म्मू-कश्मीर में कई वर्षों से लंबित स्थानीय निकाय और पंचायत चुनाव का ऐलान राज्यपाल शासन के दौरान हो चुका है। निकाय चुनाव चार चरणों में होगा। पहला चरण आठ अक्टूबर को संपन्न हुआ और अंतिम चरण 16 अक्टूबर को होगा। वोटों की गिनती 20 अक्टूबर को होगी। राज्य में स्थानीय निकायों के अंतिम बार चुनाव 2005 में हुए थे और 2010 में इनका कार्यकाल समाप्त हो गया था। राज्य में तेरह साल बाद स्थानीय निकाय और सात साल बाद पंचायत चुनाव होने जा रहे हैं। इसके साथ ही आदर्श आचार संहिता तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है। जम्मू नगर निगम के लिए मतदान पहले चरण का चुनाव आठ अक्टूबर हुआ। जबकि श्रीनगर नगर निगम का मतदान पहले चरण से लेकर अंतिम चरण तक चलेगा। राज्यपाल सत्यपाल मलिक के नेतृत्व में 31 अगस्त को हुई राज्य प्रशासनिक परिषद की बैठक में राज्य में स्थानीय निकाय व पंचायतों के चुनाव कराने का फैसला लिया गया था लेकिन नेशनल कांफ्रेंस और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी द्वारा अनुच्छेद 35-ए के मुद्दे पर चुनावों का बहिष्कार का ऐलान किए जाने के बाद इन चुनावों को स्थगित करने की अटकलें तेज हो गई थीं परन्तु मुख्य निर्वाचन अधिकारी शालीन काबरा ने इन अटकलों पर पूर्ण विराम लगा दिया।

अनुच्छेद 35 ए को लेकर चुनाव का बहिष्कार करने वाली राजनीतिक पार्टियों के अंदर ही बगावत के सुर तेज हो गए हैं। यह इस बात का संकेत है कि राज्य की जनता भी चुनाव और विकास की हिमायती है।

राज्य प्रशासन व सुरक्षा एजेंसियों ने शांत और सुरक्षित माहौल में निष्पक्ष मतदान संपन्न कराने के लिए सभी प्रकार के सुरक्षा प्रबंध कर लिए हैं। वहीं विस्थापित कश्मीरी पंडित मतदाता अपने संबंधित वार्ड के आधार पर निर्धारित कार्यक्रम के मुताबिक पोस्टल बैलेट या ईवीएम के जरिये मतदान करेंगे। पीडीपी व नेशनल कांफ्रेंस द्वारा इन चुनावों का बहिष्कार करने के बावजूद इन चुनावों के लिए राज्य में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। भाजपा, कांग्रेस, पैंथर्स पार्टी, शिव सेना व बहुजन समाज पार्टी सहित विभिन्न राजनीतिक दल इन चुनावों में अपने-अपने उम्मीदार उतार चुके हैं। इसके अलावा निर्दलीय उम्मीदवार भी जोर-शोर से मैदान में उतरे हैं।

पहला चरण संपन्न

पहले चरण में जम्मू संभाग की जम्मू नगर निगम सहित बिश्नाह, आरएसपुरा, घो मन्हासा, अरनिया, अखनूर, ज्योड़ियां, खौड़, राजौरी, थन्नामंडी, सुंदरबनी, पुंछ, कालाकोट व सुरनकोट में चुनाव हुआ। वहीं कश्मीर में पहले चरण में कुपवाड़ा, हंदबाड़ा, बांदीपोरा, बडगाम, चाडूरा, देवसर, अच्छाबल, कोकरनाग, कांजीगुंड, कारगिल, लेह व बरामुला में मतदान हुआ। इसी के साथ श्रीनगर नगर निगम के कुछ वार्डों में भी पहले चरण का मतदान हुआ।

35ए के मुद्दे को लेकर स्थानीय निकाय चुनाव का बहिष्कार करने वाली नेशनल कांफ्रेंस व पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी का चारों ओर विरोध हो रहा है। जम्मू संभाग में इन दोनों दलों के लिए मुश्किलें पैदा हो गई हैं। जम्मू संभाग से इन पार्टियों के कार्यकर्ता बागी तवेर दिखा चुके हैं और कुछ निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतर आए हैं। वहीं पीडीपी के संभागीय प्रधान रहे सन्नी संग्राल के चुनाव लड़ने की घोषणा करने के बाद पार्टी ने स्पष्ट कर दिया कि जो कार्यकर्ता पार्टी के फैसले के खिलाफ चुनाव लड़ेगा, उसे बाहर का रास्ता दिखा दिया जाएगा। पार्टी महासचिव फकीर चंद भगत ने कहा कि पार्टी ने जन हित में 35ए के मुद्दे को लेकर चुनाव बहिष्कार का फैसला किया है। केंद्र सरकार अपना रवैया स्पष्ट करे।

