एकता और समरसता ही हिन्दुओं की सबसे बड़ी ताकत : डॉ मोहन भागवत

युगवार्ता    10-Jan-2026
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संघ प्रमुख मोहन भागवत का संत समाज और आश्रम से जुड़े पदाधिकारियों भव्य स्वागत


शुभारंभ संघ प्रमुख मोहन भागवत ने संतों के साथ दीप प्रज्वलन करते हुए


वृंदावनः श्री सुदामा कुटी आश्रम के शताब्दी महोत्सव में शामिल हुए संघ प्रमुख मोहन भागवत

मथुरा, 10 जनवरी (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के मथुरा जनपद में वृंदावन के कुंभ मेला क्षेत्र में स्थित श्री सुदामा कुटी आश्रम के शताब्दी महोत्सव कार्यक्रम में शनिवार काे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन मधुकरराव भागवत ने शिरकत की। कार्यक्रम में पहुंचने पर संत समाज और आश्रम से जुड़े पदाधिकारियों ने उनका भव्य स्वागत किया। संतों को संबोधित करते हुए संघ प्रमुख ने कहा जैसे-जैसे सनातन धर्म के सब लोग एक होते जाएंगे वैसे-वैसे ये टूटते जाएंगे। आप देख लीजिए पिछले 500 सालों में जैसे-जैसे हिन्दू एक होता गया, वैसे-वैसे इनके टुकड़े होते चले गए। हिंदू एक होगा तो आसुरी शक्तियां टूटेंगीं, उनमें बिखराव होगा। शक्ति अगर आपको चाहिए तो उसके लिए भक्ति जरुरी है।

कार्यक्रम का शुभारंभ संघ प्रमुख मोहन भागवत ने संतों के साथ दीप प्रज्वलन कर किया। इस अवसर पर मंच पर श्री सुदामा कुटी के महंत जगद्गुरु सुतीक्ष्ण दास महाराज, अयोध्या से आए संत महामंडलेश्वर कमल नयन दास महाराज, दीदी मां साध्वी ऋतंभरा, गीता मनीषी ज्ञानानंद महाराज सहित देशभर से आए अनेक संत और धर्माचार्य उपस्थित रहे। शताब्दी महोत्सव के दौरान संतों ने आश्रम के सौ वर्षों की आध्यात्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक यात्रा पर प्रकाश डाला।

वक्ताओं ने कहा कि श्री सुदामा कुटी आश्रम ने धर्म, सेवा और समाज को जोड़ने का कार्य किया है और आने वाले समय में भी यह परंपरा निरंतर जारी रहेगी। इस अवसर पर संतों को संबोधित करते हुए मोहन भागवत ने कहा कि समाज को एकजुट होकर रहना होगा और हिंदुत्व को सशक्त बनाना समय की आवश्यकता है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि हिंदू समाज जातियों में बंटने के लिए नहीं है, बल्कि एकता और समरसता ही उसकी सबसे बड़ी ताकत है।

उन्होंने संतों से सामाजिक समन्वय और राष्ट्रहित में मार्गदर्शन देने का आह्वान किया। सभी संतों ने धर्म, संस्कृति और समाज को जोड़ने वाले विचारों पर अपने-अपने विचार व्यक्त किए।

कार्यक्रम के दौरान आध्यात्मिक वातावरण बना रहा और संतों के सान्निध्य में आश्रम परिसर भक्तिमय हो उठा। शताब्दी महोत्सव के अंतर्गत विभिन्न धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों का भी आयोजन किया गया, जिससे बड़ी संख्या में श्रद्धालु लाभान्वित हुए।

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हिन्दुस्थान समाचार / महेश कुमार

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