(लीड) मां से मिलने के लिए किसी की परमीशन की आवश्यकता नहीं: स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद

युगवार्ता    19-Jan-2026
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मीडिया से वार्ता करते हुए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद महाराज का छाया चित्र


पत्रकाराें से वार्ता के दाैरान शंकराचार्य ने गृह सचिव सहित कई अफसराें पर लगाए गंभीर आराेपस्वामी ने की प्रदेश के मुखिया से माफी मांगने और दोषी अफसराें के खिलाफ की कार्रवाई की मांग

प्रयागराज, 19 जनवरी (हि.स.)। ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद नेे कहा कि पतित पावनी मां गंगा की हम संतान हैं, मां से मिलने के लिए किसी के आदेश लेने की आवश्यकता नहीं होती है। मेला प्रशासन के अधिकारी कह रहे हैं कि अनुमति नहीं ली थी। शंकराचार्य को इनसे अनुमति लेनी पड़ेगी। यह अधिकार इन्हें कौन दे दिया। इतना जरूर है कि व्यवस्था बनाने के लिए सूचना दी जाती है और वह दी गई थी।

रविवार काे गंगा स्नान के लिए जाते समय राेके जाने से नाराज स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद महाराज ने साेमवार काे पत्रकाराें से बात की। शंकराचार्य ने कहा कि अब मैंने यह निर्णय लिया है कि सबकुछ त्यागकर मां गंगा के शरण में आया हूं, यदि हमने इन्हें और प्रयागराज को छोड़ दिया तो कहां जाएंगे और तपस्या कहां करेंगे। उन्हाेंने कहा कि सनातन धर्म एवं गौ रक्षा के लिए ही हमने संत जीवन शुरू किया है। प्रयागराज के इस मेले में गौ माता को राष्ट्र माता घोषित करने के रक्षा के लिए गौ माता संरक्षण यात्रा निकाल रहे हैं। जिसे लेकर दिल्ली में 11 मार्च को एक बड़ा सम्मेलन होगा।

महाराज ने पत्रकार वार्ता के दाैरान केंद्र एवं राज्य सरकार को इशारे में घेरते हुए कहा कि माघ मेला में मौनी अमावस्या को हमारे साथ संगम में यह सबकुछ ऐसे समय में हुआ जब प्रदेश का मुखिया एक संत हो। संत के राज में हमारे साथ और हमारे शिष्यों के साथ जो कृत्य किया गया है। वह बहुत ही ग़लत किया गया। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया है कि हम धरने पर नहीं बैठें हैं। हमें पालकी सहित सादे कपड़ों में तैनात कुछ लोग शिविर तक लाए और छोड़कर चले गए। जिनके पास असलहे भी थे, वह पुलिस कर्मचारी थे, जिनका कोई दोष नहीं है, लेकिन दो स्टार से ऊपर वाले पुलिस इंस्पेक्टर सहित अन्य पुलिस के अधिकारी लगे हुए थे, जिन्हाेंने हमें गंगा स्नान करने से रोका।

महाराज ने पूरे घटनाक्रम काे बताते हुए कहा कि मौनी अमावस्या के दिन अपने करीब ४०-५० शिष्यों व अनुयायियों के साथ संगम तट पर गंगा स्नान के लिये जा रहे थे, जिसकी पूर्व सूचना स्थानीय प्रशासन को भी दी गई थी और मेला क्षेत्र के कुछ पुलिस अधिकारी आकर उन्हें अपनी सुरक्षा में संगम तट की ओर ले जा रहे थे। पीपा पुल नंबर २ पर पुलिस अधिकारियों ने उन्हें रोक दिया। महाराज ने आराेप लगाया कि हमारे साथ के संतो- संन्यासियों को पुलिस ने अपमानित कर उनके साथ मारपीट की। शंकराचार्य ने कहा कि पुलिस ने गालीगलौज कर भ्रम फैलाने के लिए बार- बार माइक से कहा गया कि शंकराचार्य मां की गाली दे रहे हैं। उन्हाेंने कहा कि मारपीट में करीब १५ से ज्यादा लोग घायल हुए। तीन गंभीर घायलों को अस्पताल में भर्ती किया गया है। उन्हें पुलिस अधिकारी खुद उठाकर ले गये और ३-४ बार अलग- अलग स्थानों पर छोड़ा गया और वहां से दूसरे पुलिस अधिकारियों द्वारा कहीं अन्यत्र ले जाकर छोड़ा गया।

शंकराचार्य महाराज ने बताया कि अंत में जहां सादे वर्दी में पुलिस अधिकारियों ने लाकर उन्हें छोड़ा था, वे वहीं बैठ गये। अब हम जब तक शिविर के अंदर नहीं जाएंगे, जब तक प्रशासन अपने किये के लिये माफी नहीं मांगेगा और हमें ससम्मान संगम तट पर ले जाकर स्नान कराएगा। शंकराचार्य महाराजनेबतायाकि सभी घायलों का मेडिकल टेस्ट करवा लिया गया है। इस संबंध पुलिस प्रशासन के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराएंगे।

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने आरोप लगाते हुए बताया कि प्रदेश सरकार के गृह सचिव मोहित गुप्ता ने ख़ुद मारा। मंडलायुक्त प्रयागराज ⁠सौम्या अग्रवाल ने प्रेस कांफ्रेंस कर भ्रामक व असत्य ख़बर फैलायी। हमें आशंका है कि मेरी हत्या हो सकती थी, लेकिन हम पालकी से नीचे नहीं उतरे।

पुलिस आयुक्त ⁠जोगेंद्र कुमार ने अभद्रता की। जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा ने भी गुमराह किया।

उन्हाेंने आराेप लगाया कि संगम टावर पर तैनात सीओ ने लोगों को घसीट कर मारा। कमरे में बंद कर दंडी संन्यासी व ब्रह्मचारी को मारा। पुलिस की पिटाई तीन की हालत गंभीर है, जिन्हें एसआरएन में भर्ती कराया गया है। एक 80 वर्ष का बुजुर्ग मरणासन्न हालत में है। उन्हाेंने कहा कि इस घटना को लेकर जब तक प्रदेश का मुखिया स्वयं आकर माफ़ी नहीं माँगता, तब तक वह शिविर में प्रवेश नहीं करेंगे, प्रशासनिक अपनी ग़लती का क्षमा मांगे और ससम्मान स्नान कराये। शंकराचार्य ने कहा कि योगी आदित्यनाथ ने ट्वीट किया है कि स्नान शांतिपूर्ण व सफल हुआ। क्या शंकराचार्य का अपमान उनको नहीं दिखा? वे झूठ बोलने पर दें जवाब।

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हिन्दुस्थान समाचार / रामबहादुर पाल

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