चुनावी गतिविधियां

जम्मू संभाग में नेकां व पीडीपी के कार्यकर्ताओं की पूरी कोशिश है कि उन्हें निर्दलीय रूप से भाग्य आजमाने दिया जाए। यहां चुनावों को लेकर सरर्गिमयां तेज हो गई है और सभी दलों के दिग्गजों ने चुनाव प्रचार की कमान संभाली ली है। प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्यमंत्री डॉ.जितेन्द्र सिंह भी इन चुनावों के लिए कई जगहों पर भाजपा उम्मीदवारों के पक्ष में प्रचार कर चुके हैं। इसके अलावा भाजपा के पूर्व उपमुख्यमंत्री और विधायक कविन्द्र गुप्ता, पूर्व मंत्री व विधायक सत शर्मा, विधायक राजेश गुप्ता, कांग्रेस के पूर्व विधायक रमन भल्ला, मुलाराम, कांग्रेस के जिला प्रधान विक्रम मल्होत्रा, पैंथर्स पार्टी के चेयरमैन हर्षदेव व अन्य नेता जोर-शोर से अपने उम्मीदवारों के पक्ष में प्रचार में जुटे हुए हैं। अब तक चार चरणों के लिए राज्य के 22 जिलों में 3400 उम्मीदवारों ने नामांकन पत्र दाखिल किए हैं। इनमें से पहले चरण में 422 वार्डों के लिए 1283 व दूसरे चरण के लिए 1177 उम्मीदवार मैदान में हैं। नेकां व पीडीपी द्वारा इन चुनावों से बाहर हो जाने के बाद राज्य में मुख्य मुकाबला भाजपा व कांग्रेस के बीच है।

आतंकियों और अलगाववादियों के चुनाव बहिष्कार के फरमान के बीच कश्मीर में निकाय चुनव में भाजपा नया इतिहास रचती नजर आ रही है। पहले चरण में शामिल कश्मीर के 11 नगर निकायों और श्रीनगर नगर निगम के तीन वार्डों के लिए पहले चरण के मतदान से पहले ही उसके पांच प्रत्याशी निर्विरोध निर्वाचित हो गए हैं। यह पहला मौका है जब कश्मीर में निकाय चुनावों में भाजपा के प्रत्याशी किसी जगह जीतेंगे और वह भी निर्विरोध। भाजपा के निर्विरोध निर्वाचित होने वाले पांच में से तीन उम्मीदवार दक्षिण कश्मीर में आतंकवाद का मजबूत किला कहे जाने वाले कुलगाम और देवसर नगर निकाय से हैं। दो अन्य जिला अनंतनाग के अंतर्गत आने वाले अच्छाबल नगर समिति से।

इसके अलावा भी कई जगह से भाजपा के प्रत्याशी निर्विरोध जीतेंगे। इस बीच अनंतनाग नगर परिषद के चुनाव के लिए 36 प्रत्याशियों ने नामांकन जमा कराए हैं। कुलगाम में 13 वार्ड हैं। देवसर के एक वार्ड में सतीश कुमार जुत्शी, अच्छाबल नगर निकाय के दो वार्डों में उमला बाली और ऋषभ बाली, कुलगाम के दो वार्डों में ज्योति गोसानी और बबलू गोसानी के खिलाफ कोई दूसरा प्रत्याशी नहीं है। दूसरे चरण के चुनावों में शामिल अनंतनाग नगर परिषद के 25 वार्डों के लिए 36 उम्मीदवारों ने अपने नामांकन जमा कराए हैं। इनमें भाजपा के 11, कांग्रेस के 21 और चार निर्दलीय हैं। दूसरे चरण का मतदान 10 अक्टूबर को है।

अनंतनाग नगर परिषद के चुनावों में कांग्रेस के प्रदेश सचिव हिलाल अहमद शाह और भाजपा के जिला प्रमुख रफीक वानी भी बतौर उम्मीदवार अपना भाग्य आजमा रहे हैं। दोनों ने अपनी जीत का दावा करते हुए कहा कि उन्हें आतंकियों व अलगाववादियों का कोई डर नहीं है।

