
-समाजवादी पार्टी में अवसरों का लाभ केवल सैफई परिवार को ही क्यों : अमरपाल मौर्य
लखनऊ, 12 अक्टूबर (हि.स.)। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राज्यसभा सांसद और भाजपा पिछड़ा वर्ग मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमरपाल मौर्य ने समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को तीन पन्नों का खुला पत्र लिखा है। सोमवार को प्रेस वार्ता में उन्होंने कहा कि वह यह पत्र अखिलेश यादव के दोनों आवासों पर भेजेंगे। उन्होंने दावा किया कि उत्तर प्रदेश की जनता और यादव समाज इन सवालों पर अखिलेश यादव से जवाब चाहता है।
सांसद मौर्य ने समाजवादी पार्टी की नीतियों और नेतृत्व पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि अखिलेश यादव खुद को यादव समाज का ध्वजवाहक और समाजवादी विरासत का उत्तराधिकारी मानते हैं, लेकिन उन्होंने समाजवाद के नाम पर परिवारवाद को बढ़ावा दिया है। उनके अनुसार, सपा में राजनीतिक अवसरों का लाभ मुख्य रूप से सैफई परिवार को मिला है।
अमरपाल मौर्य ने अपने पत्र का हवाला देते हुए कहा कि जिन कार्यकर्ताओं ने दशकों तक समाजवादी पार्टी के लिए संघर्ष किया, पार्टी के झंडे उठाए, लाठियां खाईं और जेल गए, उनके परिवारों को अपेक्षित राजनीतिक अवसर नहीं मिले। उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसे जमीनी कार्यकर्ताओं में से कितने लोगों के बेटे सांसद बने या उनके परिवारों को राजनीतिक विरासत मिली।
उन्होंने आरोप लगाया कि सांसद, विधायक, ब्लॉक प्रमुख और जिला पंचायत अध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण पदों के टिकट सैफई परिवार तक सीमित रहे। मौर्य ने सवाल किया कि क्या लाखों यादव कार्यकर्ताओं में कोई भी नेतृत्व करने के योग्य नहीं था?
भाजपा सांसद ने अखिलेश यादव पर तंज कसते हुए कहा कि उन्हें सत्ता विरासत में मिली और इसके लिए उन्होंने वास्तविक संघर्ष नहीं किया। उन्होंने आरोप लगाया कि इसी कारण समाजवादी पार्टी की राजनीतिक गतिविधियां अब सोशल मीडिया तक सीमित रह गई हैं।
मौर्य ने मुजफ्फरनगर दंगों का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि जब पूरा इलाका दंगों की आग में झुलस रहा था, तब सैफई में उत्सव और डांस कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे थे।
अमरपाल मौर्य ने कहा कि सामाजिक न्याय के नाम पर परिवारवाद का खेल अब नहीं चलेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि समाजवाद का नारा देने वाली पार्टी में राजनीतिक लाभ एक ही परिवार तक सीमित रहा है। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव से इन सवालों का जवाब पूरा प्रदेश और यादव समाज चाहता है। मौर्य के मुताबिक, यदि इन सवालों का जवाब नहीं मिलता है, तो लोकतंत्र में जनता ही अपना अंतिम फैसला सुनाती है।---------
हिन्दुस्थान समाचार / बृजनंदन