The Prime Minister, Shri Narendra Modi at the launch of the India Post Payments Bank, in New Delhi on September 01, 2018. The Minister of State for Civil Aviation, Shri Jayant Sinha and the Secretary (Post), Shri Ananta Narayan Nanda are also seen.

बीते एक सितंबर को इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक’ (आईपीपीबी) का नई दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में शुभारंभ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने किया। आपका बैंक आपके द्वारपर इसका घोष वाक्य है। इसके बारे में दूरसंचार मंत्री मनोज सिन्हा का कहना है कि यह विश्व का सबसे बड़ा बैंकिंग नेटवर्क होगा, जिसका ध्यान खासकर भारतीय ग्रामीण क्षेत्रों पर होगा। मनोज सिन्हा नरेन्द्र मोदी मंत्रिमंडल के यशस्वी मंत्रियों में एक हैं। इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक को लेकर उनसे यह बातचीत ब्रजेश कुमार ने की है-


 

० इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक क्या है?

सरल भाषा में कहें तो यह डाकघरों और डाकिए के जरिए लोगों के घरों तक पहुंचने वाला सुलभ, सस्ता और विश्वसनीय बैंक है। इसे भारत सरकार के संचार मंत्रालय के डाक विभाग के अंतर्गत शुरू किया गया है। इसका स्वामित्व पूरी तरह भारत सरकार के पास है। यह बैंक अपने खाता धारकों को बचत खाता, चालू खाता, डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर, यूटिलिटी बिल्स, मनी ट्रांसफर आदि सभी सुविधाएं उपलब्ध कराएगा। इसके जरिए खाता धारक बिजली-पानी बिल के साथ-साथ सभी तरह के प्रीमियम, मोबाइल बिल आदि का भुगतान भी कर सकेंगे। शून्य बैंक बैलेंस से भी खाता खोला जा सकता है। इसमें यह बाध्यता नहीं है कि सौ रुपए या कोई निश्चित राशि रहनी ही चाहिए।

० पहले से देश में कई बैंक हैं तो आईपीपीबी की जरूरत क्यों महसूस की गई?

पहला कारण तो यही है कि जन धन योजनाके कारण बैंकों पर काफी दबाव आ गया था। अब इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक (आईपीपीबी) से अन्य बैंकों पर आया दबाव एकाएक कम हो जाएगा। दूसरा कारण यह है कि हमारी ग्रामीण अर्थव्यवस्था नकदी है। आईपीपीबी के जरिए डिजिटल ट्रांजेक्शन (लेन-देन) के ऐसे सुलभ साधन उपलब्ध कराए जाएंगे, जिससे लेसकैश अर्थव्यवस्था की तरफ लोगों का रुझान बढ़ेगा। इस तरह लेसकैश अर्थव्यवस्था की तरफ उठाया गया यह मजबूत कदम है। एक अन्य जरूरी बात यह है कि देश में बैंकिंग सुविधा को मजबूत करने की दिशा में गंभीर कार्य हो रहे हैं। अभी देश में 1.39 लाख विभिन्न बैंकों की शाखाएं हैं। ग्रामीण भारत में यह संख्या 49 हजार है। अब डाक विभाग 1.55 लाख नई बैंक शाखा देश को देने जा रहा है। मोटे तौर पर देखें तो देश में कुल बैंक की जितनी संख्या है, करीब उतनी या उससे अधिक संख्या में नया बैंक हमलोग देश को दे रहे हैं। ग्रामीण भारत में इसकी संख्या 49 हजार है, उसमें 1.30 लाख बैंक शाखा हम जोड़ रहे हैं। इससे ग्रामीण भारत की बैंकिंग सुविधा निश्चित रूप से अत्यधिक मजूबत होगी।

० जन-धन योजना और आईपीपीबी में क्या फर्क है?

जन-धन एक तरह की सुविधा है। अब तक जिनके पास कोई खाता नहीं था और कई कारणों से खाता खुलवाने में सफल नहीं हो रहे थे, उन्हें बैंक की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए योजना लाई गई थी। यह बात सच है कि बैंकों का राष्ट्रीयकरण बहुत पहले किया जा चुका था, लेकिन एक बड़ा सच यह है कि नरेन्द्र मोदी जी की सरकार ने उसे गरीबों तक पहुंचाया। जन- धन योजना के माध्यम से इस लक्ष्य को प्राप्त करने में सफलता मिली है। आज जन-धन योजना के लाभ दूर-दराज के क्षेत्रों में भी लोग उठा रहे हैं। इसका असर यह हुआ कि बैंकों पर अचानक भारी दबाव आ गया। ऐसी स्थिति में हम लोगों को बैंकों का विकल्प देने जा रहे हैं। शून्य बैंक बैलेंस से भी यह खाता खोला जा सकेगा। इसमें यह बाध्यता नहीं होगी कि सौ रुपए या कोई निश्चित राशि रहनी ही चाहिए, लेकिन लोगों को लाभ तभी होगा, जब वे इसका उपयोग करेंगे।

० इसके लिए मजबूत आधारभूत संरचना की जरूरत होगी। उस दिशा में डाक विभाग की क्या तैयारियां हैं?

