
- नए एक्सचेंज की शुरुआत से फायदे में रहेंगे इनवेस्टर्स और ब्रोकर्स
नई दिल्ली, 20 जनवरी (हि.स.)। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) के बाद अब देश में तीसरे स्टॉक एक्सचेंज मेट्रोपॉलिटन स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया (एमएसईआई) की शुरुआत का दिन भी फाइनल हो गया है। इस नए एक्सचेंज एमएसईआई में 27 जनवरी से ट्रेडिंग की शुरुआत हो जाएगी। बीएसई और एनएसई की तरह ही एमएसईआई भी एक फरवरी को रविवार होने के बावजूद बजट का दिन होने की वजह से खुला रहेगा। इस एक्सचेंज पर कारोबार शुरू होने के बाद प्राथमिक अवस्था में 130 शेयरों के साथ ट्रेडिंग की शुरुआत की जाएगी।
इस संबंध में मिली जानकारी के अनुसार मार्केट में लिक्विडिटी बढ़ाने के लिए इस एक्सचेंज में खास योजना तैयार की गई है, जिसके तहत फिलहाल मार्केट मेकर्स की नियुक्ति की जा रही है।
उल्लेखनीय है कि मेट्रोपॉलिटन स्टॉक एक्सचेंज (एमएसईआई) के एक्टिव होने का लंबे समय से इंतजार किया जा रहा था। शुरुआती कारोबार के लिए एमएसई ने दिसंबर 2024 और अगस्त 2025 में दो चरणों में 1,240 करोड़ रुपये जुटाये हैं। एमएसईआई में ग्रो और जेरोधा जैसी प्रमुख ब्रोकरेज फर्म ने मुख्य रूप से निवेश किया है।
मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि मेट्रोपॉलिटन स्टॉक एक्सचेंज में पूरी तरह से कारोबार शुरू होने से बीएसई और एनएसई को सीधी चुनौती मिलेगी। इससे निवेशकों और ब्रोकर्स दोनों को काफी फायदा भी होगा, क्योकि इसकी वजह से दोनों के लिए ट्रेडिंग कॉस्ट और ऑप्शंस के नए रास्ते खुल सकते हैं। अभी तक घरेलू शेयर बाजार पर बीएसई और एनएसई का पूरी तरह से नियंत्रण रहा है। अब एमएसई के एक्टिव हो जाने से मार्केट में असली कॉम्पिटिशन आएगा। इसके साथ ही सेबी के अप्रूवल के बाद इक्विटी, डेरिवेटिव्स और कमोडिटी सेगमेंट में नया विकल्प तैयार होगा।
धामी सिक्योरिटीज के वाइस प्रेसिडेंट प्रशांत धामी का कहना है कि एमएसईआई में शुरुआती दौर में कैश सेगमेंट पर फोकस कर निवेशकों और ट्रेडर्स का भरोसा जीतने की कोशिश की जाएगी। हालांकि धामी का ये भी मानना है कि मेट्रोपॉलिटन स्टॉक एक्सचेंज (एमएसईआई) के लिए बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) के मुकाबले खड़ा होना आसान नहीं होगा। फिलहाल बीएसई और एनएसई की पकड़ काफी मजबूत बनी हुई है। इसलिए एमएसईआई के लिए इसको तत्काल चुनौती देना आसान नहीं होगा।
इसके साथ ही फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस सेगमेंट में मार्केट रेगुलेटर सेबी के नियम भी एमएसईआई के लिए मुश्किल बढ़ाने का काम करेंगे। सेबी के नियमों के अनुसार फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस में वीकली एक्सपायरी मंगलवार और गुरुवार को होती है। फिलहाल इसमें बदलाव का कोई प्रस्ताव नहीं है। मौजूदा व्यवस्था में निफ्टी की एक्सपायरी मंगलवार को होती है, जबकि सेंसेक्स की एक्सपायरी गुरुवार को होती है। अगर सेबी के नियमों में बदलाव नहीं हुआ, तो एमएसईआई को भी एक्सपायरी के लिए मंगलवार या गुरुवार में से किसी एक दिन का चयन करना होगा। ऐसी स्थिति में एमएसईआई के लिए डेरिवेटिव्स में पकड़ बना पाना आसान नहीं होगा।
दिल्ली स्टॉक एक्सचेंज, कोलकाता स्टॉक एक्सचेंज, मगध स्टॉक एक्सचेंज जैसे छोटे स्टॉक एक्सचेंजों का दौर खत्म होने के बाद अब देश में स्टॉक मार्केट की लगभग पूरी गतिविधि बीएसई और एनएसई के जरिए ही होती है। जहां तक मार्केट शेयर की बात है, तो फिलहाल एनएसई के पास सबसे अधिक हिस्सेदारी है। कैश में एनएसई की हिस्सेदारी 90 प्रतिशत से अधिक है। वहीं स्टॉक फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस में इसकी हिस्सेदारी 95 प्रतिशत है, जबकि इंडेक्स फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस में एनएसई की हिस्सेदारी लगभग 80 प्रतिशत है। दूसरी ओर, कैश में बीएसई की हिस्सेदारी 9 से 10 प्रतिशत के बीच है। वहीं स्टॉक फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस में बीएसई की हिस्सेदारी 5 प्रतिशत तथा इंडेक्स फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस में 20 प्रतिशत हिस्सेदारी है।
------------
हिन्दुस्थान समाचार / योगिता पाठक