अतिरिक्त वेतन

जम्मू कश्मीर में हो रहे निकाय व पंचायत चुनावों में डयूटी देने वाले सरकारी अधिकारियों व कर्मियों को राज्य सरकार ने एक माह का अतिरिक्त वेतन देने का ऐलान किया है। राज्य के मुख्यसचिव बीवीआर सुब्रमण्यम ने कहा है कि मतदान ड्यूटी देने वालों को एक माह का अतिरिक्त वेतन मिलेगा तथा चुनाव लड़ने वाले सभी प्रत्याशियों को पर्याप्त सुरक्षा प्रदान की जाएगी। श्रीनगर नगर निगम के चुनावों में हिस्सा लेने वाले प्रत्याशियों को श्रीनगर शहर में सुरक्षित आवास प्रदान करने के इरादे से होटलों में 300 कमरे बुक कराए गए हैं। इसी तरह के प्रबंध दक्षिण और उत्तरी कश्मीर में चुनावों में हिस्सा लेने वाले उम्मीदवारों के लिए किए गए हैं। राज्य में चार चरणों में होने वाले निकाय चुनाव आठ अक्टूबर से शुरू होकर 17 नवंबर से नौ चरणों में पंचायत चुनाव होंगे। पंचायत चुनाव की प्रक्रिया 11 दिसंबर तक चलेगी। 17 दिसंबर तक चुनाव प्रक्रिया पूरी करनी है। 23 अक्टूबर को पंचायत चुनाव के पहले चरण के लिए अधिसूचना जारी की जाएगी। दूसरी ओर निकाय चुनाव 20 अक्टूबर को मतगणना के साथ संपन्न होंगे। ऐसे में अक्टूबर के दूसरे सप्ताह से शुरू होकर दिसंबर के दूसरे सप्ताह तक चलने वाली चुनाव प्रक्रिया को कामयाब बनाने के लिए सरकार ने उचित कदम उठाए हैं।

चार दशक बाद 2011 में जब जम्मू-कश्मीर में पंचायत चुनाव हुए थे। उस समय भी राज्य के हालात बहुत अच्छे नहीं थे। आतंकियों द्वारा चुनावों के बहिष्कार और उम्मीदवारों को जान से मारने की धमकियों के बीच 4130 सरपंचों और 29719 पंचों के लिए हुए चुनाव में अस्सी प्रतिशत मतदान हुआ था। इसी तरह साल 2005 में स्थानीय निकायों के लिए पीडीपी-कांग्रेस गठबंधन सरकार के समय में अंतिम बार चुनाव हुए थे। वर्ष 2010 के बाद से इन चुनावों की प्रतीक्षा हो रही थी जो अब राज्यपाल सत्यपाल मलिक की हरी झण्डी से संपन्न हो रहा है।

राज्य में राज्यपाल शासन लागू होने के कुछ दिन बाद ही तत्कालीन राज्यपाल एनएन वोहरा ने निकाय और पंचायत चुनावों के लिए राज्य प्रशासन को तैयारियां शुरू करने के निर्देश दे दिए थे। वोहरा के जाने के बाद नियुक्त हुए राज्यपाल सत्यपाल मलिक पर पीडीपी और नेकां ने अनुच्छेद-35ए के बहाने चुनाव टालने का दबाव जरूर बनाया परंतु उन्होंने यह साफ कर दिया कि अनुच्छेद.-35ए का इन चुनावों से कोई लेना देना नहीं है और चुनाव समय पर होंगे। सत्यपाल मलिक ने कहा ये चुनाव न तो मेरे लिए हैं और न ही दिल्ली के लिए बल्कि आम कश्मीरियों के लिए हैं।

पाकिस्तान की शह पर काम कर रहे आतंकवादी और अलगाववादी चुनावों में खलल डालने की पूरी कोशिश कर रहे हैं। आतंकवादी अब तक लगभग 10 पंचायत घरों को जला चुके हैं। अलगाववादी भी चुनावों के बहिष्कार के लिए अभियान चलाए हुए हैं। वहीं प्रशासन का यह प्रयास है कि चुनावों में अधिकांश मतदाता भाग लें और इसके लिए सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेने के लिए केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह भी राज्य के दौरे पर आ चुके हैं। गौरतलब है कि चुनाव संपन्न होने के बाद केंद्र सरकार से करोड़ों रुपयों की ग्रांट फिर से मिलनी शुरू हो जायेगी जिससे शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में रूका हुआ विकास गति पकड़ लेगा।  

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