कज़ान सेंट्रल लाइब्रेरी में रखी गई भारत के छह ज्ञानपीठ पुरस्कार विजेताओं की किताबें, रूसी भाषा में किया गया अनुवाद

युगवार्ता    14-Oct-2026
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कज़ान की सेंट्रल लाइब्रेरी में आयोजित समारोह में भारत के कॉन्सुलेट जनरल जयसुंदर सहित पुस्तकों के अनुवादक


कज़ान सेंट्रल लाइब्रेरी में आयोजित समारोह  किताबों के अनुवादक के साथ सेशन


कज़ान, 14 अक्टूबर (हि.स.)। कज़ान में होने वाले दो दिवसीय टाइम बिजनेस फोरम से पहले बुधवार को सेंट्रल लाइब्रेरी में भारतीय लेखकों की छह किताबों को शामिल किया। सभी किताबें ज्ञानपीठ पुरस्कार विजेताओं द्वारा लिखी गई हैं जिनमें अमृता प्रीतम, गुलज़ार, फिराक गोरखपुरी, महाश्वेता देवी शामिल हैं।

कज़ान के सेंट्रल लाइब्रेरी में आयोजित इस खास मौके पर भारत के कॉन्सुलेट जनरल जय सुंदर, वाणी प्रकाशक के चेयरमैन अरुण माहेश्वरी, रिपब्लिक ऑफ तारतरस्तान के संस्कृति मंत्री इरादा अयुपोवा के साथ इन किताबों के अनुवादक मौजूद रहे।

इस मौके पर कज़ान में भारत के कॉन्सुलेट जनरल जय सुंदर ने कहा कि कला संस्कृति को साझे रूप से आगे बढ़ाने के लिए शब्द बेहद कारगर साबित होते है। इसी वजह से टाइम बिजनेस फोरम की शुरुवात से पहले आज भारत की छह प्रसिद्ध किताबों का रूसी भाषा में अनुवादित संस्करण यहां शामिल किया गया है। इससे रूस के लोग भी भारत की जीवन संस्कृति से रूबरू हो पाएंगे।

जयसुंदर ने कहा कि यह कार्यक्रम भारत और रूस के बीच रणनीतिक एवं आर्थिक साझेदारी को और मजबूत करने के उद्देश्य से दूसरे रूसी-भारतीय व्यापार मंच ‘टाइम बिजनेस फोरम के मद्देनजर हो रहा है। उन्होंने बताया कि गुरुवार से शुरू होने वाले टाइम बिजनेस फोरम दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश के नए अवसर विकसित करने के साथ तकनीक, फार्मास्यूटिकल्स, शिक्षा, लॉजिस्टिक्स, रक्षा, स्वास्थ्य और सांस्कृतिक आदान-प्रदान में सहयोग को बढ़ावा देने का अवसर प्रदान करेगा।

इस मौके पर वाणी प्रकाशन के चेयरमैन अरुण माहेश्वरी ने हिन्दुस्थान समाचार के साथ खास बात चीत में बताया कि १९६० से अब तक रूसी साहित्य को भारत के लोगों ने अच्छी तरह से पढ़ा है, अब हमारा मकसद है कि रूस के लोग भी भारत के साहित्य को जाने। इस मकसद से ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित लेखकों की भारत के अलग भाषाओं से ली गई हैं जिसमें हिंदी, पंजाबी, मराठी, बांग्ला भाषा शामिल है। इन सभी किताबों को रूसी भाषा में अनुवादित किया गया है।

वाणी प्रकाशन की सम्पादक अदिति माहेश्वरी ने बताया कि भारत का पुस्तक प्रकाशन उद्योग दुनिया में नई ऊंचाइयों को छूने जा रहा है। नीलसन बुक स्कैन की रिपोर्ट का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि भारत का बुक पब्लिशिंग मार्केट 2030-31 तक 21.4 अरब अमेरिकी डॉलर (लगभग 2 लाख करोड़ रुपये) तक पहुंच जाएगा। यानी भारत, अमेरिका और चीन के बाद दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा प्रकाशन बाजार बन जाएगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / विजयालक्ष्मी

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