कोलकाता, 02 जनवरी (हि.स.)।पश्चिम बंगाल में मतदाता नामांकन में कथित अनियमितताओं के मामले में चुनाव आयोग ने सख्त रुख अपनाया है। आयोग ने राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय को निर्देश दिया है कि दो विधानसभा क्षेत्रों से जुड़े चार चुनाव अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जाए।
जिन अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं, उनमें दक्षिण 24 परगना जिले के बारुईपुर पूर्व विधानसभा क्षेत्र के निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी देवोत्तम दत्त चौधरी और सहायक निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी तथागत मंडल शामिल हैं। इसके अलावा पूर्व मेदिनीपुर जिले के मोयना विधानसभा क्षेत्र के निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी बिप्लब सरकार और सहायक निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी सुदीप्त दास के खिलाफ भी प्राथमिकी दर्ज करने को कहा गया है।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय से जुड़े सूत्रों के अनुसार नई दिल्ली स्थित चुनाव आयोग मुख्यालय से यह निर्देश भेजा गया है। इसकी जानकारी पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल के कार्यालय के साथ-साथ दक्षिण 24 परगना और पूर्व मेदिनीपुर के जिलाधिकारियों को भी दे दी गई है, जो जिला निर्वाचन अधिकारी की जिम्मेदारी भी निभाते हैं।
यह ताजा निर्देश पिछले साल अगस्त में जारी आदेश के बाद आया है, जब चुनाव आयोग ने इन 4 अधिकारियों को निलंबित करने और उनके खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज करने का निर्देश दिया था। हालांकि राज्य सरकार ने उस आदेश को आंशिक रूप से ही लागू किया था। चारों अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया था, लेकिन उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई थी। इस मामले से जुड़े एक संविदा पर कार्यरत डाटा एंट्री ऑपरेटर को भी उस समय सेवा से हटा दिया गया था।
इन अधिकारियों पर मतदाता सूची में हेरफेर करने का आरोप है। इसी आधार पर चुनाव आयोग ने सभी संबंधित लोगों के निलंबन और उनके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई का आदेश दिया था। उस समय मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आयोग के निर्देश की आलोचना करते हुए कहा था कि चुनाव आयोग भारतीय जनता पार्टी का बंधुआ मजदूर की तरह काम कर रहा है। उन्होंने यह भी कहा था कि उनकी सरकार अपने कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करेगी।
खबर लिखे जाने तक इस ताजा निर्देश पर न तो पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से और ना ही सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस की ओर से कोई प्रतिक्रिया सामने आई है।
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हिन्दुस्थान समाचार / ओम पराशर