26 जनवरी और 15 अगस्त जैसे राष्ट्रीय पर्व के मौके पर एक गीत प्राय सुनने को मिलता है विजयी विश्व तिरंगा प्यारा, झंडा ऊंचा रहे हमारा।इस गीत के बोल को चरितार्थ करते हुए असम सरकार ने राष्ट्रीय ध्वज को गुवाहाटी के शरणिया पहाड़ की ऊंचाई पर स्थापित कर पूरे देश का का ध्यान आकृष्ट किया है। देश में सबसे ऊंचे झंडे की कतार में गुवाहाटी का राष्ट्रीय ध्वज तीसरे नंबर पर है। देश का सबसे ऊंचा राष्ट्र ध्वज कर्नाटक के बेलगाम में (360.8 फुट) और दूसरा भारत-पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय सीमा अटारी (360 फुट) में है।

शरणिया पहाड़ पर स्थित गांधी मंडप परिसर में स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत 319.5 फुट ऊंचे ध्वज को लगाया गया है। गुवाहाटी के किसी भी हिस्से से इस झंडे का दीदार किया जा सकता है। इसका औपचारिक उद्घाटन राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 150वीं जयंती के अवसर पर मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल के साथ ही असम सरकार के कई मंत्री, सांसद और विधायकों ने बापू को पुष्पांजलि अर्पित कर किया। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में राष्ट्रपिता के आदर्श, प्रेम, अहिंसा, स्वच्छता आदि का जहां गुणगान किया, वहीं देश के तीसरे सबसे ऊंचे राष्ट्रीय ध्वज के बारे में भी जानकारी दी।

गुवाहाटी की शरणिया पहाड़ पर स्थापित किए गए 319.5 फुट ऊंचे राष्ट्रीय ध्वज ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर आकृष्ट किया है। ऊंचाई के लिहाज से ये देश का तीसरा सबसे ऊंचा राष्ट्र ध्वज है। गुवाहाटी की शरणिया पहाड़ पर स्थापित किए गए 319.5 फुट ऊंचे राष्ट्रीय ध्वज ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर आकृष्ट किया है। ऊंचाई के लिहाज से ये देश का तीसरा सबसे ऊंचा राष्ट्र ध्वज है।

आमतौर पर इसकी महत्ता इस बात से परिभाषित होती है कि पूर्वोत्तर के राज्य लंबे समय से अलगाववाद और उग्रवाद का सामना करते रहे हैं। इस क्षेत्र में राष्ट्रवाद की भावना को चोटिल करने की लगातार कोशिश होती रही है। इसके बावजूद असम समेत पूर्वोत्तर के लोगों के दिल में बसी राष्ट्रीयता की भावना की वजह से उग्रवाद और अलगाववाद के षड्यंत्र कामयाब नहीं हो सके। वर्तमान दौर में एक बार फिर राष्ट्रवादी शक्तियां मिलकर काम कर रही हैं। इसमें असम के साथ पूर्वोत्तर के अन्य पड़ोसी राज्यों की सरकारें भी केंद्र के कंधे से कंधा मिलाकर राष्ट्रवाद की भावना को मजबूत करने के साथ ही आपसी भाईचारे को भी एक नया रूप देने का काम कर रही हैं। यही कारण है कि पूर्वोत्तर के राज्यों के बीच आपसी सामंजस्य बेहद प्रगाढ़ हुआ है।

गुवाहाटी को पूर्वोत्तर का प्रवेश द्वार कहा जाता है। ऐसे में यहां स्थापित 319.5 फुट ऊंचे राष्ट्रीय ध्वज का अपने आप में काफी महत्व है। इस झंडे की ऊंचाई तय करते वक्त इस बात का विशेष ध्यान रखा गया है कि शहर के हर कोने से इसका दीदार किया जा सके। माना जा रहा है कि इसकी वजह से यहां आने वाले पर्यटक भी आर्किषत होंगे और पूर्वोत्तर के प्रति उनका रुझान भी बढ़ेगा। इस तिरंगे का निर्माण स्मार्ट सिटी लिमिटेड (जीएससीएल) अथॉरिटी व डिपार्टमेंट आफ इंडस्ट्री एंड कॉमर्स, असम के सौजन्य से किया गया है।

झंडा को बनाने, इसे स्थापित करने तथा एक वर्ष तक इसके रख-रखाव के लिए 2.92 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। टाटा कंसल्टिंग इंजीनियर्स ने इसका डिजाइन व नक्शा तैयार किया है, जबकि इसको बनाने का ठेका इसी वर्ष अप्रैल माह में बजाज इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड को दिया गया था। 319.5 फुट ऊंचे पोल पर 120 फुट लंबे और 80 फुट चौड़े राष्ट्रीय ध्वज को इस तरह से लगाया गया है, ताकि तेज हवा की वजह से भी इसे किसी तरह का नुकसान न हो। इस क्रम में यह बताना आवश्यक है कि इसके पहले झारखंड की राजधानी रांची में भी पहाड़ी मंदिर पर 293 फुट ऊंचा झंडा लगाया गया था, लेकिन अधिक ऊंचाई और पहाड़ी पर स्थित होने की वजह से उसे तेज हवा ने काफी नुकसान पहुंचाया था। यही कारण है कि गुवाहाटी में हवा की तीव्रता और झंडे की स्थिति का विशेष ध्यान रखा गया है। इस झंडे की स्वभाविक रूप से शरणिया की पहाड़ी पर लगाए जाने की वजह से इसकी ऊंचाई काफी अधिक हो गई है।

जीएससीएल के अधिकारियों के मुताबिक इस झंडे के पोल के निर्माण में उच्च क्षमता वाले स्टील का उपयोग किया गया है। पोल को पुणे से बनवाकर यहां लाया गया है। इसकी सुरक्षा के लिहाज सभी तरह के आवश्यक कदम उठाए गए हैं। साथ ही इस बात का भी पूरा ध्यान रखा गया है, जिससे इसके निकटवर्ती क्षेत्र में रहने वाले लोगों को किसी भी तरह की कोई परेशानी न हो।

कोई जवाब दें

Please enter your comment!
Please enter your name here