साल 2019 से जेईई मेंस की परीक्षा में कई बदलाव होने जा रहे हैं। इंडियन इंस्टिट्यूट आॅफ टेक्नोलॉजी समेत इंजीनियरिंग कॉलेजों में एडमिशन के लिए आयोजित होने वाले जॉइंट एंट्रेंस एक्जाम में दो बड़े बदलाव होंगे। यह छात्रों के लिए राहतभरे साबित हो सकते हैं। पहला बदलाव रैंकिंग से जुड़ा है और दूसरा परीक्षा के माध्यम और फॉर्मेट से। अब नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी एनटीए साल में दो बार इस परीक्षा का आयोजन कराएगी। पहला सत्र 6 से 20 जनवरी और दूसरा सत्र 7 से 21 अप्रैल के बीच संपन्न होगा। यानी 14 दिन परीक्षा का आयोजन होगा। हर दिन कई सत्र होंगे। इसके साथ ही परीक्षा कंप्यूटर आधारित होगी। वहीं दूसरा बदलाव रैंकिंग से संबंधित है। इसमें अकसर कंफ्यूजन की स्थिति रहती थी। पहले रैंकिंग का निर्धारण छात्रों द्वारा परीक्षा में प्राप्त अंकों के आधार पर होता था। लेकिन अब पर्सेंटाइल स्कोर को आधार बनाया जाएगा। इसके चलते अब रैंकिंग के लिए एनटीए स्कोर का सहारा लिया जाएगा। इसके बाद भी रैंकिंग का निर्धारण न होने पर छात्रों की उम्र को भी देखा जाएगा।

 

 

 

 

 

साल 2019 से जेईई मेंस की परीक्षा में कई बदलाव होने जा रहे हैं। इंडियन इंस्टिट्यूट आॅफ टेक्नोलॉजी समेत इंजीनियरिंग कॉलेजों में एडमिशन के लिए आयोजित होने वाले जॉइंट एंट्रेंस एक्जाम में दो बड़े बदलाव होंगे। यह छात्रों के लिए राहतभरे साबित हो सकते हैं। पहला बदलाव रैंकिंग से जुड़ा है और दूसरा परीक्षा के माध्यम और फॉर्मेट से। अब नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी एनटीए साल में दो बार इस परीक्षा का आयोजन कराएगी। पहला सत्र 6 से 20 जनवरी और दूसरा सत्र 7 से 21 अप्रैल के बीच संपन्न होगा। यानी 14 दिन परीक्षा का आयोजन होगा। हर दिन कई सत्र होंगे। इसके साथ ही परीक्षा कंप्यूटर आधारित होगी। वहीं दूसरा बदलाव रैंकिंग से संबंधित है। इसमें अकसर कंफ्यूजन की स्थिति रहती थी। पहले रैंकिंग का निर्धारण छात्रों द्वारा परीक्षा में प्राप्त अंकों के आधार पर होता था। लेकिन अब पर्सेंटाइल स्कोर को आधार बनाया जाएगा। इसके चलते अब रैंकिंग के लिए एनटीए स्कोर का सहारा लिया जाएगा। इसके बाद भी रैंकिंग का निर्धारण न होने पर छात्रों की उम्र को भी देखा जाएगा।

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