Photo:-Jay Mandal/On Assignment

शिकागो धर्म संसद में स्वामी विवेकानंद के संबोधन की 125वीं जयंती पर दुनिया भर में एक बार फिर संदेश दिया गया कि वसुधैव कुटुम्बकम्और सर्वधर्म समभावका पाठ हिंदुत्व की ही देन है। इसके लिए ऋ षि-मनीषियों ने कुछ अलग से उद्यम नहीं किया, बल्कि इसके लिए हिंदुत्व को एक जीवन पद्धति के रूप में अंगीकार करते हुए इस अमल करने की शिक्षा दी है। यही हिंदुत्व की पहचान है।

शिकागो में 7 से 9 सितंबर के बीच विश्व के छह महाद्वीप से 2500 प्रतिनिधियों और एक सौ से अधिक वक्ताओं ने इस महासम्मेलन में भाग लिया। और गीता के तीसरे अध्याय के दो शब्दों ‘‘सुमंत्रिते सुविक्रांते’’ का अनुसरण करते हुए विभिन्न सात सम्मेलनों के जरिए स्वदेश लौट कर मिलजुल कर सोचने और लक्ष्य की ओर बढ़ने का संकल्प लिया। इस सम्मेलन का आयोजन मूलत: राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की प्रेरणा से किया गया, लेकिन इसके रचनाकार आई आई टी, खड़गपुर से अभियांत्रिक स्रातक विज्ञानानंद को बताया जाता है। स्वामी विज्ञानानंद की ख़ूबी यह है कि वह मंच से परहेजÞ करते हैं और परदे के पीछे बीसियों घंटा प्रतिदिन काम करते हैं। एक साथ एक छत के नीचे हर चार साल बाद महासम्मेलन में एक साथ सात सम्मेलन के आयोजन की जिÞद भी इन्हीं स्वामी महाशय की थी। कहते हैं: कौटिल्य अर्थशास्त्र के अनुसार अर्थ प्रधान है और शेष उसके इर्द-गिर्द चक्कर लगाते हैं।

शिकागो में 7 से 9 सितंबर के बीच विश्व के छह महाद्वीप से 2500 प्रतिनिधियों और एक सौ से अधिक वक्ताओं ने इस हिंदू कांग्रेस में भाग लिया। जहां स्वामी विवेकानंद की 125वीं जयंती पर ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ और ‘सर्वधर्म समभाव’ का संदेश दिया गया।

इस सम्मेलन के मेजबानी के लिए गठित विश्व हिंदू परिषद आॅफ अमेरिका समिति ने कितना धन बटोरने में सफलता पाई, इसके बारे में तो कोई अधिकृत जानकारी नहीं मिल पाई, लेकिन समापन के दिन दो लाख डालर से दस लाख डालर देने वाले प्रायोजक एक दर्जन से अधिक रहे होंगे। इन्हें मंच पर बुला कर एक सुंदर शाल भेंट कर सम्मानित किया गया। शिकागो स्थित अग्रणी गुजराती चिकित्सक भरत भराई की सराहना करनी होगी कि उन्होंने पांच सितारा होटल में शानदार महासम्मेलन में अग्रणी भूमिका निभाने में कोई चूक नहीं की। उनकी विशेषता है कि बड़े सम्मेलन के लिए उन्हें याद किया जाता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मेडिसिन एसक्वायेर के भी अग्रणी मेजबान  डॉक्टर भारत भराई ही थे।

ये सात सम्मेलन हैं: आर्थिक, शिक्षा, मीडिया, राजनैतिक, धार्मिक संगठन, पुरुष और महिला। इन सातों सम्मेलन का लक्ष्य भी एक हैं–एक साथ सोचें और कÞदमताल करते हुए आगे बढ़ें। कहने की आवश्यकता नहीं है आज हमारे जीवन के लिए बेशक अर्थ प्रधान है। लेकिन हिंदू समाज अपनी जीवन पद्धति में जीते हुए अपनी पहचान बना कर समाज के हर क्षेत्र में कैसे आगे बढ़े, यह विचार का मुद्दा है। अभी यह महासम्मेलन प्रारंभिक दौर में, अर्थात द्वितीय महासम्मेलन है, इसलिए सिविल सोसाइटी में प्रतिनिधित्व का अंश निर्धारित कर चलना उचित नहीं है। सम्मेलन की आत्मा वे दो सौ कार्यकर्ता थे, जो पिछले छह महीनों से अनवरत निशुल्क काम कर रहे थे। हालांकि सम्मेलन में अस्वस्थता के कारण दलाई लामा, श्री श्री रविशंकर, गायत्री परिवार के प्रमुख प्रणव पांड्या और जीटीवी के मुखिया सुभाष चंद्रा और नीति आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष अरविंद पानगढ़िया सहित कुछेक भाजपा नेता नहीं आ सके। अगला महासम्मेलन चार साल बाद 4 से 6 नवंबर 2022 में बैंकाक में होगा।  

इस महासम्मेलन के उद्घाटन के अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सर संघचालक मोहन भागवत मौजूद थे। उन्होंने एक घंटे के संबोधन में मुख्यत: तीन बातों की विस्तार से चर्चा की। एक, अलग-अलग पहचान रखते हुए मानवता, समाज और राष्ट्र हित में एक जुट हो कर काम करना। दो, गीता के तीसरे अध्याय में सुमंत्रिते सुविक्रांतेअर्थात् सामूहिक निर्णय में विश्वास रखना और तीन, संगठन में शक्ति है। इस संदर्भ में श्री भागवत ने जोर देते हुए कहा कि जंगल में शेर अकेला रहता है तो जंगली कुत्तों का समूह उसे नोच-नोच कर खा भी सकता है। उन्होंने कहा कि हिंदुत्व एक जीवन पद्धति है। समापन पर उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू थे। उन्होंने भी हिंदुत्व को जीवन पद्धति के साथ जोड़ कर देखने का आह्वान करते हुए कहा कि इससे अलग देखना और विचार करना भ्रामक होगा। उन्होंने कहा कि हिंदुत्व का अनुसरण करने वाले वसुधैव कÞुटुम्बकम्और सर्वधर्म समभाववाले मनुष्य चींटी को भी नुकसान नहीं पहुंचा सकते। उन्होंने सवाल किया कि भारत ने कभी किसी देश पर हमला किया हो तो बता दें। देर शाम उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने भारतीय दूतावास की ओर से शिकागो डाउन टाउन में आर्ट गैलरी के टाउन हाल में अपने घंटे भर के संबोधन में कहा कि दुनिया भर के निवेशक भारत में निवेश के लिए अनुकूल माहौल देख कर उत्सुक हैं। यह वही टाउनहाल था, जहां स्वामी विवेकानंद ने संबोधन किया था। उन्होंने वहां मोदी सरकार की नीतियों की भी सराहना की। इस महासम्मेलन की एक और उपलब्धि यह रही कि इलिनोईस गवर्नर ब्रूस रवणेर ने स्वामी विवेकानंद के ऐतिहासिक उद्बोधन के दिन 11 सितंबर को स्वामी विवेकानंद दिवस घोषित कर दिया।

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