किसी अन्य राज्य के सदन की कार्यवाही में हस्तक्षेप अस्वीकार्य : विजेंद्र गुप्ता

युगवार्ता    20-Jan-2026
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दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता एआईपीओसी सम्मेलन को संबोधित करते हुए।


लखनऊ, 20 जनवरी (हि.स.)। दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता मंगलवार को लखनऊ में आयोजित तीन दिवसीय 86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारियों के सम्मेलन (एआईपीओसी) में हुए शामिल। अध्यक्ष ने विधायिका के विचाराधीन मामलों में किसी अन्य राज्य की सरकार के हस्तक्षेप की कड़ी निंदा करते हुए इसे अस्वीकार्य हस्तक्षेप बताया।

दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष ने एआईपीओसी को संबोधित करते हुए कहा कि दिल्ली विधान सभा में हाल की एक घटना पर सदन ने विधिवत संज्ञान लिया और उसे विशेषाधिकार समिति को संदर्भित किया गया। इस मुद्दे की जांच स्थापित संसदीय प्रक्रिया के अनुरूप की गई, जिसमें सदस्यों की भावनाओं के अनुरूप चर्चा हुई, तर्क-वितर्क प्रस्तुत किए गए और निर्णय लिए गए।

विजेंद्र गुप्ता ने आगे कहा कि जब किसी विधायिका के भीतर किसी विषय पर चर्चा होती है, तो सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों की सहभागिता से विचार-विमर्श किया जाता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि जब सत्तापक्ष और विपक्ष मिलकर किसी निष्कर्ष पर पहुंचते हैं और उसका क्रियान्वयन अध्यक्ष के माध्यम से किया जाता है, तो वह विषय अंतिम रूप ले लेता है।

उल्लेखनीय है कि, ये टिप्पणियां 6 जनवरी को हुई सदन की कार्यवाही के संदर्भ में की गई थीं। गुप्ता ने पहले बताया था कि यह मामला दिल्ली विधान सभा की कार्यवाही की ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग से संबंधित है, जिसमें हाल ही में संपन्न शीतकालीन सत्र के दौरान सिख गुरुओं से संबंधित सदन की कार्यवाही के संदर्भ में विपक्ष की नेता आतिशी द्वारा कथित रूप से की गई टिप्पणियों का विषय शामिल है। मामले की गंभीरता और सदस्यों द्वारा व्यक्त भावनाओं को देखते हुए, विधानसभा ने सदन के पटल पर औपचारिक रूप से इस मुद्दे का संज्ञान लिया और इसे स्थापित संसदीय प्रक्रिया के अनुसार, विशेषाधिकार समिति को संदर्भित करने सहित, सख्ती से जांचा।

विजेंद्र गुप्ता ने पहले भी कहा था कि विधायी मामलों का निपटारा सदन के अधिकार क्षेत्र के भीतर ही होना चाहिए और किसी भी प्रकार का बाहरी हस्तक्षेप उसकी स्वायत्तता को कमजोर करता है। उन्होंने यह भी कहा कि एफएसएल रिपोर्ट ने तथ्य सामने ला दिए हैं और इस मामले को केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को संदर्भित किया जा सकता है। साथ ही उन्होंने संकेत दिया कि सदन माफी पर विचार करने के लिए भी खुला है।

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हिन्दुस्थान समाचार / माधवी त्रिपाठी

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