प्रभु श्रीराम भारत की एकात्मकता के सबसे बड़े प्रतीक : आरिफ मोहम्मद खान

युगवार्ता    04-Jan-2026
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जबलपुर में रामायण कॉन्फ्रेंस में शामिल हुए बिहार के राज्यपाल


जबलपुर में रामायण कॉन्फ्रेंस में शामिल हुए बिहार के राज्यपाल


- जबलपुर में रामायण कॉन्फ्रेंस में शामिल हुए बिहार के राज्यपालजबलपुर, 04 जनवरी (हि.स.)। बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने कहा कि भारत की संस्कृति वेदों, उपनिषदों, गीता और रामचरित मानस पर आधारित है, जहां यह सिखाया गया है कि हर शरीर मंदिर है और परमात्मा हर व्यक्ति के हृदय में निवास करता है। प्रभु श्रीराम भारत की एकात्मता के सबसे बड़े प्रतीक हैं। जब हम हर व्यक्ति में दिव्यता देखेंगे, तभी वास्तविक एकता संभव होगी।

बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद रविवार को मध्य प्रदेश के जबलपुर में आयोजित तीन दिवसीय वर्ल्ड रामायण कॉन्फ्रेंस में बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। इससे पहले राज्यपाल खान के आगमन पर मानस भवन में राम-राम भजन से उनका स्वागत किया गया। उन्होंने मंचासीन संत कल्याणदास महाराज के चरण स्पर्श किए। राष्ट्रगान के बाद संतों के साथ दीप प्रज्ज्वलन कर सम्मेलन का शुभारंभ किया गया।

राज्यपाल ने अपने संबोधन में भारतीय संस्कृतिए प्रभु श्रीराम के आदर्शों व राष्ट्रीय एकात्मता पर गहरे विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि भारत का अध्यात्म उसकी आत्मा से परिभाषित होता है। हमारी संस्कृति वह नहीं है जो भेद पैदा करे बल्कि वह है जो विविधता का सम्मान करना सिखाती है। उन्होंने कहा कि जीवन का वास्तविक उद्देश्य केवल सुख की प्राप्ति नहीं, बल्कि ज्ञान की प्राप्ति होना चाहिए, ताकि हम अपने भीतर की वास्तविक एकता को देख सकें। उन्होंने स्पष्ट किया कि बिना एकात्मता को पाए मोक्ष की प्राप्ति संभव नहीं है।

उन्होंने भगवान राम के जीवन दर्शन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उन्होंने जिस तरह का जीवन जिया, उसी से देश में सांस्कृतिक एकता आई। उन्होंने कहा कि राम का अर्थ उस परमात्मा से है जो हर जीव के भीतर मौजूद है, इसलिए हर व्यक्ति हमारे सम्मान का अधिकारी है। उन्होंने वाल्मीकि रामायण के उस प्रसंग का भी उल्लेख किया जहां वन गमन के समय लक्ष्मण के क्रोध को राम अपनी शांति और सेवा भाव से संतुलित करते हैं। उन्होंने दान और गुरुदक्षिणा के महत्व को भारतीय परंपरा का मूल स्तंभ बताया।

राज्यपाल ने कहा कि दुनिया में जारी खून-खराबे और हिंसा के लिए हम खुद काफी हद तक जिम्मेदार हैं। भारत के पास शांति और एकात्म का संदेश है, लेकिन हम उसे दुनिया तक प्रभावी ढंग से पहुंचा नहीं पाए। उन्होंने बांग्लादेश में हिंदुओं के साथ हो रही हिंसा को निंदनीय बताते हुए कहा कि यह मानव संवेदना और करुणा का मामला है। बांग्लादेश में हिंदुओं की हत्या और हिंसा किसी भी रूप में स्वीकार्य नहीं है। ऐसी घटनाओं पर संवेदना और मानवीय करुणा के आधार पर एकजुट होकर आवाज उठाने की जरूरत है।

मानव प्रतिष्ठा ही शांति की बुनियाद

बिहार के राज्यपाल खान ने कहा कि पूरी दुनिया शांति चाहती है, लेकिन इतिहास बताता है कि हर दौर में इंसानी खून सस्ता समझा गया। वर्ष 1948 में मानवाधिकारों की अवधारणा आई, जिसमें मानव प्रतिष्ठा को मूल आधार माना गया, लेकिन व्यवहार में हम आज भी खुद को दूसरों से श्रेष्ठ मानते हैं। मैं सही हूं, बाकी सब गलत- यही सोच हिंसा को जन्म देती है। उन्होंने तुलसीदास की चौपाई और श्रीमद्भगवद्गीता के श्लोकों का उल्लेख करते हुए कहा कि सत्संग से वैराग्य, विवेक और तत्वज्ञान की प्राप्ति होती है, जो अंततः मुक्ति का मार्ग दिखाता है। उन्होंने आदिगुरु शंकराचार्य की भज गोविंदम् रचना का भी उल्लेख किया। उन्होंने आयोजकों से सिफारिश की कि इस तरह की वर्ल्ड रामायण कॉन्फ्रेंस देश के अन्य हिस्सों में भी आयोजित होनी चाहिए, ताकि युवा पीढ़ी इन मूल्यों से जुड़ सके।__________________

हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर

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