
नई दिल्ली, 18 जनवरी (हि.स.)। नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला का 53वां संस्करण संपन्न हो गया। इस बार मेले में 20 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी के साथ 20 लाख से ज्यादा पाठक और दर्शक पहुंचे। पहली बार मुफ्त प्रवेश की व्यवस्था किए जाने से छात्रों, परिवारों और युवाओं की भागीदारी रिकॉर्ड स्तर पर रही।
नेशनल बुक ट्रस्ट (एनबीटी) के अनुसार, 10 से 18 जनवरी तक चले इस नौ दिवसीय मेले में 35 से अधिक देशों के 1,000 से ज्यादा प्रकाशकों ने भाग लिया। इस दौरान 600 से अधिक साहित्यिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें करीब 1,000 वक्ताओं ने हिस्सा लिया।
शिक्षा मंत्रालय के अनुसार, एनबीटी की किताबों की बिक्री में 30 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि बच्चों और सामान्य रुचि की पुस्तकों की मांग खास तौर पर बढ़ी।
इस साल एक नई पहल के तहत एनबीटी ने नवाचारपूर्ण स्टॉल लगाने वाले प्रकाशकों को प्रशंसा पत्र प्रदान किए। इनमें कतर (गेस्ट ऑफ ऑनर देश), संस्कृति मंत्रालय, नोटियन प्रेस, राजकमल प्रकाशन, हार्पर कॉलिन्स, पेगासस और वी के ग्लोबल शामिल रहे।
मेले का प्रमुख आकर्षण भारतीय सैन्य इतिहास विषय मंडप रहा, जहां 500 से अधिक पुस्तकों का प्रदर्शन किया गया और 100 से ज्यादा सत्र आयोजित हुए। यहां अर्जुन टैंक, आईएनएस विक्रांत और तेजस की प्रतिकृतियां दर्शकों के बीच खास रहीं।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कतर गेस्ट ऑफ ऑनर और स्पेन फोकस कंट्री रहा। 35 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों ने साहित्य, अनुवाद, संस्कृति और भाषा पर संवाद किया।
एनबीटी ने बताया अगला नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला 2027 का आयोजन 16 से 24 जनवरी 2027 तक किया जाएगा और उसमें भी प्रवेश निःशुल्क रहेगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / प्रशांत शेखर