मप्र के इंदौर में दूषित पानी पीने से 15वीं मौत, राहुल गांधी ने सरकार पर साधा निशाना, बोले- शहर में जहर बांटा

युगवार्ता    02-Jan-2026
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दूषित पानी से अस्पताल में भर्ती मरीज


- सरकार ने हाई कोर्ट में पेश की स्टेटस रिपोर्ट, बताया-केवल चार मौते हुईंइंदौर, 02 जनवरी (हि.स.)। मध्य प्रदेश के इंदौर शहर के भागीरथपुरा में दूषित पानी पीने से मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। यहां आज एक और मरीज की मौत हो गई। एक 60 वर्षीय महिला ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। शहर में दूषित पानी से यह 15वीं मौत है।

मामले में शुक्रवार को राज्य सरकार ने अपनी स्टेटस रिपोर्ट भी उच्च न्यायालय में पेश कर दी है। स्टेटस रिपोर्ट में बताया गया है कि गंदे पानी से अब तक सिर्फ चार मौतें हुई हैं। जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय ने 6 जनवरी को सुनवाई की अगली तारीख तय की है। इधर मामले को लेकर राजनीति भी शुरू हो गई है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा कि इंदौर में पानी नहीं, जहर बांटा गया है। वहीं, उमा भारती ने कहा है कि इस पाप का घोष प्रायश्चित करना होगा।

इंदौर के भागीरथपुरा में आपूर्ति हुए दूषित पानी पीने से बीमार हुई 68 वर्षीय गीताबाई को गत 24 दिसंबर को एमवाई अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां शुक्रवार को सुबह उनकी मौत हो गई। शहर में दूषित पानी से यह 15वीं मौत है। मृतका के पति राजू ने कि दूषित पानी पीने के कारण जब लोग लगातार बीमार होने लगे तो स्वास्थ्य विभाग की टीम उनके घर पर पहुंची। इस दौरान गीताबाई, उनके बेटे और भतीजे उल्टी-दस्त से पीड़ित मिले। उन्हें अस्पताल में भर्ती करवाया गया। इलाज के दौरान गीताबाई की मौत हो गई। गीताबाई को भी उल्टी-दस्त लगातार हो रहे थे। उन पर किसी दवा का कोई असर नहीं हुआ। इस पर उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया था।

इंदौर सीएमएचओ डॉ. माधव हसानी ने बताया कि दूषित पानी पीने से ही लोग बीमार पड़े और उनकी जान गई। दूषित पानी से प्रभावित 16 बच्चों समेत 201 लोग अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती हैं। इनमें से 32 लोग आईसीयू में भर्ती हैं। डॉ. हसानी का कहना है कि सैंपल की जांच रिपोर्ट में साफतौर पर पुष्टि हुई है कि दूषित पानी पीने से ही लोग बीमार पड़े और उनकी जान गई। वहीं, कलेक्टर शिवम वर्मा का कहना है कि डिटेल्ड रिपोर्ट का इंतजार है। मेडिकल कॉलेज में कल्चर टेस्ट भी किया जा रहा है। इसकी रिपोर्ट आने के बाद ही कुछ कहना ठीक होगा।

इस मामले को लेकर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार पर हमला बोला है। उन्होंने कहा है कि साफ पानी अहसान नहीं, जीवन का अधिकार है। इस अधिकार की हत्या के लिए भाजपा का डबल इंजन, उसका लापरवाह प्रशासन और संवेदनहीन नेतृत्व पूरी तरह जिम्मेदार है। प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के बयान पर टिप्पणी करते हुए राहुल गांधी ने शुक्रवार को सोशल मीडिया एक्स पर लिखा कि घर-घर परेशानी है। गरीब पीड़ा में है, लेकिन भाजपा के नेता घमंड में चूर हैं।

