी ‘जीजा जी’ यानी रॉबर्ट वाड्रा का खूब जिक्र करते थे, पर सत्ता में आने के बाद जैसे यह मुद्दा भुला दिया गया। अब फिर चुनाव नजदीक होने के साथ इस पर चर्चा चल पड़ी है। उम्मीद है कि कार्रवाई भी होगी।

पिछले दस साल के इतिहास पर नजर डालें तो पता चलता है कि हरियाणा में वर्ष 2005 में कांग्रेस की सरकार बनने के साथ ही गुरुग्राम की उपजाऊ जमीन पर उसके अपने लोगों की गिद्ध-नजर लगनी शुरू हो गई। जिन खेतों में कहीं गेहूं तो कहीं सरसों की फसल लहलहाती थी, उनका अधिग्रहण करके या बिल्डर्स के माध्यम से खरीदकर वहां खेती का नामोनिशान खत्म कर दिया गया। किसान एक बार तो करोड़पति कहलाये, लेकिन समय के साथ वे फिर से गरीब होते गए और बिल्डर्स अरबपति। इस बीच साइबर सिटी अब कंक्रीट के पहाड़ में तब्दील हो गई।  सबसे पहले कांग्रेस सरकार के कार्यकाल वर्ष 2007 में आईएमटी (इंडस्ट्रीयल मॉडल टाउन) के नाम पर मानेसर, नौरंगपुर और नखड़ौला की 912 एकड़ जमीन के अधिग्रहण के लिए वर्ष 2004 के नोटिफिकेशन को रद्द करके दोबारा नोटिफिकेशन किया गया था। जब सरकार इस जमीन का अधिग्रहण कर रही थी, तभी बिल्डर्स ने किसानों से 20-25 लाख रुपये प्रति एकड़ से लेकर डेढ़ करोड़ रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से 459 एकड़ जमीन खरीद ली। इसमें 350 एकड़ जमीन तो 20-25 लाख रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से ली गई और 50 एकड़ जमीन डेढ़ करोड़ रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से खरीदी गई। मामला जब उछला तो सीबीआई ने भी इसे केस में दर्ज किया। असल में सच्चाई यह थी कि 400 एकड़ जमीन की उस समय कीमत चार करोड़ रुपये प्रति एकड़ थी। इसके विपरीत उस जमीन को मात्र 100 करोड़ में खरीदा गया। इस तरह से किसानों को सीधे 1500 करोड़ का घाटा हुआ।

200 किसानों के साथ धोखा!

यह करीब 200 किसानों के साथ बड़ा धोखा था। हरियाणा में बीजेपी सरकार बनने के बाद इस मामले को उठाया गया और जांच का जिम्मा सीधे सीबीआई को सौंप दिया गया। गत 31 मई को अदालत ने पूर्व मुख्यमंत्री हुड्डा को व्यक्तिगत रूप से पेश होने के लिए बुलाया था। वे सेहत का हवाला देकर एम्स में भर्ती हुए और उन्हें अगली तारीख मिल गई। अगली तारीख पर उन्हें अदालत की ओर से जमानत भी दे दी गई।

शिकोहपुर मामले में भी एफआईआर

मानेसर आईएमटी के विस्तार को लेकर जमीन अधिग्रहण मामला चल ही रहा था कि इसी बीच शिकोहपुर समेत दो गांवों में सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा को दी गई जमीन मसले पर भी एक व्यक्ति द्वारा केस दर्ज कराया गया। कहा गया है कि इस सौदे में सरकारी अधिकारियाओं, राजनेताओं ने मिलकर बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार किया है। वॉड्रा की कंपनी स्काइलाइट हॉस्पिटेलिटी के नाम से ओंकेश्वर प्रॉपर्टीज से साढ़े तीन एकड़ जमीन खरीदी गई थी। आंकेश्वर प्रॉपर्टीज ने अपने राजनीतिक प्रभाव के चलते सरकार से आवासीय लाइसेंस खरीदने के लिए वॉड्रा के साथ सौदेबाजी की। तत्कालीन हुड्डा सरकार ने कानून का उल्लंघन करके उस जमीन को कॉमर्शियल यूज का लाइसेंस दे दिया। यानी वहां पर हॉस्पिटैलिटी के स्थान पर फ्लैट बनाने को हरी झंडी दे दी गई। फिर वॉड्रा की ओर से इस जमीन को 58 करोड़ में डीएलएफ को बेच दिया गया।

