सारंडा में तेज होगी नक्सल के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई : डीजी सीआरपीएफ

युगवार्ता    19-Jan-2026
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CRPF के महानिदेशक (ऑपरेशन) ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह


पश्चिमी सिंहभूम, 19 जनवरी (हि.स.)। जिला में झारखंड के नक्सल प्रभावित इलाकों में नक्सल के खिलाफ निर्णायक लड़ाई की तैयारियां तेज कर दी गई हैं। इसी क्रम में सोमवार को केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के महानिदेशक (ऑपरेशन) ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह चाईबासा पहुंचे। उनके दौरे को सुरक्षा एजेंसियों की रणनीति के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। चाईबासा में उन्होंने सारंडा और कोल्हान क्षेत्र में चल रहे ऑपरेशन ब्लैक फॉरेस्ट को लेकर वरीय अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की और आने वाले दिनों की कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा की।

बैठक में सीआरपीएफ, झारखंड पुलिस, जिला पुलिस और खुफिया एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। डीजी ऑपरेशन ने क्षेत्र की भौगोलिक चुनौतियों, माओवादियों की गतिविधियों, हालिया मुठभेड़ों और खुफिया सूचनाओं की गहन समीक्षा की। अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया गया कि अभियान में किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी और नक्सलियों के नेटवर्क को पूरी तरह तोड़ने पर फोकस रखा जाए।

सारंडा का घना जंगल लंबे समय से नक्सलियों का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार कुख्यात नक्सली नेता मिसिर बेसरा सहित संगठन के कई बड़े कमांडर इसी इलाके में सक्रिय रहे हैं। जंगल, पहाड़ी इलाकों और सीमावर्ती क्षेत्रों का फायदा उठाकर नक्सली लंबे समय से सुरक्षा बलों को चुनौती देते आए हैं। इसलिए ऑपरेशन ब्लैक फॉरेस्ट को अब और व्यापक और समन्वित रूप दिया जा रहा है।

डीजी ऑपरेशन ने अधिकारियों को खुफिया तंत्र को और मजबूत करने, स्थानीय सूत्रों से सूचनाएं बढ़ाने और जंगल क्षेत्रों में सर्च और एरिया डॉमिनेशन ऑपरेशन की प्रभावशीलता बढ़ाने का निर्देश दिया। उन्होंने केंद्रीय बलों और राज्य पुलिस के बीच बेहतर समन्वय, आधुनिक तकनीक के उपयोग और जवानों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने पर भी जोर दिया।

उन्‍होंने कहा कि केंद्र सरकार पहले ही यह लक्ष्य तय कर चुकी है कि मार्च 2026 तक देश को नक्सल मुक्त बनाया जाएगा। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के निर्देश के तहत झारखंड, छत्तीसगढ़, ओडिशा, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र और बिहार जैसे नक्सल प्रभावित राज्यों में एक साथ सघन अभियान चलाया जा रहा है। झारखंड में सारंडा, कोल्हान और सीमावर्ती क्षेत्रों को इस रणनीति का प्रमुख केंद्र बनाया गया है।

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हिन्दुस्थान समाचार / गोविंद पाठक

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