
नई दिल्ली, 02 अक्टूबर (हि.स.)। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने जीएसटी इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) धोखाधड़ी मामले में ज्ञानचंद जायसवाल उर्फ बबलू जायसवाल और राज जायसवाल को गिरफ्तार किया है। दोनों को 30 सितंबर को धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 की धारा 19 के तहत गिरफ्तार किया गया। उन्हें 1 अक्टूबर को रांची की विशेष पीएमएलए अदालत में पेश किया गया, जहां से दोनों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
ईडी के रांची जोनल कार्यालय ने शुक्रवार को बताया कि दोनों की गिरफ्तारी 30 सितंबर को झारखंड के जमशेदपुर और पश्चिम बंगाल के कोलकाता में चार आवासीय एवं कार्यालय परिसरों पर पीएमएलए की धारा 17 के तहत की गई तलाशी और जब्ती की कार्रवाई के बाद हुई। ये परिसर ज्ञानचंद जायसवाल उर्फ बबलू जायसवाल, सीए संजय पारेख और अन्य से जुड़े थे। तलाशी के दौरान आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल उपकरण मिले, जिन्हें पीएमएलए के प्रावधानों के तहत जब्त किया गया।
ईडी ने बताया कि जांच जमशेदपुर स्थित वस्तु एवं सेवा कर खुफिया महानिदेशालय (डीजीजीआई) की ओर से दर्ज कराई गई कई शिकायतों के आधार पर शुरू हुई। डीजीजीआई की जांच में फर्जी आईटीसी तैयार करने और उसे विभिन्न कंपनियों तक पहुंचाने से जुड़ी एक संगठित धोखाधड़ी का पता चला था।
जांच में सामने आया कि इस सिंडिकेट ने 135 ऐसी फर्जी कंपनियों का जाल तैयार किया था, जो केवल कागजों पर मौजूद थीं। इन कंपनियों के जरिए बिना किसी वस्तु या सेवा की वास्तविक आपूर्ति के 5,000 करोड़ रुपये से अधिक के फर्जी चालान जारी किए गए। इस माध्यम से 734 करोड़ रुपये से अधिक का फर्जी आईटीसी तैयार कर विभिन्न लाभार्थी कंपनियों को दिया गया। इन कंपनियों ने कमीशन देकर प्राप्त फर्जी आईटीसी का इस्तेमाल अपनी जीएसटी देनदारी से बचने के लिए किया।
ईडी के अनुसार, ज्ञानचंद जायसवाल उर्फ बबलू जायसवाल और राज जायसवाल के नेतृत्व वाला समूह इस फर्जी आईटीसी धोखाधड़ी का प्रमुख लाभार्थी था। जांच में सामने आया कि उन्होंने अपने और परिवार के सदस्यों के नाम पर एम/एस मां शारदा एंडेवर प्राइवेट लिमिटेड, एम/एस मेकर्स कास्टिंग प्राइवेट लिमिटेड और एम/एस केदारनाथ ट्रेक्सिम प्राइवेट लिमिटेड जैसी कंपनियां बनाई थीं। इसके अलावा कर्मचारियों के नाम पर भी एम/एस जय भोले एंटरप्राइजेज जैसी इकाइयां बनाई गईं।
ईडी के अनुसार, इन कंपनियों के जरिए 54.33 करोड़ रुपये का फर्जी आईटीसी घुमाया गया। बाद में यह राशि उनके व्यक्तिगत बैंक खातों के साथ-साथ रिश्तेदारों और संबंधित संस्थाओं के बैंक खातों में पहुंचाई गई। ईडी ने इसे आरोपितों से संबंधित अपराध से अर्जित आय (प्रोसीड्स ऑफ क्राइम) के रूप में चिन्हित किया है। एजेंसी को संदेह है कि इस राशि का इस्तेमाल कारोबार और चल-अचल संपत्तियों की खरीद में किया गया।
ईडी ने बताया कि इस मामले में इससे पहले मई और अगस्त 2025 में भी कोलकाता, जमशेदपुर, रांची और अन्य स्थानों पर आरोपितों से जुड़े परिसरों पर तलाशी और जब्ती की कार्रवाई की गई थी। इन कार्रवाइयों में आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल उपकरण जब्त किए गए थे। करीब 70 लाख रुपये की नकदी जब्त करने के साथ बैंक खातों में मौजूद राशि को भी फ्रीज किया गया था।
जांच के दौरान ईडी ने 20 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की संपत्तियों से संबंधित दो कुर्की आदेश (पीएओ) भी जारी किए हैं। इसके अलावा 8 मई 2025 को पीएमएलए के तहत चार आरोपितों को गिरफ्तार किया गया था। इनमें से तीन वर्तमान में न्यायिक हिरासत में हैं।
ईडी ने बताया कि इस मामले में रांची की विशेष पीएमएलए अदालत के समक्ष अभियोजन शिकायत भी दाखिल की जा चुकी है और मामला विचारण के चरण में है। मामले में आगे की जांच जारी है।
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हिन्दुस्थान समाचार / प्रशांत शेखर