दिल्ली में यमुना को स्वच्छ बनाने के लिए ठोस एक्शन प्लान लागू करने का निर्देश

युगवार्ता    21-Jan-2026
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दिल्ली सचिवालय  में बुधवार को यमुना की सफाई को लेकर उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता करती मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता


- दिल्ली में 814 से 1500 एमजीडी तक पहुंचेगी सीवेज ट्रीटमेंट क्षमता, 2028 तक सभी 1799 अनधिकृत कॉलोनियां जुड़ेंगी सीवर नेटवर्क से

नई दिल्ली, 21 जनवरी (हि.स.)। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने यमुना को फिर से स्वच्छ और प्रवाहमान बनाने के लिए मिशन-मोड में ठोस एक्शन प्लान लागू करने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को ये निर्देश बुधवार को दिल्ली सचिवालय में आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में दिए।

बैठक में यमुना की मौजूदा हालत, सीवेज ट्रीटमेंट, नालों की सफाई और अनधिकृत कॉलोनियों में सीवर लाइन बिछाने जैसे कामों की समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि यमुना केवल नदी नहीं, बल्कि दिल्ली की जीवनरेखा है। सरकार वैज्ञानिक योजना, तय समय-सीमा और पड़ोसी राज्यों के साथ समन्वय स्थापित कर इसे फिर से साफ और जीवंत बनाने के लिए लगातार काम कर रही है। बैठक में सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण मंत्री प्रवेश साहिब सिंह सहित दिल्ली जल बोर्ड, पीडब्ल्यूडी, दिल्ली नगर निगम, दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति, डीडीए व अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री ने बताया कि दिल्ली में अभी 37 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) मिलकर रोजाना 814 मिलियन गैलन प्रतिदिन (एमजीडी) गंदा पानी साफ कर रहे हैं, जो मौजूदा जरूरत के हिसाब से काफी है। लेकिन भविष्य की जरूरतों को देखते हुए सरकार ने इस क्षमता को बढ़ाकर 1500 एमजीडी करने का बड़ा लक्ष्य रखा है। इसके लिए पुरानी मशीनों को सुधारकर दिसंबर 2027 तक 56 एमजीडी और 35 नए छोटे डिसेन्ट्रलाइज्ड सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (डीएसटीपी) लगाकर 170 एमजीडी अतिरिक्त क्षमता बढ़ाई जाएगी। इसके साथ ही नालों के पास नए बड़े प्लांट लगाकर दिसंबर 2028 तक 460 एमजीडी क्षमता और जोड़ी जाएगी, ताकि दिल्ली के सीवेज मैनेजमेंट को पूरी तरह चाक-चौबंद किया जा सके।

मुख्यमंत्री ने बताया कि अनधिकृत कॉलोनियों और जेजे क्लस्टर्स में सीवर लाइन बिछाने का काम तेजी से किया जा रहा है। 675 जेजे क्लस्टर्स में से 574 में काम पूरा हो चुका है, जबकि 65 क्लस्टर्स में सीवेज इकट्ठा करने के लिए सिंगल पॉइंट कलेक्शन की व्यवस्था की जा रही है। इसके अलावा, 1799 अनधिकृत कॉलोनियों में सीवर नेटवर्क का काम दिसंबर 2026 से दिसंबर 2028 तक चरणबद्ध तरीके से पूरा किया जाएगा। इससे गंदा पानी बिना साफ हुए यमुना में जाने से रुकेगा।

मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि अब दिल्ली के नालों की निगरानी के लिए पहली बार पुख्ता सिस्टम बनाया गया है।

दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) की टीमें 47 तय जगहों पर हर महीने पानी की जांच कर रही हैं। नजफगढ़ और शाहदरा नालों से जुड़े सभी छोटे नालों की पहचान और जांच ड्रोन सर्वे के जरिए जनवरी 2026 तक पूरी कर ली जाएगी, जबकि बाकी नालों का सर्वे दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) जून 2026 तक पूरा करेगा। इस पूरी कवायद का मकसद यह पता लगाना है कि कहां से और कितना प्रदूषण नदी में मिल रहा है ताकि उसे रोका जा सके।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि यमुना को निर्मल करने के लिए पड़ोसी राज्यों से भी समन्वय बनाना होगा। बैठक में बताया गया कि नजफगढ़ ड्रेन में हरियाणा राज्य के छह नाले आकर मिलते हैं जो कुल दूषित पानी का 33 प्रतिशत है। इसके अलावा शाहदरा ड्रेन में उत्तर प्रदेश के चार बड़े नाले आकर गिरते हैं, जो कुल दूषित पानी का करीब 40 प्रतिशत है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस मसले को लेकर वह दोनों राज्यों के मुख्यमंत्री से समाधान पर बात करेंगी।

बैठक में मुख्यमंत्री ने सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग को निर्देश दिए कि सड़कों और नालों से निकलने वाली गाद (सिल्ट) को वैज्ञानिक तरीके से निपटाने के लिए बायो-माइनिंग और प्रोसेसिंग प्लांट लगाने के लिए तुरंत उपयुक्त जमीन खोजी जाए। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को यह भ निर्देश दिए कि सिल्ट का इस्तेमाल करने के लिए दिल्ली के विभिन्न इलाकों में करीब चार प्लांट लगाए जाएं ताकि सिल्ट का कहीं भी पहाड़ न बने। उन्होंने डीडीए को यमुना के किनारे पक्के और व्यवस्थित घाट बनाने की विस्तृत योजना तैयार करने को भी कहा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली जल बोर्ड, पीडब्ल्यूडी, एमसीडी और डीडीए समेत सभी विभाग मिलकर और तालमेल के साथ काम करें। उन्होंने एक विशेष कमेटी बनाने को कहा ताकि सीवर लाइन बिछाने के लिए सड़क काटने और फिर उसे तुरंत ठीक करने के काम में देरी न हो। इसके साथ ही यमुना में गिरने वाले 22 बड़े नालों की ड्रोन से मैपिंग की जाएगी और हर महीने उनके पानी की जांच होगी ताकि प्रदूषण का स्तर पता चल सके।

मुख्यमंत्री ने कहा कि औद्योगिक क्षेत्रों से निकलने वाले प्रदूषित पानी को भी नियंत्रित किया जाना जरूरी है। यह दूषित पानी यमुना को प्रदूषित करने में भी भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने संबंधित विभागों के अधिकारियों को निर्देश दिए कि नियोजित औद्योगिक क्षेत्रों में लगे अपशिष्ट उपचार संयंत्र (सीईटीपी) की लगातार जांच की जाए कि वे ठीक से काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि गैर नियोजित क्षेत्रों में प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों पर सख्ती की जाए और उल्लंघन करने वालों को दंडित किया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि इसके लिए दिल्ली प्रदूषण कंट्रोल कमेटी व नगर निगम को कड़ी कार्रवाई करनी होगी।

इस अवसर पर दिल्ली के कैबिनेट मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने कहा कि वर्ष 2028 तक यमुना पुनर्जीवन मिशन के अंतर्गत दिल्ली में सभी प्रमुख नालों और सीवर से जुड़े कार्य पूर्ण कर लिए जाएंगे।

मुख्यमंत्री के नेतृत्व और निगरानी में दिल्ली सरकार और एमसीडी के सभी संबंधित विभाग एकीकृत, समयबद्ध कार्ययोजना के तहत कार्य कर रहे हैं। डीडीए भूमि सहित पूरे शहर में सीवर नेटवर्क के विस्तार का कार्य पूर्ण समन्वय के साथ तेजी से प्रगति पर है।

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हिन्दुस्थान समाचार / धीरेन्द्र यादव

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