
- लद्दाख और उत्तर पूर्व के दूरस्थ क्षेत्रों में सीधे सेना के आपूर्ति डिपो तक पहुंचाया जाएगा
नई दिल्ली, 12 अक्टूबर (हि.स.)। भारतीय सेना ने सीमा पर तैनात सैनिकों के लिए 'भारत राइस' लांच किया है, जिसे लद्दाख और उत्तर पूर्व के दूरस्थ क्षेत्रों में सीधे सेना के आपूर्ति डिपो तक पहुंचाया जाएगा। इसके लिए सोमवार को नई दिल्ली में भारतीय सेना और भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के बीच परिचालन संबंधी आपात परिस्थितियों के दौरान एफसीआई के बुनियादी ढांचे के उपयोग के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर भी किए गए। उच्च गुणवत्ता वाला यह चावल अब स्थानीय एफसीआई गोदामों से सेना के डिपो में नहीं लिया जाएगा।
रक्षा मंत्री ने अपने संबोधन में 'भारत राइस' को एक ऐसे भरोसे के बंधन के रूप में वर्णित किया, जो किसान के खेत से शुरू होकर सैनिक की थाली तक पहुंचता है। उन्होंने कहा कि यह पहल 'जय जवान, जय किसान' की भावना को मूर्त रूप देती है, क्योंकि किसान की मेहनत सैनिक की शक्ति में बदल जाती है। उन्होंने यह भी कहा कि यह पहल छोटी लग सकती है, लेकिन इससे दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों में राशन पहुंचाने वाले सैनिकों को बहुत राहत मिलेगी। सैनिकों की परिचालन तत्परता केवल हथियारों पर निर्भर नहीं होती, बल्कि उनके शारीरिक स्वास्थ्य, मानसिक स्थिरता, मनोबल और सहनशीलता पर भी आधारित होती है, खासकर जब वे सबसे चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में सेवा कर रहे होते हैं।
रक्षा मंत्री ने कहा कि आधुनिक युद्ध में हथियार, उपकरण और प्रौद्योगिकी ही एकमात्र महत्वपूर्ण तत्व नहीं हैं, रसद व्यवस्था ही युद्ध शक्ति है। आज के युद्ध केवल मोर्चे पर ही नहीं जीते जाते, बल्कि आपूर्ति श्रृंखलाओं की मजबूती, भंडारण क्षमता, परिवहन नेटवर्क, भंडारण अवसंरचना और समय पर आपूर्ति की क्षमता जैसे कारक भी समान रूप से महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। राजनाथ सिंह ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के रणनीतिक विश्लेषण से स्पष्ट होता है कि भविष्य में संघर्षों के दौरान चेतावनी का समय बेहद कम हो सकता है। ऐसी स्थिति और युद्ध में तकनीक के बढ़ते समावेश से हमारी तैयारियों की कठिन परीक्षा हो सकती है।
रक्षा मंत्री ने कहा कि एफसीआई के साथ किया गया यह समझौता ज्ञापन उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। एफसीआई के पास देशभर में परिचालन की दृष्टि से महत्वपूर्ण क्षेत्रों सहित, गोदाम, भंडारण अवसंरचना, आधुनिक साइलो, सामग्री प्रबंधन उपकरण और प्रशिक्षित जनशक्ति मौजूद है। उन्होंने कहा कि अब जिस प्रकार लड़ाकू विमान एक्सप्रेसवे पर उतर रहे हैं और सीमा सड़क संगठन की सड़कों और पुलों का उपयोग स्थानीय निवासी भी कर रहे हैं, उसी प्रकार एफसीआई के गोदाम अब केवल खाद्य भंडारण तक सीमित नहीं रहेंगे, वे भारतीय सेना की आपूर्ति श्रृंखला का अभिन्न अंग बन जाएंगे।
इस अवसर पर सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ, सचिव (खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण) संजीव चोपड़ा और रक्षा मंत्रालय, उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय, एफसीआई, राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ लिमिटेड (एनएएफईडी) और सहकारी क्षेत्र के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। ------------
हिन्दुस्थान समाचार / सुनीत निगम