पूरी तैयारी के साथ योजना शुरू की गई है। देश भर में फैले उप डाकघर या शाखा डाकघर एक्सेस प्वाइंट के तौर पर होंगे। फिलहाल डाक विभाग के पास 26 हजार अपनी इमारतें हैं। लगभग 40 हजार इमारतें किराए पर हैं, जिसमें डाकघर चलते हैं। इस तरह हमारे पास एक मजबूत आधार संरचना है। बड़ी संख्या में डाक सेवक भी नियुक्त किए गए हैं, जो शाखा डाकघर से चिट्ठी पहुंचाने का काम कर रहे हैं। वैसे कई छोटे-छोटे गांव भी हैं, जहां डाकघर अभी नहीं हैं, तो उन स्थानों पर सुविधा उपलब्ध कराने के लिए दो-तीन गांव पर एक डाक सेवक नियुक्त किए गए हैं। उन डाक सेवकों के जरिए यह बैंक लोगों तक चलकर पहुंचेगा। इस अर्थ में यह एक तरह का चलता-फिरता बैंक है। उन सभी डाक सेवकों को एक स्मार्ट-फोन और बायोमेट्रिक्स उपकरण उपलब्ध कराया गया है, जिससे वे बैंकिंग संबंधी सभी जरूरी कार्यों को पूरा कर पाएंगे। इस तरह आपका बैंक आपके द्वारपर होगा।

० पिछले कई सालों से डाक सेवा निरंतर निष्क्रिय अवस्था में पहुंचती गई है। नई योजना को सफल बनाने के लिए इस व्यवस्था को पुनर्जीवित करना होगा। इस दिशा में क्या प्रयास है?

फिलहाल दो लाख 60 हजार ग्रामीण डाक सेवक हैं। कुछ महीने पहले ही उनके वेतन भत्ते में काफी वृद्धि की गई है। पहले ग्रामीण डाक सेवकों (जीडीएस) की पांच श्रेणियां थीं। वे 2,700 से 7,000 रुपए तक का वेतन पाते थे। अब उनकी दो श्रेणियां बना दी गई हैं, जिनका प्रति माह की दर से न्यूनतम वेतनमान 10,000 रुपए कर दिया गया है। वेतन वृद्धि के साथ-साथ नई बैंकिंग प्रणाली में कमीशन की भी व्यवस्था की गई है, ताकि उनके भीतर अधिक से अधिक काम करने की ललक बनी रहे। प्रत्येक लेन-देन यानी ट्रांजेक्शन पर 30 प्रतिशत का लाभ होगा, तो उनमें पांच प्रतिशत डाक विभाग के पास रहेगा और 25 प्रतिशत डाकिए के खाते में जाएगा। इस तरह अगर किसी डाकिए को प्रतिदिन 30-40 रुपए की आमदनी होगी तो उसकी कोशिश अपनी आमदनी बढ़ाकर 50 रुपए करने की होगी। इस तरह काम को लेकर उसकी दिलचस्पी लगातार बनी रहेगी। इससे आईपीपीबी प्रणाली मजबूत होती जाएगी।  

० आईपीपीबी की कार्य-पद्धति क्या होगी? इस संबंध में कुछ बताएं?

यह देश के अन्य बैंकों की तरह सभी सुविधाएं अपने ग्राहकों को उपलब्ध कराएगा। लेकिन, इसकी बैंकिंग प्रणाली अन्य बैंकों से सरल होगी। ग्राहकों को अपने अकाउंट नंबर तक को याद रखना भी जरूरी नहीं होगा।

० पेमेंट बैंक में राशि रखने की एक सीमा है। आईपीपीबी में क्या कोई सीमा निर्धारित है?

पेमेंट बैंक में अधिकतम राशि रखने की सीमा एक लाख रुपये तक की है और रिजर्व बैंक से उनको ऋ ण देने की अनुमति भी नहीं है। लेकिन, हमारे पेमेंट बैंक को दूसरे फायदे प्राप्त हैं। चूंकि, यह डाक विभाग का बैंक है तो हमारे पास एक विशाल नेटवर्क है। देश के अत्यंत पिछड़े इलाकों तक विभाग की पहुंच है। इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक को डाकघरों में पहले से ही चल रहे 17 करोड़ डाक बचत खातों को भी खुद से जोड़ने की अनुमति मिल गई है। इस तरह यह एक लाख राशि वाली सीमा से आईपीपीबी मुक्त है। खाते में लाख रुपये से अधिक राशि होने पर उसे डाक बचत खातों से जोड़ने की व्यवस्था रखी गई है और उस पर चार प्रतिशत की दर से ब्याज भुगतान की व्यवस्था है।

० ऋण के लिए ग्रामीण लोगों को काफी परेशानियां उठानी पड़ती हैं। इस दिशा में आईपीपीबी की क्या योजना है?