उन्होंने लिखा कि इंदौर में पानी नहीं, जहर बंटा और प्रशासन कुंभकर्णी नींद में रहा। घर-घर मातम है, गरीब बेबस हैं और ऊपर से भाजपा नेताओं के अहंकारी बयान। जिनके घरों में चूल्हा बुझा है, उन्हें सांत्वना चाहिए थी, सरकार ने घमंड परोस दिया। लोगों ने बार-बार गंदे, बदबूदार पानी की शिकायत की, फिर भी सुनवाई क्यों नहीं हुई? सीवर पीने के पानी में कैसे मिला? समय रहते सप्लाई बंद क्यों नहीं हुई? जिम्मेदार अफसरों और नेताओं पर कार्रवाई कब होगी? ये ‘फोकट’ सवाल नहीं है। ये जवाबदेही की मांग है। मध्य प्रदेश अब कुप्रशासन का एपिसेंटर बन चुका है। कहीं खांसी की सिरप से मौतें, कहीं सरकारी अस्पताल में बच्चों की जान लेने वाले चूहे और अब सीवर मिला पानी पीकर मौतें। जब-जब गरीब मरते हैं, मोदी जी हमेशा की तरह खामोश रहते हैं।

कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी मामले को लेकर केन्द्र सरकार पर हमला बोला है। उन्होंने सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट कर कहा कि जल जीवन मिशन और स्वच्छ भारत अभियान का ढिंढोरा पीटने वाले नरेन्द्र मोदी जी, हमेशा की तरह इंदौर में दूषित पानी पीने से हुई मौतों को लेकर मौन हैं। यह वही इंदौर शहर है जिसने केंद्र सरकार के स्वच्छ सर्वेक्षण में लगातार आठवीं बार सबसे स्वच्छ शहर का खिताब जीता है। ये शर्मनाक बात है कि यहां पर भाजपा की उदासीनता के चलते लोग साफ पानी के मोहताज हैं।

जिंदगी की कीमत 2 लाख रुपये नहीं होतीः उमा भारती

इंदौर में दूषित पानी से मौतों को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने भी बड़े सवाल उठाए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया एक्स लिखा है कि इंदौर दूषित पानी के मामले में यह कौन कह रहा है कि हमारी चली नहीं। जब आपकी नहीं चली तो आप पद पर बैठे हुए बिसलेरी का पानी क्यों पीते रहे? पद छोड़कर जनता के बीच क्यों नहीं पहुंचे? ऐसे पापों का कोई स्पष्टीकरण नहीं होता या तो प्रायश्चित या दंड!

उन्होंने लिखा है कि साल 2025 के अंत में इंदौर में गंदे पानी पीने से हुई मौतें हमारा प्रदेश, हमारी सरकार और हमारी पूरी व्यवस्था को शर्मिंदा और कलंकित कर गईं। प्रदेश के सबसे स्वच्छ शहर का अवार्ड प्राप्त करने वाले नगर में इतनी बदसूरती, गंदगी, जहर मिला पानी जो कितनी जिंदगियों को निगल गया और निगलता जा रहा है, मौत का आंकड़ा बढ़ रहा है। जिंदगी की कीमत दो लाख रुपये नहीं होती क्योंकि उनके परिजन जीवन भर दुःख में डूबे रहते हैं। इस पाप का घोर प्रायश्चित करना होगा, पीडितजनों से माफी मांगनी होगी और नीचे से लेकर ऊपर तक जो भी अपराधी हैं उन्हें अधिकतम दंड देना होगा। यह मोहन यादव जी की परीक्षा की घड़ी है।

इधर, मामले में मध्य प्रदेश सरकार ने अपनी स्टेटस रिपोर्ट शुक्रवार को मप्र उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ में पेश की, जिसमें पानी से सिर्फ 4 मौत होने की बात कही है। सरकार की रिपोर्ट की यह स्थिति तब है, जब लोगों की 15 मौत हो चुकी है। इनमें पांच महीने के मासूम बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक शामिल हैं। महात्मा गांधी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज की लैब रिपोर्ट में भी पानी में सीवेज मिलने की पुष्टि हो चुकी है। हाई कोर्ट ने जनहित याचिका पर सुनवाई की अगली तारीख 6 जनवरी तय की है। वहीं, इंटर विनर (हस्तक्षेप कर्ता) गोविंद सिंह बैस की ओर से मीडिया में रिपोर्ट पब्लिश करने पर रोक लगाने की मांग की गई। इस पर कोर्ट ने कोई टिप्पणी नहीं की।_______________

हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर

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