वास्तुशास्त्र के जनक देवशिल्पी विश्वकर्मा

प्राचीनकाल में विश्वकर्मा नाम के एक मूर्धन्य वास्तुविद थे जिन्हें चिरपुरातन वास्तुशास्त्र का जनक माना जाता है। ऋग्वेद में इन्हें लोकमंगल की दृष्टि से सदैव वास्तु विद्या...

शुभत्व के पर्याय विघ्नहर्ता गणेश

गजानन गणेश भारतीय संस्कृति के अभिन्न अंग हैं। हिन्दू समाज का कोई भी कार्य गणपति को नमन के बिना शुरू नहीं किया जाता क्योंकि वे सुख-समृद्धि, वैभव...

आध्यात्मिकता के सर्वोच्च शिखर

भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि की अर्धरात्रि को कारागृह के भीतर विशिष्ट ग्रहीय दशाओं में शिशु रूप में जन्मे लीलाधर श्रीकृष्ण का समूचा जीवन...

सांस्कृतिक चेतना कांवड़ यात्राएं

सावन का महीना शुरू होते ही हर-हर महादेव और बम-बम भोले के जयघोष चहुंओर सुनायी पड़ने लगते हैं और राष्ट्र की सांस्कृतिक चेतना की वाहक कांवड़ यात्राएं...

सद्गुरु के पांच दिव्य स्वर

भारतीय संस्कृति की सर्वाधिक गौरवशाली परम्परा है गुरु-शिष्य परम्परा। हमारी देवभूमि की यह परम्परा ही आदिकाल से ज्ञान-संपदा का संरक्षण कर उसे श्रुति के रूप में क्रमबद्ध...

जगतपालक की दिव्य लोकयात्रा

पुरी के सागर तट पर निकलने वाली जगन्नाथ रथयात्रा के समय आस्था का जो विराट वैभव देखने को मिलता है, वह और कहीं दुर्लभ है। इसीलिए यह...

देवाधिदेव शिव की महिमा अनंत

शिव जन जन के अराध्य देव हैं। महाशिवरात्रि उनकी अराधना का दिन है। इस दिन उनकी पूजा-अराधना करके लोगों को असीम शान्ति मिलती है।   देवाधिदेव शिव की महिमा...

आस्था का संगम और मोक्ष की डुबकी

महान तीर्थ स्थलों में शुमार गंगासागर में समरसता का भाव और आस्था का मिलन अपने आप में अद्वित्तीय है। इसके चलते हर वर्ष माघ मास में लाखों...

‘सरस्वती नदी’ आदि से अब तक

हमारे धार्मिक ग्रंथो में लिखित तथ्यों पर आज भी शोध की जरूरत है। दुर्भाग्यवश इस दिशा में अधिक कार्य नहीं हुए। बहुत से तथ्य अकाट्य हैं फिर...

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