नक्सलवाद खात्मे की उल्टी गिनती शुरू, सिर्फ तीन शीर्ष नक्सली चला रहे पूरा संगठन

युगवार्ता    18-Jan-2026
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1. गणपति 2. देवजी 3. पापाराव 4. मिशिर बेसरा


बस्तर में सक्रिय एक मात्र बचे नक्सली कमांडर पापाराव की जोर शोर से तलाश कर रहे सुरक्षा बल

जगदलपुर, 18 जनवरी (हि.स.)। छत्तीसगढ़ के बस्तर में नक्सलवाद खात्मे की उल्टी गिनती शुरू हो गई है। अब सिर्फ तीन शीर्ष नक्सली पूरा संगठन चला रहे हैं। इनके अलावा बस्तर में एक कैडर बचा है। पुलिस के आलाधिकारियों ने इसकी पुष्टि की है।

इनमें पोलित ब्यूरो सदस्य थिप्परी तिरुपति उर्फदेवजी, मिशिर बेसरा उर्फ भास्कर और मुपल्ला लक्ष्मण राव उर्फ गणपति तीन शीर्ष नक्सली बचे हैं, जो संगठन चला रहे हैं। बस्तर में सक्रिय एक मात्र बचे डीकेएसजेडसीएम कैडर का नक्सली कमांडर पापाराव उर्फ मंगू अपनी जान बचाने के लिए जंगल में इधर से उधर घूम रहा है, जिसकी सरुक्षा बल जोर शोर से तलाश कर रहे हैं।

विगत डेढ़ वर्ष में कुल 23 बड़े नक्सली मारे गए हैं, इनमें सबसे खूंखार नक्सली माड़वी हिड़मा, नक्सल संगठन का शीर्ष महासचिव बसवाराजू, गणेश उइके सहित 16 बड़े नक्सली शामिल हैं। भूपति, रूपेश और रामधेर जैसे बड़े नक्सलियों ने अपने सैकड़ों साथियों के साथ हथियार डाल दिए हैं।

नक्सल संगठन में बस्तर के अलग-अलग इलाकों में लगभग 100 हथियार बंद नक्सली ही बचे हुए हैं, जो टुकड़ों में यहां-वहां छिपे हुए हैं। नक्सलियों का महाराष्ट्र-मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ (एमएमसी) जोन पूरी तरह से खत्म हो गया है। उत्तर बस्तर और माड़ डिवीजन से भी नक्सलियों का लगभग सफाया हो गया है।

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने 31 मार्च 2026 तक नक्सल मुक्त बस्तर बनाने की समय सीमा तय की है। अब इस तारीख में सिर्फ 72 दिन बचे हैं । अब सुरक्षाबलाें के लिए इनते दिनों में दक्षिण बस्तर डिवीजन को नक्सल मुक्त करना सबसे बड़ी चुनौती है। वर्ष 2025 में नक्सलवाद पर बड़ा अभियान चलाया गया, इस अभियान में पिछले 40 वर्षों से बस्तर में सक्रिय नक्सलियों का प्रभाव अब लगभग समाप्त हो गया है।

पुलिस सूत्रों का कहना है कि दक्षिण बस्तर के जंगलों में एक मात्र बचे डीकेएसजेडसीएम कैडर का नक्सली कमांडर पापाराव अपने साथियों के साथ अलग-अलग टुकड़ियों में छिपे हुए हैं। जबकि मिशिर बेसरा झारखंड में है। कुछ समय पहले देवजी की लोकेशन तेलंगाना-आंध्र प्रदेश और छत्तीसगढ़ के ट्राई जंक्शन में थी, वह बार-बार ठिकाने बदल रहा है । इन बाकी बचे 72 दिनों में अगर ये 4 बड़े नक्सली मारे जाते हैं या आत्मसमर्पण करते हैं तो नक्सल संगठन काे चलाने वाले सभी शीर्ष कैडर के नक्सली खत्म हो जाएंगे।

नक्सली संगठन में बाकी बचे निम्न 4 शीर्ष नक्सलियाें की तलाश में पुलिस-

1. थिप्परी तिरुपति उर्फ देवजी (61) : देवजी तेलंगाना का रहने वाला है। बसवाराजू के मुठभेड़ के बाद नक्सल संगठन ने थिप्परी तिरुपति को नक्सल संगठन का महासचिव बनाया है। ये नक्सल संगठन में पोलित ब्यूरो मेंबर भी है। वर्तमान में नक्सल संगठन का सबसे शीर्श् कैडर का नक्सली यही है। छत्तीसगढ़, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, ओडिशा, महाराष्ट्र समेत अन्य राज्यों की पुलिस इसकी तलाश कर रही है। इसपर सिर्फ छत्तीसगढ़ में ही 01 करोड़ रुपये का इनाम घोषित है।

2. मुपल्ला लक्ष्मण राव उर्फ गणपति (74) : गणपति भी तेलंगाना का रहने वाला है। बसवाराजू से पहले ये ही नक्सल संगठन का महासचिव था। हालांकि, बीमारी और बढ़ती उम्र के चलते इसने करीब 4-5 साल पहले ही संगठन के इस सबसे बड़े पद को छोड़ दिया था। इस पर भी 01 करोड़ रुपये से ज्यादा का इनाम घोषित है।

3. मिशिर बेसरा उर्फ भास्कर (62) : भास्कर झारखंड का रहने वाला है। वर्तमान में नक्सलियों का पोलित ब्यूरो सदस्य है। साथ ही इआरबी का इंचार्ज है। इस पर भी 01 करोड़ रुपये से ज्यादा का इनाम घोषित है।

4. पापाराव उर्फ मंगू (56) : पापाराव छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले का रहने वाला है। वर्तमान में दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (डीकेएसजेडसीएम) सदस्य है। साथ ही पश्चिम बस्तर डिवीजन कमेटी का इंचार्ज और दक्षिण सब जोनल ब्यूरो का सदस्य है। पापाराव अपने पास एके-47 राइफल रखता है। बस्तर के जल-जंगल जमीन से वाकिफ है, इसलिए कई बार पुलिस की गोलियों से बचकर निकला है। यदि पापाराव मारा गया तो नक्सलियों की पश्चिम बस्तर डिवीजन कमेटी पूरी तरह से खत्म हो जाएगी।

बस्तर के आईजी सुंदरराज पी. ने कहा कि नक्सल का किला ढहने लगा है। अब इसके यहां यह पूरी तरह से खात्मा होने की गिनती शुरू है। कुछेक शीर्ष नक्सली बचे हैं, जो अपनी जान बचाकर इधर से उधर भाग रहे हैं। उनसे अपील है कि वे हिंसा छोडकर समाज की मुख्यधारा में लौट

आएं अन्यथा सुरक्षा बल उन्हें अपने अंजाम तक पहुंचाएंगे।

बस्तर आईजी ने कहा कि वर्ष 2025 बस्तर पुलिस के लिए नक्सलियों के खिलाफ ऑपरेशन में काफी निर्णायक रहा है। नक्सलियों के गढ़ में घुसकर शीर्ष नक्सली कैडराें को मुठभेड़ में ढेर किया गया है। मारे गए नक्सलियों के पास से एलएमजी, एके-47, इंसास, एसएलआर जैसे ऑटोमैटिक हथियार बरामद किया गया है। 52 से ज्यादा नये सुरक्षा कैंप खोले गए हैं, जिससे इन इलाकों में विकास कार्यों को गति मिली है। डेढ़ हजार से ज्यादा आत्मसमर्पित नक्सलियों का पुनर्वास किया गया है ।

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हिन्दुस्थान समाचार / राकेश पांडे

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