पंचायती राज, ग्रामीण विकास व पशुपालन मंत्री वीरेंद्र कंवर प्रदेश की कुटलैहड़ विधानसभा का पंद्रह साल से लगातार प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। यह शायद पहला अवसर होगा, जब हिमाचल में पंचायत का उपप्रधान और जिला परिषद सदस्य उसी विभाग का मंत्री बना। प्रदेश में पंचायतों को सुदृढ़ करने की जिम्मेदारी अब वीरेंद्र कंवर पर है। गाय संरक्षण की महत्वाकांक्षी योजना का भार भी इन्हीं के पास हैं। राज्य आज बेसहारा पशुओं की समस्या से जूझ रहा है। ऐसी बहुत सी समस्याओं और योजनाओं पर वीरेंद्र कंवर से सुनील शुक्ला ने बातचीत की है। प्रस्तुत है इस बातचीत के प्रमुख अंश।


० सरकार की आठ महीनों की उपलब्धियां क्या हैं?

जयराम ठाकुर के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार पहले ही दिन से गांव व गरीब के लिए समर्पित है। पार्टी ने जो वादे लोगों से किए, उन्हें पूरा किया जा रहा है। गृहणी सुरक्षा योजना, युवा आजीविका योजना, युवा स्वावलंबन योजना, गांव के विकास के लिए लोकभवन योजना सहित 30 नई योजनाएं वर्तमान सरकार ने शुरू की हैं। इसके कारण सरकार की लोकप्रियता बढ़ी है।

० पंचायती राज एवं ग्रामीण विकास व पशुपालन विभाग सीधे गांव की जनता से जुड़े हुए हैं। इनके लिए आपका विभाग क्या कर रहा है।

जब मुझे विभाग की जिम्मेदारी दी गई तो मैंने पाया कि विभाग में व्यवस्था का अभाव है। तब मैंने प्रदेश स्तर पर अधिकारियों के साथ बैठक की। जो कठिनाइयां थीं, उनका सरलीकरण किया। पंचायतों के सीमेंट, मनरेगा और जमीन के मामलों को हल किया। अब पंचायती राज गांव के वार्ड में बड़े-बड़े काम करेगा। जिसकी हर तीन महीने बाद समीक्षा की जाएगी। अब पंचायत सड़कों और बावड़ियों से ऊपर उठ कर लोगों को आर्थिक दृष्टि से मजबूत बनाने की  दिशा में काम करेगा।

० आपकी अगामी योजना क्या है?

गांवों में 60 फीसदी से अधिक काम जल संरक्षण और जल संग्रहण के अंतर्गत करेंगे, ताकि किसानों के लिए पीने का पानी और सिंचाई की आवश्यकता को पूरा किया जा सके। साथ में पर्यावरण का संरक्षण भी होगा। हर तीन महीने में एक बड़ा चैक डैम, तालाब, टैंक बनाकर सूक्ष्म सिंचाई की योजना भी शुरू करने जा रहे हैं।

० मनरेगा का प्रदर्शन अच्छा रहा है। इसका और विस्तार कैसे हो सकता है?

शुरुआत में कई खामियां थी। इसके कार्यक्षेत्र को 160 से बढ़ाकर 240 किया गया है। पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए पर्यटन स्थल विकसित करने का भी मनरेगा में प्रावधान किया गया है। साथ ही मनरेगा में दिहाड़ी बढ़ाने के प्रस्ताव को केन्द्र भेजा गया है।

० हिमाचल में गौवंश की स्थिति अच्छी नहीं है। खासकर बेसहारा गौवंश की संख्या 30 हजार पार कर गई है?

सरकार गौ सेवा आयोग बनाने जा रही है। इसमें प्रदेश के मंदिर ट्रस्टों की कुल आय का 15 फीसदी गौ सेवा आयोग को जाएगा। इसके अतिरिक्त गौ सेवा के लिए शराब की प्रति बोतल पर एक रुपया कर भी लगाया है। हिमाचल में गौशालओं की क्षमता 10 हजार है। जबकि बेसहारा पशुओं की संख्या 20 हजार बची हुई है। बेसहारा गौवंश में अधिकतर बैल हैं। ट्रैक्टर के आने के बाद लोग बैलों को छोड़ते जा रहे हैं। इससे बेसहारा पशुओं की समस्या खड़ी हो रही है।

० यहां आज भी दूध की सप्लाई पंजाब-हरियाणा से होती है। दूध के मामले में हिमाचल कब आत्मनिर्भर बनेगा।

हिमाचल के मर्ज एरिया (1966 के बाद पंजाब से हिमाचल में आए क्षेत्र) में लोग भैंस पालते हैं। इसलिए हमने केन्द्र को योजना भेजी है कि यहां मुर्रा भैंसों का फार्म खोला जाए। जबकि हिमाचल के पहाड़ी क्षेत्रों में गाय की अच्छी किस्म का संवर्धन करेंगे।

० हिमाचल में मछली पालन की आपार संभावनाएं हैं। सरकार की इस दिशा में क्या योजना है?

हिमाचल की जलवायु ट्राउट मछली के लिए उपयुक्त है। 90 नई ट्राउट ईकाइयां बनाई जा रही हैं। मछली के बीज तैयार करने के पांच नई ईकाइयां निजी क्षेत्र में लगाई जाएंगी।

० आप हमीरपुर, ऊना और बिलासपुर इन तीन जिलों से एकमात्र मंत्री हैं। क्या इन क्षेत्रों के लोगों का आप पर अधिक दबाव है?

मंत्री बनने के बाद मेरे ऊपर इन तीन जिलों का ही नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश की जिम्मेदारी है। सभी मिलजुल कर काम को आगे बढ़ा रहे हैं।  

कोई जवाब दें

Please enter your comment!
Please enter your name here