अपने खाता धारकों को ऋ ण और बीमा उपलब्ध कराने के लिए विभाग ने थर्ड पार्टी से अनुबंध किया है। पंजाब नेशनल बैंक से हमारा अनुबंध है। इससे सुविधा यह होगी कि गांव में किसी व्यक्ति को 10 हजार रुपये की जरूरत है तो उसे घर बैठे वह ऋ ण उपलब्ध हो जाएगा। उस ऋ ण पर पंजाब नेशनल बैंक की तरफ से निर्धारित ब्याज दर ही लागू होगा। डाक विभाग की तरफ से उसमें कोई वृद्धि नहीं की जाएगी। पंजाब नेशनल बैंक के एजेंट के तौर पर डाक विभाग इस कार्य को करेगा। इसी तरह बीमा सुविधा के लिए बजाज आलियांज से अनुबंध किया गया है। यदि किसी को बीमा चाहिए तो उसकी भी सुविधा डाक विभाग उपलब्ध कराएगा।

० सभी बैंकों ने स्वयं को तकनीकि दृष्टि से काफी मजबूत किया है। अपने खाताधारकों की सुविधा को ध्यान में रखकर वे लगातार तकनीक में सुधार कर रहे हैं। इस दिशा में आईपीपीबी के मद्देनजर डाक विभाग की क्या तैयारियां हैं?

तकनीक को लेकर पिछले तीन सालों के दौरान डाक विभाग में भी काफी गहन कार्य हुए हैं। इस पर करीब 1200 करोड़ रुपए खर्च हुए हैं। कोर बैंकिंग सिस्टम डाकघरों में लगाए गए हैं। अब गांव का डाकिया भी एक डिवाइस लेकर चलता है और उसके जरिए काम करता है। अब तकनीक की दृष्टि से हमलोग कहीं पीछे नहीं हैं। आईपीपीबी के खाता धारक मोबाइल एप और माइक्रो एटीएम के जरिए भी बैंकिंग सुविधा प्राप्त कर सकते हैं। साथ ही एसएमएस और आईवीआरएस के जरिए भी बैंकिंग की सुविधा उपलब्ध कराएंगे। काउंटर की सुविधा के अलावा खाता धारकों को सुरक्षित डोर बैंकिंग की सुविधा भी उपलब्ध करा रहे हैं। यदि उन्हें नगद राशि की जरूरत है तो वह भी उपलब्ध कराने की सुविधा है।

० इसके लिए डाकिए को तकनीकी रूप से दक्ष करने की जरूरत होगी। उस दिशा में क्या प्रयास है?

अब तक 18,000 लोगों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। इसके साथ-साथ विभाग में मास्टर ट्रेनर नियुक्त किए गए हैं, जो लगातार प्रशिक्षण देने का काम करेंगे।

०बैंकिंग प्रणाली में तकनीक को लेकर लोगों में एक तरह का संशय रहता है। प्रणाली सरल भी नहीं होती है। तकनीक के निर्माण में क्या इन बातों की तरफ ध्यान रखा गया है?

पूरे विश्वास के साथ यह कह रहा हूं कि सबसे सरल और सर्वाधिक सुरक्षित प्रणाली हमने विकसित की है। यह ध्यान रखा गया है कि इसके उपयोग में ग्रामीण भारत के लोगों को कोई परेशानी न हो। वे सहजता से इसका उपयोग कर पाएं।

० डाक विभाग की इस बैंकिक व्यवस्था में आधार नंबर की महत्वपूर्ण भूमिका है। लेकिन कइयों के पास यह नंबर अभी नहीं है। उस दिशा में क्या तैयारी है?

