दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (डूसू) चुनाव के नतीजे 13 सितंबर को घोषित कर दिये गये। इस चुनाव में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने डूसू के चार में से तीन प्रमुख पदों पर जीत हासिल की। अध्यक्ष पद जीतने वाले एबीवीपी उम्मीदवार अंकिव बसोया को 20,467 वोट मिले। वहीं उपाध्यक्ष पद के एबीवीपी उम्मीदवार शक्ति सिंह को 23,046 मिले। संयुक्त सचिव पद जीतने वाली एबीवीपी उम्मीदवार ज्योति चौधरी को 19,353 वोट हासिल हुए हैं। सचिव पद जीतने वाले नेशनल स्टूडेंट यूनियन आॅफ इंडिया (एनएसयूआई) के उम्मीदवार आकाश चौधरी को 20,198 वोट प्राप्त हुए। सभी को मिलाकर नोटा पर 27,729 मत पड़े। पिछले वर्ष एबीवीपी चुनावी गणित में अध्यक्ष पद हार गई थी, ऐसे में डूसू चुनाव में तीन पदों पर जीतकर उसने वापसी कर ली है। यह जीत एबीवीपी के साथ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के लिए भी अहम है।

एबीवीपी की यह जीत कितनी महत्वपूर्ण है इसका अंदाजा इस बात से लगया जा सकता है कि बीजेपी के बड़े-बड़े नेता इस जीत को बीजेपी के लिए संजीवनी मान रहे हैं।

भले ही एबीवीपी ने ये तीनों सीटें अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी एनएसयूआई से करीबी लड़ाई लड़कर हसिल की हो लेकिन इस परिणाम ने ईवीएम की बहस को ताजा कर दिया है। दिल्ली सरकार के मंत्री और आप के दिल्ली इकाई के अध्यक्ष गोपाल राय कहते हैं कि एक तरफ सरकार और चुनाव आयोग द्वारा भरोसा दिया जा रहा है कि ईवीएम हर तरह से सुरक्षित है और इससे स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव कराया जा सकता है। मगर बीजेपी की केंद्र सरकार डूसू चुनाव सुचारू और पारदर्शी रूप से नहीं करा सकती है। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि पूरे देश में एक साथ चुनाव कराने का नारा वास्तव में लागू करने के लिए है या देश को धोखा देने के लिए है।एबीवीपी की यह जीत कितनी महत्वपूर्ण है इसका अंदाजा इस बात से लगया जा सकता है कि बीजेपी के बड़े-बड़े नेता इस जीत को बीजेपी के लिए संजीवनी मान रहे हैं। दिल्ली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष विजेंद्र गुप्ता का कहना है कि ईवीएम को लेकर कांग्रेस व आम आदमी पार्टी के हंगामे से यह साबित होता है कि दोनों ही पार्टियां अपनी हार पचाने में असमर्थ हैं। दोनों ही पार्टियां हार का ठीकरा ईवीएम पर फोड़े में माहिर हो गई हैं। विद्यार्थियों ने उनके दुष्प्रचार का करारा जवाब दिया है।

आम आदमी पार्टी के साथ  यूथ कांग्रेस ने भी डूसू चुनाव में ईवीएम की गड़बड़ी पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। जिस ईवीएम में गड़बड़ी की शिकायत के बाद मतगणना रोकी गई थी, उस पर यूथ कांग्रेस ने सवाल खड़े किए हैं। यूथ कांग्रेस का कहना है कि जब 8 उम्मीदवार ही मैदान में थे तो 10 वोट कहां से पड़े। देश आखिर कब तक ईवीएम को बर्दाश्त करेगा? एक बार फिर लोकतंत्र की हत्या हुई?  

० अंकिव बसोया अध्यक्ष (एबीवीपी) 20,467 वोट

० सन्नी छिल्लर (एनएसयूआई) 18,743 वोट

० शक्ति सिंह उपाध्यक्ष (एबीवीपी) 23,046 वोट

० लीना (एनएसयूआई), 15337 वोट

० आकाश चौ. सचिव (एनएसयूआई) 20,198 वोट

० सुधीर डेढ़ा (एबीवीपी) 14,109 वोट

० ज्योति चौ. संयुक्त सचिव (एबीवीपी) 19,353 वोट

० सौरभ यादव (एनएसयूआई) 14,381 वोट

हालांकि चुनाव आयोग के अधिकारी मनोज कुमार का कहना है कि चुनाव आयोग या राज्य चुनाव आयोग ने डीयू को कोई ईवीएम जारी नहीं किया था। उनका कहना है कि डीयू ने प्राइवेट तरीके से मशीनें खरीदी हैं। इसीलिए चुनाव आयोग नें डीयू की तरफ से विस्तृत रिपोर्ट मांगी हैं लेकिन अभी तक इसका कोई जवाब उन्हें मिला नहीं है। ईवीएम विवाद पर डीयू अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार चुनाव आयोग एम-2 सीरीज की ईवीएम इस्तेमाल करता है। अब एम-3 सीरीज की ईवीएम आ रही हैं। जो टेम्पर प्रूफ हैं, सारा डिजाइन और सिस्टम अलग है। डीयू की ईवीएम चुनाव आयोग की नहीं है।

ईवीएम विवाद पर एबीवीपी के नेशनल ज्वाइंट सेक्रेटरी श्रीनिवास कहते हैं कि हम इस बहस में पड़ने की जगह छात्र हित के मुद्दों पर अपना ध्यान दे रहे हैं। एबीवीपी छात्र संघ का 50 फीसदी बजट महिलाओं और सामाजिक न्याय से संबंधित गतिविधियों पर खर्च करने, खेलों को बढ़ावा देने और कॉलेज परिसरों में सैनिटरी पैड वेंडिंग मशीनें लगाने का वादा करके इस चुनाव को जीता है। इस लिए हमारी प्राथमिकता चुनाव में किये वादों को जल्द से जल्द पूरे करने की है। हमसे इससे फर्क नहीं पड़ता कि विपक्षी अपनी हार की नाकामयाबी किन बाते से छुपा रहे हैं। मैंने चुनाव के पहले भी कहा था कि आइसा और सीवाईएसएस का गठबंधन अर्बन नक्सल का गठबंधन है। परिणाम का असर उस पर भी साफ देखा जा सकता है।

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