
भोपाल, 11 अक्टूबर (हि.स.)। शारदीय नवरात्रि के पहले दिन रविवार को केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने देशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए मां दुर्गा की उपासना को महिलाओं के सम्मान, सामाजिक संस्कारों और नैतिक दायित्वों से जोड़ने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि नवरात्रि में व्रत-उपवास रखना, साधना करना और मां की आराधना में लीन होना आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान करता है, लेकिन इस भक्ति की सार्थकता तभी है, जब हम अपने जीवन में बेटियों, बहनों और माताओं को सम्मान दें। उनके प्रति हमारा व्यवहार श्रद्धा, संवेदनशीलता और गरिमा से परिपूर्ण होना चाहिए।
केंद्रीय कृषि मंत्री ने नवरात्रि के पहले दिन सोशल मीडिया पर एक रील साझा कर देशवासियों से भावनात्मक अपील की। उन्होंने कहा कि मां आ गई हैं और पूरा देश आनंद, भक्ति तथा उत्सव के वातावरण में डूबा हुआ है। इन नौ दिनों में मां की आराधना और दुर्गा सप्तशती के पाठ से अद्भुत ऊर्जा प्राप्त होती है। यह ऊर्जा व्यक्ति को सद्बुद्धि प्रदान करने, सही मार्ग पर चलने और समाज तथा राष्ट्र के लिए बेहतर कार्य करने की प्रेरणा देती है। उन्होंने कहा कि देवी की पूजा का वास्तविक भाव जीवन के व्यवहार में भी दिखाई देना चाहिए। मंदिरों में पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठानों के साथ घर-परिवार तथा समाज में महिलाओं के प्रति सम्मान का भाव विकसित करना आवश्यक है।
शिवराज सिंह चौहान ने इस बात पर जोर दिया कि धार्मिक अनुष्ठानों के साथ व्यक्ति के आचरण में भी पवित्रता और संवेदनशीलता होनी चाहिए। यदि कोई व्यक्ति मां की आराधना करता है, लेकिन अपने जीवन में महिलाओं को उचित सम्मान नहीं देता, तो उसकी उपासना का उद्देश्य अधूरा रह जाता है। चौहान ने बेटियों को देवी स्वरूप बताते हुए कहा कि बहनों और माताओं में भी देवी का निवास है, इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को यह संकल्प लेना चाहिए कि उसके जीवन में बेटी, मां और बहन का सम्मान सर्वोपरि रहेगा। यह संकल्प किसी विशेष पर्व या धार्मिक आयोजन तक सीमित रहने के बजाय दैनिक जीवन का हिस्सा बनना चाहिए।
उल्लेखनीय है कि, नवरात्रि भारतीय संस्कृति में शक्ति की आराधना का प्रमुख पर्व है। मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा के माध्यम से शक्ति, साहस, करुणा और सद्बुद्धि की कामना की जाती है। पहले दिन मां शैलपुत्री की आराधना के साथ शुरू होने वाला यह पर्व श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक साधना और आत्मचिंतन का अवसर भी होता है। शिवराज सिंह चौहान ने इसी परंपरा के संदर्भ में देशवासियों से आग्रह किया कि वे मां की भक्ति के साथ अपने आचरण और जिम्मेदारियों पर भी विचार करें। महिलाओं का सम्मान परिवार की मर्यादा से लेकर समाज के व्यापक वातावरण तक सकारात्मक बदलाव का आधार बन सकता है। बेटियों को समान अवसर देना, बहनों की गरिमा का ध्यान रखना और माताओं के प्रति संवेदनशील रहना इसी भावना के व्यावहारिक रूप हैं। धार्मिक पर्वों के अवसर पर लिए गए संकल्प तभी प्रभावी होते हैं, जब उन्हें व्यवहार में उतारा जाए।
केंद्रीय कृषि मंत्री ने अपने संदेश के अंत में मां शैलपुत्री से सभी देशवासियों पर कृपा और आशीर्वाद बनाए रखने की प्रार्थना की। उन्होंने कामना की कि मां सभी को सद्बुद्धि दें, सन्मार्ग पर चलने की प्रेरणा दें और देश, समाज तथा आमजन के हित में बेहतर कार्य करने की शक्ति प्रदान करें। उन्होंने देशवासियों को नवरात्रि की शुभकामनाएं देते हुए ‘जय माता दी’ कहा। उनके संदेश में धार्मिक उत्साह के साथ सामाजिक चेतना का भी आग्रह दिखाई दिया।
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हिन्दुस्थान समाचार / डॉ. मयंक चतुर्वेदी