डाकघरों को आधार नंबर बनाने वाली मशीन भी उपलब्ध करा दी गई है। अब लोग अपना आधार कार्ड भी डाकघर में बनवा पाएंगे। यदि पुराने आधार कार्ड नंबर में कोई संशोधन की जरूरत है तो वह भी कराया जा सकता है। फिलहाल 13 हजार स्थानों पर यह सुविधा उपलब्ध है। अब लोगों को आधार कार्ड नंबर के लिए परेशानी उठाने की जरूरत नहीं है। लोगों की इन जरूरत को भी डाकघर पूरा कर रहा है। आगे इसमें विस्तार ही होगा।

डाकिया बैंक लाया

इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक ग्रामीणों और गरीबों के दरवाजे पर बैंक को लाकर खड़ा कर देगा, जिससे एक बड़ा आर्थिक परिवर्तन होगा। पहली सितंबर को आयोजित कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने यह बात कही। वे आगे बोले, ‘हमारे मंत्री मनोज सिन्हा जी आईआईटी वाले हैं और स्वभाव से हर चीज को टेक्नोलॉजी से जोड़ देते हैं। इसलिए यह समारोह भी टेक्नोलॉजी से भरपूर है और यह इनिशिएटिव भी।प्रधानमंत्री डाक विभाग के पायलट प्रोजेक्ट इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक’ (आईपीपीबी) का शुभारंभ करते हुए अपनी बात रख रहे थे। स्थान दिल्ली का तालकटोरा स्टेडियम था।

केंद्र सरकार ने इस बैंक को ग्रामीण भारत में रहने वालों के लिए सुलभ, सस्ता और विश्वसनीय बताया है। प्रयोग के तौर 30 जनवरी, 2017 को इसकी दो शाखाएं रांची और रायपुर में खोली गई थीं। कुल 21 महीने के प्रयोग और पूरी तैयारी के साथ डाक विभाग ने आईपीपीबी का शुभारंभ किया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और संचार मंत्री मनोज सिन्हा समेत पांच लाख से अधिक लोग अब तक इस बैंक के खाता धारक बन चुके हैं। यह ग्रामीण भारत को बैंकिंग सेवा से जोड़ने की बड़ी कोशिश है। इसके लिए डाक विभाग ने तीन लाख से ज्यादा डाकिये और डाक सेवकों को सक्रिय किया है। साथ ही अगले 90 दिनों में देश के 1.55 लाख डाकघरों को आईपीपीबी से जोड़ने का लक्ष्य रखा है। प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘हमारी सरकार ने पहले जनधन के माध्यम से करोड़ों गरीब परिवारों को पहली बार बैंक तक पहुंचाया और इस पहल से हम बैंक को गांव और गरीब के दरवाजे तक पहुंचाने का काम आरंभ कर रहे हैं। आपका बैंक आपके द्वार परयह सिर्फ एक घोष वाक्य नहीं है- यह हमारा वादा है।’’ सरकार ने यह जानकारी दी कि पहली सितंबर को ही देश के 650 जिलों में इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक की शाखाएं प्रारंभ कर दी गई हैं। अब डाकिया चिट्ठी के साथ-साथ बैंक लेकर भी देहरी तक पहुंच रहा है।

आईपीपीबी की चर्चा घर-घर है। केंद्रीय संचार राज्यमंत्री मनोज सिन्हा कहते हैं- ‘‘जनधन योजना, यूनिक पहचान पत्र आधार, मोबाइल और पोस्टल पेमेंट्स बैंक यानी जे यू एस और पी को मिला दें तो जंप बनता है। इस जंप से आर्थिक मोर्चे पर ऐसी उछाल आने वाली है, जिससे हर नागरिक बैंकिंग सेवाओं से जुड़ जाएगा।’’ स्मरण रहे कि यह विश्व का सबसे बड़ा बैंकिंग नेटवर्क होगा, जिसका ध्यान खासकर भारतीय ग्रामीण क्षेत्रों पर होगा। इसकी खासियत यह भी है कि लेसकैश अर्थव्यवस्था की दिशा में उठाया गया ये प्रभावपूर्ण कदम है। ध्यान होगा कि देश में भ्रष्टाचार को रोकने के लिए प्रधानमंत्री ने मई 2016 में लेसकैश अर्थव्यवस्था की बात कही थी। अब देखना है कि जन आकांक्षा पर यह कितना खरा उतरता है। वैसे इस योजना में भारत की तस्वीर बदलने के तत्व मौजूद हैं।

० केंद्र सरकार लगातार रोजगार के सृजन की बात कर रही है। इस योजना में क्या नए रोजगार के सृजन की संभावना है?

अभी 3,500 लोगों की सीधे नियुक्ति हुई है। फाइनेंशियल लिटरेसी का बड़ा कार्यक्रम देश भर में चलाया जा रहा है, उसमें भी बड़ी संख्या में लोग लगेंगे। इस तरह रोजगार के अवसर पैदा हो रहे हैं और लोगों को रोजगार मिल रहा है।

० इस योजना के प्रचार-प्रसार के लिए क्या कोई ब्रांड एंबेसडर भी बनाया गया है?

डाकिए ही हमारे ब्रांड एंबेसडर हैं। वैसे भी डाक विभाग की विश्वसनीयता आज भी बनी हुई है। उसका लाभ हमें मिलने वाला है।

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