खेमका ने भी उठाए थे सवाल

वर्ष 2012 में हुड्डा सरकार में जमीन विभाग के महानिदेशक रहे अशोक खेमका ने साढ़े तीन एकड़ जमीन के इस लैंड यूज को रद्द कर दिया था। सीएम हुड्डा ने उनके इस रद्दीकरण को ही रद्द करने के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित कर दी। आरोप है कि यह कार्रवाई अवैध ही थी। इस तरह के मामले में केवल पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ही रद्दीकरण आदेश को रद्द कर सकता है। अब सुरेंद्र शर्मा नामक व्यक्ति ने इस मामले में खेड़कीदौला पुलिस थाना में पूर्व सीएम हुड्डा व रॉबर्ट वाड्रा के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है। मीडिया खबरों के मुताबिक सुरेंद्र शर्मा ने कहा कि उन्होंने पुलिस को लिखित शिकायत दी थी, लेकिन उन्हें उम्मीद नहीं थी कि इस मामले में इतना जल्द केस दर्ज कर लिया जाएगा। एसएचओ ने उन्हें बताया कि मामले को दर्ज करने से पहले पुलिस प्रारंभिक जांच करेगी। सुबह रिपोर्ट देने के बाद शाम को उन्हें सूचित किया गया कि इस मामले में एफआईआर दर्ज कर ली गई है। आरोप है कि कांग्रेस सरकार में इस मामले को शांत कर दिया गया था, लेकिन बीजेपी सरकार में यह फिर से उछला है।

2015 में बना आयोग

इस जमीन घोटाले की निष्पक्ष जांच के लिए वर्तमान भाजपा सरकार ने जस्टिस ढींगरा आयोग का गठन किया। यह आयोग गुरुग्राम के उन क्षेत्रों में उपनिवेशों, समूह आवास समितियों और कॉमर्शियल परिसरों के विकास के लिए लाइसेंस देने या अस्वीकार करने की परिस्थितियों की जांच के लिए बनाया गया। जांच में मुख्य रूप से गांव शिकोहपुर, सिकंदरपुर, बढा और खेड़कीदौला की जमीन में वाड्रा-डीएलएफ जमीन सौदा शामिल हैं। वैसे पूर्व सीएम हुड्डा ने वर्ष 2016 में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में ढींगरा आयोग की स्थापना की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी थी।

मनी लान्ड्रिंग में भी जांच!

प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी की ओर से इस केस में कुछ भी कदम उठाने से पहले यह कहा गया है कि दस्तावेजों का गहनता से अध्ययन किया जायेगा। उनके बाद ही देखेंगे कि यह मनी लान्ड्रिंग एक्ट की रोकथाम के तहत कोई अपराध बनता है या नहीं। साथ ही ईडी के एक अधिकारी ने यह भी कहा कि सरकार से इस बाबत किसी विशेष दस्तावेजों की जरूरत नहीं है। सारे दस्तावेज सार्वजनिक डोमेन पर उपलब्ध हैं।

कई धाराओं में केस  

गुरुग्राम में हुड्डा के खिलाफ पहला केस दर्ज हुआ है। उनके साथ रॉबर्ट वॉड्रा और डीएलएफ के साथ ओंकारेश्वर प्रॉपर्टीज के खिलाफ भी खेड़कीदौला में मुकदमा दर्ज किया गया है। इस मामले में आईपीसी की धारा 13, 420, 120बी, 467,468 और 471 लगाई गई हैं। इसके अलावा प्रिवेंशन आॅफ करप्शन एक्ट 1988 की धारा 13 के तहत भी केस दर्ज किया गया है। मानेसर लैंड डील मामले में भूपेंद्र सिंह हुड्डा और रॉबर्ट वॉड्रा ही नहीं, बल्कि तत्कालीन मुख्य सचिव एमएल तायल, यूपीएससी मेंबर छत्तर सिंह, टाउन एंड कंट्री प्लानिंग के निदेशक सुदीप सिंह ढिल्लो के खिलाफ भी केस दर्ज हो चुके हैं।

अपने को बचा रही है पुलिस

रॉबर्ड वाड्रा और पूर्व सीएम हुड्डा मामले में चार सितंबर को तब नया मोड़ आ गया, जब पुलिस ने गिरफ्तारी से पल्ला झाड़ते हुए गेंद राज्य सरकार के पाले में डाल दी। पुलिस एसीपी शमशेर सिंह के मुताबिक सरकार अगर धारा 17ए के तहत अनुमति देती है तो पुलिस आरोपियों की गिरफ्तारी कर सकती है। पुलिस के बयान से समझा जा रहा है कि इस मामले में खुल कर राजनीति हो रही है। इसके पहले दो सितंबर को साइबर सिटी में सिटी बस के उद्घाटन के मौके पर आए गुरुग्राम के सांसद व केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत के बयान ने भी सियासत में हलचल मचा दी थी। भाजपा सांसद होते हुए केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा और रॉबर्ट वाड्रा के खिलाफ बयान देने से बचते नजर आए। उन्होंने सिर्फ इतना कह कर बचाव कर लिया कि मामला राज्य सरकार का है। राज्य सरकार ही कार्रवाई करेगी। बता दें कि ये वही राव इंद्रजीत हैं, जिनका पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुडडा से 36 का आंकड़ा रहा है। सत्ता में रहते हुए उन्होंने पूर्व सीएम के खिलाफ जमकर मोर्चा खोला था। अब सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ड वाड्रा और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुडडा के खिलाफ गुरुग्राम में मामला दर्ज हो चुका है। इस पर कितनी कार्रवाई होगी यह तो सरकार के हाथ में है। सरकार कार्रवाई करती है या फिर इसे चुनाव स्टंट बनाकर ही मामले को गरम रखना चाहती है, यह तो समय बताएगा। कांग्रेस तो इस मामले को राजनीतिक द्वेष बता ही रही है।  

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