आर्थिक उपनिवेशवाद!

देश को आजादी मिले 72 साल हो गए हैं। आजादी के बाद से ही भारतीय अर्थव्यवस्था सिद्धांत रूप में उपनिवेशवाद के दौर से इतर नए ढर्रे पर...

परंपरागत कृषि पर औपनिवेशिक मार

एक जमाने में भारत की अर्थव्यवस्था का मूल आधार कृषि था। इसकी अपनी वैश्विक पहचान यह थी कि वह बिना किसी बाहरी सहयोग के अपने भीतर से...

कुलीनवाद की शिकार है न्यायपालिका

आज की न्यायपालिका अंग्रेजों की देन है। ऐसा नहीं है कि उनके आने से पहले भारत में न्याय व्यवस्था नहीं थी। यहां एक विकसित न्याय व्यवस्था प्रचलन...

गुलाम सोच से आजादी जरूरी

देश के इतिहास की अविस्मरणीय तिथि 15 अगस्त सन 1947। इस दिन ब्रिटिश राज की गुलामी से मुक्त होकर हमारे भारत में एक नये राष्ट्र जीवन की...

अंग्रेजी राज की ठसक से ग्रस्त नौकरशाही

भरतीय लोकतंत्र का एक अंग ऐसा है, जो उसकी सबसे बड़ी कमजोरी भी है और सबसे बड़ी ताकत भी। संविधान के अनुच्छेद 311 के तहत वैधानिक छतरी...

भाषा, अंग्रेजियत और उपनिवेशवाद

किसी राष्ट्र के लिए अपने पैरों पर खड़ा होने के लिए 71 साल की अवधि कम नहीं होती। ऐसा नहीं है कि आजादी के इन सात दशकों...

संविधान पर औपनिवेशिक छाया

हर समय की अपनी समस्याएं होती हैं, जिनकी जड़ें नजदीक या दूर के इतिहास में पाई जाती हैं। इसलिए उस समय पर ध्यान दिया जाना चाहिए। यह...

धर्म या भाषा के नजरिए से न देखें: श्रीवास्तव

राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) की दूसरी और अंतिम मसौदा सूची के 30 जुलाई को प्रकाशित होने के बाद से इसको लेकर विभिन्न स्तर पर चर्चा हो रही...

एनआरसी की गुगली कांग्रेस परेशान, ममता हलकान

भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने राज्य सभा में जब एनआरसी पर बोलना शुरू किया तो हंगामा होना ही था, क्योंकि वह 2019 के दो बड़े दावेदारों को...

अंतिम नहीं है यह सूची

राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर यानी एनआरसी की अंतिम मसौदा सूची प्रकाशित कर दी गई है। इसके साथ 40 लाख से अधिक लोग इस सूची से बाहर हो गए...

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